बीजेपी संगठन कहा -IAS तायल की नियुक्ति बर्दाश्त नहीं,पं दीनदयाल पर फेसबुक पोस्ट से विवादों में

रायपुर- राज्य सरकार ने अपने हालिया तबादले में आईएएस अधिकारी शिव अनंत तायल को बलरामपुर-रामानुजगंज सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी है, तायल की ज्वाइनिंग के पहले ही विरोध शुरू हो गया. विरोध किसी और ने नहीं, बल्कि स्थानीय बीजेपी नेताओं ने किया है. दरअसल नाराजगी की वजह शिव अनंत तायल का दिया वह बयान है, जिसमें उन्होंने बीजेपी के पुरोधा कहे जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर टिप्पणी की थी. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में बीजेपी के जिलाध्यक्ष शिवनाथ यादव के नेतृत्व में तमाम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह मुलाकात कर तायल की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की हैजिलाध्यक्ष शिवनाथ यादव ने कहा कि शिव अनंत तायल को जिला पंचायत सीईओ बनाए जाने का हर स्तर पर विरोध है. जिला पंचायत से लेकर बीजेपी पदाधिकारियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि जिस आईएएस अधिकारी ने दीनदयाल उपाध्याय पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, ऐसे अधिकारियों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे.

बीजेपी संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बतौर जिला पंचायत सीईओ काम कर रहे विकास तोपनो की नियुक्ति महज दो महीने पहले ही हुई थी. दो महीने में ही उनका तबादला होना भी कई सवाल खड़े करता है. आरोप यह भी लगाया गया है कि राजनीतिक षडयंत्र की वजह से तोपनो को नई पदस्थापना दी गई. कहा जा रहा है कि जिला पंचायत सीईओ रहते हुए अमृत विकास तोपनो भ्रष्ट तंत्र की सफाई अभियान में जुटे थे. कई प्रभावशाली इससे मुसीबत में आ गए थे. मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले बीजेपी संगठन के तमाम पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस दलील के साथ शिव अनंत तायल की नियुक्ति रद्द कर विकास तोपनो को यथावत रखने की मांग की. बताया जा रहा है कि इस मांग पर मुख्यमंत्री ने जल्द निर्णय़ लेने का आश्वासन दिया है.

बता दें कि 2012 बैच के आईएएस शिव अनंत तायल कांकेर जिला पंचायत के सीईओ पद पर तैनात थे तब उनकी फेसबुक पोस्ट सुर्खियों में आ गई थी . उन्होंने कोई छोटे-मोटे आदमी पर सवाल नहीं उठाया है। बल्कि सीधे आरएसएस और बीजेपी के पितृ पुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की बखियां उधेड़ दी है।दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय बीजेपी नेताओं के लिए न केवल प्रातः स्मरणीय हैं, बल्कि भारत सरकार से लेकर छत्तीसगढ़ समेत आधा दर्जन से अधिक राज्य सरकारें उनकी आइडियोलॉजी पर चलती हैं। 25 सितंबर को केरल के कोझीकोड में बीजेपी ने जन्मशती समारोह का आयोजन किया था, जहां प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी के तमात दिग्गज मौजूद थे।तायल जिस सरकार के अधीन नौकरी कर रहे हैं, उसके मुखिया डॉक्टर रमन सिंह भी जन्मशती कार्यक्रम में मौजूद थे। छत्तीसगढ़ सरकार ने वहां एक किताब का विमोचन कराया था। जिसमें ब्यौरा दिया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार पंडित उपध्याय की नीतियों को आत्मसात कर कौन-कौन सी योजनाएं चला रही है।

तायल ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि उपाध्याय का लेखक या विचारक के रूप में एक भी ऐसा काम नहीं है, जिससे उनकी विचारधारा समझी जा सके। वेबसाइटों में ढूंढ़ने पर एकात्म मानवतावाद पर उनके सिर्फ चार लेक्चर मिलते हैं। वो भी वह पहले से स्थापित आइडियाज थे। उपध्याय ने कोई चुनाव भी नहीं लड़ा। इतिहासकार रामचंद्र गुहा की पुस्तक मेकर्स ऑफ मॉडर्न इंडिया में आरएसएस के तमाम बड़े लोगों का जिक्र है। मगर उसमें उपध्याय की कोई चर्चा नहीं है।तायल डायरेक्ट आईएएस हैं। इसलिए, बड़ी चतुराई के साथ पोस्ट की एंडिंग की है। उपर की पंक्तियों में पंडित दीनदयाल उपध्याय की हैसियत बताने वाले तायल अचानक जिज्ञासु विद्यार्थी बन गए हैं। उन्होंने पूछा है कि मेरे अकादमिक जानकारी के लिए कोई तो पंडित उपध्याय के जीवन पर प्रकाश डाले। मतलब यह कि सरकार पूछे तो बचाव में यह तर्क रहे कि मैं उनके योगदान के बारे में अनभिज्ञ था। मुझे कुछ पता नहीं। इसलिए, मैं जानना चाहता था।

आईएएस अधिकारी के इस विवादित पोस्ट पर राज्य सरकार ने संज्ञान लेते हुए अप्रसन्नता जताई , साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तत्काल प्रभाव से मंत्रालय में अटैच कर दिया।हालांकि बीजेपी नेताओं के विरोध के बीच यह बताना लाजिमी है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर फेसबुक पर की गई टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने शिव अनंत तायल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. तायल ने सरकार को दिए अपने जवाब में खेद प्रकट किया था

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