देश की पहली लेडी कॉम्बैट अफसर, मूवी की शूटिंग देख तय किया था करियर

ग्वालियर.बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (BSF) के टेकनपुर के ट्रेनिंग सेंटर में शनिवार को 67 असिस्टेंट कमांडेंट का बैच पासिंग आउट परेड में शामिल होगा। देश के होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह इसमें शामिल होंगे। 1966 से शुरू हुआ ये सेंटर इस बार अपने असिस्टेंट कमांडेंट्स के 40वां बैच में इतिहास रचने जा रहा है। जिसमें देश को तनुश्री पारीक के तौर पर पहली महिला कॉम्बैट अॉफिसर यानी BSF की कमांडो मिली। राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली तनुश्री पारीक ने बताया कि, मैं जब चार साल की थीं, बीकानेर में बॉर्डर फिल्म की शूटिंग हो रही थी। इसमें BSF का अहम रोल था।

– फिल्म के कुछ सीन मेरे दिमाग में दर्ज हो गए। पापा शूटिंग के फोटो दिखाकर इन्स्पायर करते। बस वहीं से ठान लिया था कि वर्दी वाली सर्विस में ही जाना है और मैंने बंदूक उठाने का फैसला कर लिया था।
– आगे वे कहती हैं कि वे बड़ी हुईं और बीकानेर में BSF के कामकाज के तरीके को देखा। तब समझ में आया कि आर्मी की तरह ये ऐसी फोर्स है जो 24 घंटे देश की बॉर्डर को महफूज रखती है।
– मैंने नौकरी के लिए नहीं, पैशन के लिए BSF को चुना। साथ ही मेरा फोर्स में जाना तभी मायने रखेगा, जब दूसरी लड़कियां भी BSF ज्वाइन करना शुरू करेंगी।
– उनके मुताबिक, “लड़कियां सूरज की किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना छोड़ें धूप में तपकर खुद को साबित करें। एनसीसी ने मुझमें फोर्स में शांमिल होने का जज्बा जगाया। हमारा संयुक्त परिवार है जिसमें कुल मिलाकर 30 मैंबर्स हैं। जिन्हाेंने मुझे हमेशा मोटिवेट किया। अब सोचिए जिसके साथ परिवार के ही 30 लोगों की फौज खड़ी हो उसे कौन रोक सकता है। मुझे गर्व है कि मैं देश की पहली महिला कॉम्बैट अॉफिसर हूं।’’
15 सेकंड में 100 मीटर पार कर लिया
– तनुश्री ने बताया कि स्कूल और कॉलेज के दौरान एनसीसी में टफ ट्रेनिंग ली। 2012 में बीई कर ली। सालभर बाद ही BSF में ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए महिला अफसर के पद को मंजूरी मिली।
– UPSC से असिस्टेंट कमांडेंट के लिए फॉर्म भरा। अप्रैल, 2014 में फिजिकल टेस्ट के लिए दिल्ली बुलाया गया।
– मुझे 18 सेकंड में 100 मीटर और ढाई मिनट में 400 मीटर दौड़ना था। 15 सेकंड में ही 100 मीटर पार कर लिया।
– मेरा BSF में सिलेक्शन हो गया। दादा भंवरलाल जोशी को जब यह पता चला कि मैं BSF में जाने वाली पहली महिला अफसर हूं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। पूरे दो दिन घर में जश्न का माहौल रहा।

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