शंकराचार्य की पादुका सिर पर उठाने वाली कलेक्टर सूफिया फारूखी को कौम से बाहर करने की तैयारी

मध्यप्रदेश में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण व जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।जिसे नाम दिया गया है एकात्म यात्रा इसके  माध्यम से लोगों को एक जुट करना प्रशासन का लक्ष्य है। इस यात्रा के तहत शंकराचार्य की चरण पादुका जैसे मंडला जिले में पहुंची तो जिले की कलेक्टर सूफिया फारूखी ने शंकराचार्य की चरण पादुकाओं का पूजन किया और पादुकाओं को सिर पर रखकर यात्रा में निकल पड़ी जिसे देख कर  लोगो के आश्चर्य का ठिकाना न रहा।एकात्म यात्रा में मंडला कलेक्टर सूफिया फारूखी द्वारा शंकराचार्य की चरण पादुकाओं का पूजन और उन्हें सिर पर रखकर यात्रा में चलने पर  कांग्रेस ने महिला कलेक्टर को निशाने पर लिया है| नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मंडला कलेक्टर द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति नजदीकी दिखाने के लिए सिर पर चरण पादुका रखने को सिविल सेवा आचरण नियम का खुला उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखेंगे . अजय सिंहने कहा कि लोक सेवकों को इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से बचना चाहिए।नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि, सिर पर पादुका रखने से किसी को कैसे रोक सकते हैं। कांग्रेस को आरोप लगाने के सिवाय कोई काम नहीं। वे अच्छी नजीर न पेश कर सकते हैं, न करने देंगे। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के मुताबिक यह घटना बेहद चौकाने वाली है। ऐसा लगता है कि राज्य प्रशासनिक व्यवस्था ढहने की कगार पर है। राज्य मशीनरी का राजनीतिकरण बेहद घातक है, क्योंकि आईएएस अफसर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के तौर पर काम करते हैं।

और इधर, राजनीति शुरू

उधर मुस्लिम समाज के कुछ धर्म गुरु शंकराचार्य की चरण पदुका सिर पर उठाने के कारण मंडला कलेक्टर सूफिया फारूकी से खफा हैं और उनको कौम से बाहर करने की आवाज़ उठा रहे हैं । आॅल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के राष्ट्रीय  अध्यक्ष डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम ने कहा कि कलेक्टर सूफिया फारूकी के मामले में फैसला शूरा कमेटी की बैठक के बाद किया जाएगा।  डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम ने कहा कि बिलाशक सूफिया का कृत्य इस्लाम के खिलाफ है। शूरा कमेटी की बैठक इस माह के अंत में होगी। कमेटी में 140 सदस्य हैं। इनमें मुसलमानों के कई समाजों के मुखिया, अजेमर शरीफ, गुलबर्गा शरीफ, ताजउद्दीन बाबा की दरगाह सहित कई प्रमुख दरगाह शरीफोें के गद्दीनशीन शामिल होंगे।

इन्हें कर चुके इस्लाम से खारिज
शूरा कमेटी मरहूम नवाब मंसूर अली खां पटौदी, फिल्म स्टार सलमान खान, एमएफ हुसैन, सानिया मिर्जा और जाहिरा शेख सहित कई लोगों को इस्लाम से खारिज कर चुकी है।

इस्लाम के खिलाफ काम किया

सूफिया फारूकी ने शंकराचार्य की पादुकाएं सर पर ढो कर इस्लाम के खिलाफ काम किया है। मंडला के मौलाना जैनुल रजा और डिंडौरी के मौलाना जाहिर रजा ने भी कलेक्टर के इस अमल की शिकायत मुझसे की है। इसी महीने शूरा कमेटी की बैठक में सूफिया को इस्लाम से खारिज करने का फैसला लिया जाएगा।
डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम
अध्यक्ष आल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी

स्वरूपानंद सरस्वती ने उठाया सवाल
इधर, मामले में शंकाराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि अगर कलेक्टर सूफिया फारुखी ने आस्था के चलते सिर पर चरण पादुकाएं उठाई हैं तो ठीक है लेकिन अगर उन्होंने कलेक्टर होने के नाते यह काम किया है तो गड़बड़ है।

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=चरण पादुकाएं उठाया जाना सिविल सेवा आचरण संहिता का सीधा उल्लंघन है। लोक सेवकों को इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से बचना चाहिए। यह कोई शासकीय कार्यक्रम तो था नहीं।

अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष, मप्र विधानसभा 
= सिर पर पादुका रखने पर किसी के लिए कोई रोक नहीं। एक कलेक्टर ने किया, दूसरे क्यों नहीं कर रहे इस पर कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस को आरोप लगाने के सिवाए कोई काम नहीं। वे अच्छी नजीर न पेश कर सकते हैं न करने देंगे।

– नरोत्तम मिश्रा, प्रवक्ता व जनसंपर्क मंत्री 

= यह घटना बेहद चौकाने वाली है। ऐसा लगता है कि राज्य प्रशासनिक व्यवस्था ढहने की कगार पर है। राज्य मशीनरी का राजनीतिकरण बेहद घातक है, क्योंकि आईएएस अफसर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के तौर पर काम करते हैं।

विवेक तन्खा, सांसद, राज्यसभा

बोली IAS फारूखी-मैंने अद्वैतवाद को पढ़ा, यही सर्वधर्म समभाव

चरण पादुका विवाद पर बोली IAS फारूखी, मैंने अद्वैतवाद को पढ़ा, यही सर्वधर्म समभाव.  भोपाल.शहर की रहने वालीं सूफिया फारूखी 2009 बैच की आईएएस अफसर हैं। वे वर्तमान में मंडला कलेक्टरके तौर पर पोस्टेड हैं।  उन्होंने  बातचीत में कहा कि कार्यक्रम निजी नहीं बल्कि एक सरकारी आयोजन था इसलिए मैंने चरण पादुकाएं उठाई थीं।मैं शंकराचार्य के दर्शन को काफी गहराई से जानती हूं। वे निरंकार शिव की बात करते हैं। यही सर्वधर्म समभाव है। वैसे भी कई जिलों में कलेक्टर मठ और मंदिरों के प्रमुख हैं। इस नाते भी धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना मेरी ड्यूटी का ही हिस्सा है। यह कहना है मंडला कलेक्टर सूफिया फारूखी का।

और क्या कहा कलेक्टर सूफिया फारूखी …

Q. आप शंकराचार्य के दर्शन के बारे में क्या जानती हैं? 
A. मैं दर्शनशास्त्र की छात्रा रही हूं। मैंने शंकराचार्य का अद्वैतवाद के बारे में काफी गहराई से पढ़ा है। यह निरंकारी शंकर की बात करता है। जिसका कोई आकार नहीं, कोई धर्म नहीं। इस लिहाज से यह सर्वधर्म समभाव ही तो है।

आपने चरण पादुकाएं क्यों उठाईं?
यह एक सामान्य प्रक्रिया थी। एक कलेक्टर होने के नाते सामाजिक समरसता के लिए कोशिश करना हमारा कर्तव्य है। मैं हिंदू ही नहीं सिख, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के कार्यक्रमों में भी शामिल होती हूं। छुआछूत खत्म करने के लिए मैंने सामाजिक समरसता कार्यक्रम में भी भोजन किया है।
क्या एक कलेक्टर होने के नाते आपका यह करना उचित था?
यह निजी नहीं, बल्कि एक सरकारी कार्यक्रम था। कलेक्टर होने के नाते मुझे ही इस कार्यक्रम की अगुवाई करनी थी। कई जगह कलेक्टर ही मठ और मंदिर के प्रमुख होते हैं। यह मेरी ड्यूटी का हिस्सा है।
अगर इस मामले में धार्मिक कट्टरपंथी आपके खिलाफ फतवा जारी कर दें तो?
वह जब जारी होगा तो उसका भी सामना किया जाएगा। वैसे मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। वही किया जो मुझे करना चाहिए था।
मामले का राजनीतिकरण हो रहा है। कांग्रेस के कुछ नेता ट्वीट करने के साथ ही बयानबाजी भी कर रहे हैं?
यह एक सामान्य सी बात थी। मीडिया ने इसे जिस तरह से लिया और चर्चा का विषय बना दिया उस पर मैं क्या कह सकती हूं। इसी तरह इस पर हो रही बयानबाजी पर भी मैं कुछ नहीं कहना चाहती।

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