छतीसगढ़ में रिव्यू कमेटी ने दागी आईएएस अफसरों के नाम छांटे,तीन माह बाद अंतिम सिफारिश

दुर्ग/रायपुर.राज्य के दागी आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों की सेवाओं के रिव्यू के लिए बनी कमेटी गुरुवार को बैठी जरूर पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई। मुख्य सचिव विवेक ढांड की अध्यक्षता वाली कमेटी ने  केवल आईएएस अफसरों के सर्विस रिकार्ड खंगाले और छंटनी भी की। अब कमेटी तीन माह बाद पुन: बैठकर कंपलसरी रिटायरमेंट के लिए करेगी।
लोक सुराज अभियान के तहत सीएस ढांड के दुर्ग में होने के कारण कमेटी की बैठक कलेक्टर चेंबर में कर ली गई। इसमें केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में एमपी के एसीएस बीआर नायडू के अलावा छग के एसीएस एन के असवाल, अजय सिंह और डीडी सिंह भी शामिल हुए। दोपहर सवा तीन बजे से पौन घंटे चली बैठक में तीन केटेगरियों में बांटकर आईएएस अफसरों के सर्विस रिकार्ड देखे गए। इनमें 50 साल की आयु के साथ 20 और 15 साल की सेवा पूरी करने वाले अफसर थे। इस केटेगरी में 1981 से 92 बैच के 24 डायरेक्ट और 58 प्रमोटी अफसर आते हैं। समिति के एक सदस्य ने बताया कि वार्षिक चरित्रावली के अनुसार इन अफसरों की स्क्रूटनी कर ली गई है। करीब 25-30 अफसरों की वाच लिस्ट बनाई गई है। इसमें अंतिम निर्णय के लिए तीन माह बाद फिर बैठक की जाएगी। उसमें ही दागदार सीआर और आचरण के अनुसार कंपलसरी रिटायरमेंट के लिए सिफारिश की जाएगी। वहीं सूत्रों ने बताया कि पांच आईएएस अफसरों पर रिटायरमेंट की गाज गिरनी तय मानी जा रही है। इनमें दो प्रमुख सचिव और एक डीएफओ के नाम बताए जा रहे हैं। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य सचिव विवेक ढांड ने कहा आज किसी अफसर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।दो संयुक्त सचिव स्तर के हैं। समयाभाव के कारण आज आईपीएस और आईएफएस अफसरों की स्क्रूटनी नहीं हो पाई। इसके लिए समिति ने सीएस ढांड को डीजीपी और पीसीसीएफ के साथ पृथक बैठक कर स्क्रूटनी करने अधिकृत कर दिया।
बैठक बेनतीजा रही
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि रिव्यू कमेटी की बैठक बेनतीजा रही। वहीं सीएस विवेक ढांड ने कहा कि किन्ही कारणों से अंतिम स्क्रूटनी नहीं हो पाई जिनका वे खुलासा नहीं कर सकते।
बैगों में भेजे थे सीआर और दस्तावेज
इस बैठक के लिए करीब 82 आईएएस अफसरों के सर्विस रिकार्ड तीन बैगों में भरकर पुलिस सुरक्षा में दुर्ग भेजे गए थे। इनमें सीआर के साथ अफसरों पर लंबित विभागीय व अन्य जांच के प्रतिवेदन और मिनिट्स भी शामिल थे। समिति ने इन सभी पर सरसरी निगाह डाली और निर्णय को अगली बैठक तक के लिए टाल दिया। कमेटी को अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेजनी है।

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