जयराम की ताजपोशी के बाद हमीरपुर में सन्नाटा, धूमल समर्थक निराश

हमीरपुर.छह दिन की लंबी जद्दोजहद के बाद सिराज के विधायक जयराम ठाकुर की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी के ऐलान से हमीरपुर में मायूसी छा गई है। तीन दिनों तक शिमला में चले घटनाक्रम के बाद धूमल समर्थकों को कहीं-कहीं उम्मीद की किरण दिखती थी, लेकिन शनिवार को ही जब इसके संकेत मिल गए, तो धूमल समर्थक हमीरपुर लौटना शुरू हो गए थे। रविवार को जय राम ठाकुर के ऐलान के बाद धूमल के इस गृह जिला में एकदम सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसी मायूसी तो 2012 में जब सरकार नहीं बन पाई थी तब भी नहीं थी।प्रदेश को 46 साल के इतिहास में पहली बार राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली मंडी से मुख्यमंत्री मिला है। पिछड़े इलाके सराज के जयराम प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री बनेंगे और इस पद पर बैठने वाले छठे शख्स होंगे।

इससे पहले विधायक दल की बैठक एक घंटा चली। पार्टी के सभी बड़े नेताओं और विधायकों के बीच चली चर्चा के बाद आखिर जयराम ठाकुर के नाम पर सभी विधायकों ने अपनी सहमति जताई। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने जैसे ही सिराज के विधायक जयराम ठाकुर के नाम की घोषणा की वैसे ही बाहर खड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। लोग ढोल नगाड़ों और आतिशबाजियां कर जयराम ठाकुर जिंदाबाद के नारे लगाने लग पड़े। जय राम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी नारे लगाए। जैसे ही जयराम ठाकुर पीटरहॉफ से बाहर निकले उनके समर्थकों ने उन्हें घेर लिया और गोदी में उठा कर उनकी जयकार करने लगे। उन्हें अपनी गाड़ी तक पहुंचने में काफी समय लग गया।

केंद्रीय मंत्रियों के आने के बाद आेर तेज हुई समर्थकों की धड़कनें

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, नरेंद्र तोमर, निर्मला सीतारमण, प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय सहित प्रदेश के चारों सांसद शांता कुमार, अनुराग ठाकुर, राम स्वरूप और वीरेंद्र कश्यप सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पीटरहॉफ पहुंचे सब ने फूल मालाएं पहना कर गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। केंद्रीय नेता जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट से सीधे पीटरहॉफ पहुंचे। केंद्रीय मंत्रियों के आने के साथ ही सब में मुख्यमंत्री के ऐलान को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई।

जिन्होंने पार्टी झंडे तक नहीं लगाए वो आज अनुशासनहीनता की बात कर रहे हैं: धूमल

भाजपा विधायक दल की बैठक में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने नारे लगाने वालों को अनुशासनहीनता के दायरे में लाने वालों को करारा जवाब दिया है। पीटरहॉफ में पत्रकारों से बातचीत में धूमल ने कहा कि जिन लोगों ने घरों में पार्टी के झंडे तक नहीं लगाए वो आज अनुशासनहीनता की बात कर रहे हैं। पर्यवेक्षकों के समक्ष धूमल व जयराम के पक्ष में नारेबाजी करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को सांसद शांता कुमार ने अनुशासनहीनता करार दिया था और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने उनकी बात को सही करार दिया था। धूमल ने कहा कि जो भी फैसला उनके संदर्भ में पार्टी ने पहले लिया है वह उन्होंने माना और सत्य निष्ठा से काम किया। जी जान से काम किया। आगे भी ऐसा ही होगा।

धूमल ऐसे हारे कि छह दिन तक पार्टी को मुख्यमंत्री ही नहीं मिला

प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल के हारने के बाद प्रदेश में भाजपा को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा कि वह छह दिनों तक सीएम का चयन ही नहीं कर पाई। हालांकि पार्टी पहले मुख्यमंत्री के चेहरे पर चुनाव न लड़ कर पार्टी पर चुनाव लड़ रही थी। किन्हीं परिस्थितियों के कारण भाजपा को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना पड़ा और पार्टी का यह दाव पार्टी पर भारी पड़ गया। पार्टी जीत कर भी प्रदेश में जीत का जश्न नहीं मना पा रही थी। रविवार को सब की सहमति के साथ केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम की घोषणा करके पार्टी को नए नेतृत्व के साथ सरकार बनाने का मौका प्रदान कर दिया।

पार्टी के शीर्ष नेताओं का हिमाचल आना जाना लगा रहा, सहमति भी नहीं बन रही थी

प्रदेश में सभी मुख्यमंत्री के ऐलान का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लोगों में अटकलों का बाजार भी खूब गर्म था। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री की घोषणा न कर पाना विरोधियों को भी खूब हवा दे रहा था। सीएम की घोषणा में हो रही देरी से पार्टी में गुटबाजी भी खुल कर सामने आने लग पड़ी थी। पार्टी के शीर्ष नेताओं का हिमाचल आना जाना लगा रहा। विधायक दलों की बैठक कर रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी गई। लेकिन सहमति कहीं पर भी नहीं बन पा रही थी। रविवार को पर्यवेक्षकों के शिमला पहुंचने के बाद सभी की निगाहें उन पर टिक गई और। विधायक दल की बैठक में पूरा निष्कर्ष निकल कर आ गया और जयराम ठाकुर के नाम का विधिवत ऐलान कर दिया गया। जयराम ठाकुर के नाम की घोषणा होते ही पार्टी जीत के जश्न में डूब गई। सीएम के घोषणा होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में एक दूसरे को बधाई देने का तांता लगा रहा।

मकसद 2019 का लोकसभा चुनाव

राजमिस्त्री के बेटे और ठाकुर जाति के 52 साल के जयराम को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के पीछे का मकसद 2019 का लोकसभा चुनाव भी है, क्योंकि प्रदेश में 36% वोट ठाकुरों के हैं। भाजपा ने प्रेम कुमार धूमल को सीएम प्रोजेक्ट किया था, लेकिन वह हार गए। फिर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा सीएम पद की दौड़ में शामिल हो गए। नड्‌डा और धूमल के पक्ष में लॉबिंग बढ़ती देख फैसला पांच दिन लटकाया गया। रविवार को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण व नरेंद्र तोमर ने शिमला पहुंचकर विधायक दल की बैठक ली, जिसमें जयराम का नाम घोषित किया गया।

14 किमी पैदल स्कूल जाते थे, मजदूरी करके पढ़े

सराज इलाके के थुनाग के साथ लगता तांदी जयराम का पैतृक गांव है। वे रोज 14 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते थे। बचपन गरीबी में बीता। पिता जेठूराम राजमिस्त्री थे। हालात ऐसे थे कि 10वीं के बाद उन्हें एक साल के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी। अागे की पढ़ाई के लिए उन्होंने मजदूरी करके पैसे जुटाए। उसके बाद उन्होंने वल्लभ कॉलेज मंडी में एडमिशन लिया। उसके बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री ली। 26 साल की उम्र में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े पर हार गए। लेकिन, उसके बाद कभी नहीं हारे।

राजनीतिक सफर…

– 6 जनवरी 1965 को किसान परिवार में जन्मे, कॉलेज में एबीवीपी से जुड़े।
– 1986 में एबीवीपी की प्रदेश इकाई के संयुक्त सचिव बने। फिर पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।
– 2004 से 2005 तक भाजपा के उपाध्यक्ष रहे। 2006 में अध्यक्ष बने। उस दौर में पार्टी शांता और धूमल खेमे में बंटी हुई थी। नेताओं को एक मंच पर लाकर 2007 के चुनाव में भाजपा को सत्ता दिलाई।

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