भारत में पाकिस्तान के हाईकमिश्नर अब्दुल बासित के रिप्लेसमेंट पर विचार

इस्लामाबाद. भारत में पाकिस्तान के हाईकमिश्नर अब्दुल बासित के रिप्लेसमेंट पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उनकी जूनियर रहीं तहमीना जन्जुआ को फॉरेन सेक्रेटरी बनाए जाने से बासित नाराज चल रहे हैं। बता दें कि मार्च 2014 में बासित को इंडिया में अप्वाइंट किया गया था और उनका टेन्योर पूरा हो चुका है।

सोर्सेज ने बताया कि इस्लामाबाद में फैसले ले रहे अफसरों से बासित की अनबन जारी है।
– सोर्सेज ने बताया, “बासित को फॉरेन सेक्रेटरी बनाने का वादा किया गया था और बासित ने उम्मीद लगा रखी थी। लेकिन, आखिरी वक्त ये फैसला एजाज अहमद चौधरी के फेवर में चला गया और उन्हें ये पोस्ट दे दी गई।”
– “इस साल भी भी बासित डिसीजन-मेकर्स का फेवर हासिल करने में फेल हो गए। फरवरी में एक बार फिर बासित की जगह तहमीना को फॉरेन सेक्रेटरी अप्वाइंट कर दिया गया, वो इस पोस्ट पर आने वाली PAK की पहली महिला हैं।”
 इस्तीफा देने की सोच रहे थे बासित
– सोर्सेज ने बताया, “तहमीना के अप्वाइंटमेंट के बाद नाराज बासित इस्तीफा देने की सोच रहे थे। लेकिन, उन्होंने पोस्ट पर बने रहने का फैसला किया। बासित आला अधिकारियों को ये क्लियर कर देना चाहते हैं कि वो अपनी जूनियर से नीचे की पोस्ट पर काम नहीं करेंगे।”
 पीएम की पॉलिसी में फिट नहीं बैठ रहे बासित
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, “अफसर ये नहीं समझ पा रहे हैं कि टेन्योर पूरा कर चुके बासित से किस तरह डील किया जाए। बासित के पास काम करते रहने का ऑप्शन है, लेकिन मुश्किल ये है कि उन्हें मौजूदा सरकार लड़ाकू तेवरों वाला समझती है। ऐसे में वो पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्तों की प्राइम मिनिस्टर की पॉलिसी में फिट नहीं बैठते।”
– “बासित के लिए एक और ऑप्शन है कि उन्हें किसी यूरोपियन देश की राजधानी में हाईकमिश्नर या एम्बेसडर बना कर भेजा जाए। आखिरी ऑप्शन ये कि दिल्ली में बासित का रिप्लेसमेंट भेजा जाए और उन्हें पाकिस्तान वापस बुलाया जाए। इसके बाद बासित को लंबी छुट्टी पर भेज दिया जाए।”
सोहैल महमूद के नाम पर चर्चा
– सोर्सेज बताते हैं कि सीनियर डिप्लोमैट सोहैल महमूद के नाम की चर्चा बासित के रिप्लेसमेंट के तौर पर हो रही है। इसके अलावा पूर्व स्पोक्सपर्सन तस्नीम असलम के नाम पर भी विचार हो रहा है।
– बता दें कि पाकिस्तान डे पर बासित ने कहा था कि लंबे समय से अनसुलझे कश्मीर का मसला वहां रहने वाले कश्मीरियों की उम्मीदों के हिसाब से सुलझना चाहिए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »