“हमारा काम राजनीति करना नहीं है” -छग विधानसभा में प्रमुख सचिव देवेन्द्र वर्मा कहते हैं

रायपुर से लौटकर सोमदत्त शास्त्री /नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव///

छत्तीसगढ राज्य की विधानसभा दो दशक से भी कम उम्र की जवान पर संसदीय प्रणाली के पालन – शोधकार्य में गंभीरता कीमिसाल...

छत्तीसगढ. की विधानसभा में प्रमुख सचिव श्री देवेन्द्र वर्मा कहते हैं कि हमारा काम राजनीति करना नहीं है हम जिस काम के लिये सदन में हैं वह विधिक रूप से संचालित हो बस उसी से कार्य संतुष्टी का अनुभव होता है. उनका रहन-सहन और पहनावा पद की गरिमा के अनुरूप होता है वे अपने व्यक्तित्व के कारण न केवल प्रशासनिक अधिकारी समुदाय के बीच ही नही बल्कि सदन में पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के मध्य सम्मान और गरिमापूर्ण स्थान रखते हैं.

विकासशील छत्तीसगढ.राज्य की विधानसभा दो दशक से भी कम उम्र की जवान है पर संसदीय परंपराओं  कार्यविधि और प्रक्रियाओं संबंधी आचरण में लोकतंत्र के प्रति अपने गंभीर इरादों की परिचायक है. तीन ऐसे कारण हैं जिनके प्रभाव से छग राज्य के लोकतंत्र के सबसे बडे मंदिर की प्रतिष्ठा देशभर में तो स्थापित हुई ही हैं साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की संवैधानिक व्यवस्था के एक  आदर्श उदाहरण के तौर पर वहुऊदेशीय विधि विशेषग्यों के समक्ष मजबूत रूप से पहचानी गई है.

छग के अनेक प्रमुख नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका

विभाजन से पूर्व मप्र विधानसभा में छग के अनेक प्रमुख नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.उसमें सभी राजनीतिक दलों के अनेक ओजस्वी नेता न केवल सदस्यों के रूप में बल्कि संसदीय विधि कार्य के विशेषज्ञ के रूप मे प्रमुख पदों पर आसीन रहे. तत्कालीन् मध्यप्रदेश की विधानसभा में जब सवाल उठते रहे है तब छग के सभी प्रमुख नेताओं ने अपनी ओर से सदैव विधानसभा की कार्यवाहियों में संवेदनशील और प्रतिबद्धरूप से भागीदारी की. परिणाम यह रहा कि छग की नई विधान सभा के आरँभिक दिनों से ही सभी दलों के प्रतिभागियों ने सत्र की कार्यवाहियों में परंपरा तथा विधिक प्रक्रिया के प्रति अपने अनुभव के उपयोग के मामले में गजब का समर्पण दिखाया. नतीजा यह कि बीते पन्द्रह सालों में विधानसभा छग राज्य न केवल विधानसभा के सत्र के दौरान बल्कि राज्य सरकार के विधिक सुशासन की निरंतरता के लिये राज्य के प्रमुख लोकतंत्र के मंदिर के रूप में सहज रूप से समाविष्ठ हो गई है.पन्द्रह सालों से जारी रमनसिंह सरकार के कामकाज नें विधानसभा का संस्थागत गौरव बढाया है.

राज्यसभा की तरह आचरण समिति का गठन

छग विधानसभा में प्रमुख सचिव हैं श्री देवेन्द्र वर्मा. बहुत प्रोफेशनल अनुभवी संसदीय प्रक्रिया एवं विधिक मामलों के जानकार और बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. विधानसभा परिसर के प्रशासनिक खण्ड में मुख्यमंत्री के कक्ष से लगा उनका भी कक्ष है. श्री देवेन्द्र वर्मा ने अपने कक्ष में अनौपचारिक रूप से  नई विधान सभा प्रतिष्ठत होने के दूसरे कारण का उल्लेख करते हुए बताया कि हमारे राज्य की राज्य सभा देश के सर्वोच्च सदन राज्यसभा में जिस प्रकार आचरण समिति का गठन किया गया है उसी प्रकार छत्तीसगढ राज्यविधानसभा में आचरण समिति गठित करने वाली पहली विधानसभा के रूप में जानी जायेगी. श्री देवेन्द्र वर्मा नें तीसरा कारण बताया छग विधानसभा के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में मेजबानी का जो अवसर मिला वह एशिया के अनेक देशों की कामनवैल्थ नीति के अन्तर्गत विधानभवन में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों जिनमें श्री लंका मलेशिया पाकिस्तान की स्टेट असेंबली प्रसायडिंग आफिसर्स और काँमनवैल्थ देशों के पार्लियामेंट्री एसोसिएशन्स बहुत महत्व पूर्ण रही.

आपके नियमित काम मे सबसे बडी चुनौती क्या है..

े     सबसे बडी चुनौती पक्ष और विपक्ष संतुलन बनाकर कार्य करना होता है. ताकि अध्यक्ष महोदय के प्रति सदन में पूर्ण विश्वास रहे और सदस्यगण प्रश्न और प्रतिप्रश्न करते समय प्रक्रिया के साथ चलें. लोकतंत्र में सत्र के दौरान सदन के पटल पर होने वाली कार्वाहियां बहुत विधिक महत्व रखती हैं इसलिये प्रक्रिया का ध्यान रखना कोई चूक ना होना हमारे लिये सचमुच चुनौती ही होती है.

 विधिक प्रशासन के महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में आपकी मुश्किलें क्या है.

े     (श्री वर्मा नें सहज रूप से बताया )विधान सभा में विधिक प्रक्रिया के अनुपालन और प्रशासनिक कार्य बहुत ही अलग प्रकृति  के होते हैं इसके लिये कानूनी रूप से दक्ष और मेहनत करने वाली टीम और अधिकरियों की जरूरत होती है. टीम में बहुत सारे दक्ष और प्रोफेशनल्स की जरूरत कभी कम नही होती. विधि के क्षेत्र में हो रहे बदलाव को देखते हे प्रशिक्षणों की जरूरतों को नकारा नहीं जा सकता.

क्या आपके यहां ट्रेनिंग या वर्कशाप नही होते.

े     विधानसभा के लिये माननीय सदस्य बहुत महत्वपूर्ण इकाई होते हैं .सभी सदस्यों के प्रति हमारी जबाबदेही है इसलिये प्रश्नों आदि के लिये जो सहायता आदि नियमित रूप से है किन्तु स्टाफ को भी समय -समय पर प्रशिक्षित किया जाता है लेकिन फिर भी बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत तो हमेशा बनी रहेगी. लेकिन हर सेक्शन में ट्रेनिंग होती है. प्रश्न शाखा राइटप बनाना तथा सेक्शन आफिसर्स का रोल बहुत महत्वपूर्ण है. सबकी ट्रेनिंग होती है.

आपके लिये कौन ज्यादा महत्वपूर्ण होता है मुख्यमंत्री या नेता प्रतिपक्ष...

े     हमारे लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण विधायक होता है. जनता ने लोकतांत्रिक रूप से जिसे अपने प्रतिनिधि के तौर पर लोकतंत्र के मंदिर में भेजा है. इसलिये हमारी प्राथमिकता पर सदैव माननीय सदस्यगण ही होते है. इसीलिये विधायकगणों को समुचित सम्मानदेना और प्रश्न आदि के लिये समुचित सहायता करना हमारा प्रथम धर्म है. सदन की रौनक होते हैं इसके माननीय सदस्यगण. इस सदन के नेता के रूप में मुख्यमंत्री जी तथा नेता प्रतिपक्ष दोनों महत्वपूर्ण है.

आपकी विधानसभा सदस्यों से क्या अपेक्षा होती है.

े     हमारी अपेक्षा तो यही है कि सदन की बैठके अधिक से अधिक हों. लोकहित के सारे मामलों पर सदन के निर्णय शीघ्र लागू हों. विधायकगण प्रश्न करे लोकहित मुद्दों पर चर्चा हो इसलिये माननीय सदस्यों को सदन की कार्यवाही में अपना समुचित योगदान देना राज्य के लिये हितकर होगा.हालांकि सदस्यों को कई बार विभिन्न बिषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रबोधनों के जरियेबताया जाता है पर और व्यापक रूप से कार्य की जरूरत है जिसे हम आने वाले दिनों में विभिन्न वर्कशाप्स के जरिये करेंगे. विधायकगण विधेयकों पर सार्थक चर्चा करें संशोधन देवें ताकि विधानसभा की कार्वाई अपने उद्देश्य को सार्थक करे.

संसद में शोर शराबा बढता जा रहा है आप किस रूप में देखते है इसे ?

े     हमारे काबिल सांसद विचार विमर्श और बहस के द्वारा जनमत को अपने पक्ष में कर सकते हैं लेकिन लगता है कि वे अपने कर्तव्य भूल गए हैं। संसद प्रजातंत्र का मंदिर है, यहां मान मर्यादा का पालन करना, नियम परंपराओं के अनुरूप जनता की समस्याओं पर विचार और बहस करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा है कि देश की शासन व्यवस्था संसदीय प्रणाली के जरिए पिछले 65 साल से सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इससे जनता में यह विश्वास पैदा हुआ है कि संसदीय प्रणाली ही शासन की सबसे प्रभावी प्रणाली है। उसकी यह अपेक्षा भी प्रबल हुई है कि इन सर्वोच्च संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

कौन है जो अपनी प्रभावी भूमिका से इस पर लगाम लगा सकता है ?

े     संसद के कुछ सदस्य शोरगुल करके, कार्यवाही में व्यवधान पैदा करके, आसंदी के प्रति अशोभनीय व्यवहार करके संसद व उसके सदस्यों की छवि खराब कर रहे हों तब   राष्ट्रपति को अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दोनों सदनों के सदस्यों का अपने अभिभाषण के जरिए मार्गदर्शन करना चाहिए। संसद में अपनी बात रखने के लिए नियम प्रक्रियाएं मौजूद हैं जिनका पालन करते हुए प्रतिपक्ष अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है।  राष्ट्रपति संसद के अविभाज्य अंग हैं। संविधान के अनुच्छेद 86 (1) के मुताबिक राष्ट्रपति संसद के किसी एक सदन या एक साथ दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकते हैं। इस अनुच्छेद के प्रयोग का यही समय है।

देवेन्द्र वर्मा के बारे में …

छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव श्री देवेन्द्र वर्मा बर्ष 1982 में विधानसभा की प्रशासनिक सेवा में भर्ती हुए. उन्हें विधानसभा में श्री यज्ञदत्त शर्मा रामकिशोर शुक्ल राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल के अलावा बृजमोहन मिश्र के कार्यकाल को निकट से देखने का मौका मिला है. राजस्थान के कुचामन से मध्यप्रदेश की विधानसभा तक पहुँचने से पहले वे एक बहुराष्ट्रीय  कंपनी के मुलाजिम भी रहे हैं. पुस्तकालयाध्यक्ष से लेकर रिसर्च आफिसर तक के काम का अनुभव उनके व्यवसायिक हुनर का परिचायक है. वे बहुत सरल है लेकिन अपने काम और उसकी विधिक प्रक्रिया के प्रति सचेत. श्री वर्मा बहुत मितभाषी है. काम से अघिक बोलना नहीं चाहते देवेंद्र वर्मा, मध्यप्रदेश में अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्यरत थे. राज्य बंटवारे के समय इन्हें प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ विधानसभा भेजा गया. 6 जुलाई, 2001 को छत्तीसगढ़ में पदोन्नति पाकर उप-सचिव बनाये गये और दो साल बाद 29 सितंबर, 2003 को वर्मा को अपर-सचिव बनाया गया. इसके बाद 9 जुलाई, 2004 को देवेंद्र वर्मा को विधानसभा का सचिव बने . इसके बाद विधानसभा का प्रमुख सचिव बना दिया गया.

श्री वर्मा के अनुसार इस इंटरनेशनल कंवेशन में यह बिषय चर्चित रहा कि अधिवेशन की कार्वाही हिन्दी में हो. इस प्रकार उस कवेंशन की सारी कारवाही हिन्दी में संपन्न हुई. श्री वर्मा ने माना कि मुख्यमंत्री श्री रमनसिंह सदन की विधिक प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं के निर्वाह के प्रति बहुत सकारात्मक सोच रखते हैं यही कारण है कि बीते डेढ. दशकों में विधिक परंपराओं के अनुपालन के मामले में विधानसभा अव्वल रही हविधानसभा पटल पर होने वाली कार्यवाहियों के दौरान सचिव पद पर रहने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी बहुत गंभीर होती है.

 

श्री देवेन्द्र वर्मा
     जन्मतिथि 02  नवम्बर 1953
     वैवाहिक स्थिति विवाहित
      संतान दो
     शैक्षणिक योग्यता बी.एससी., बी.लिब.एससी., एम.ए. (अर्थशास्त्र), एलएल.बी.
     पता (कार्यालय) छत्तीसगढ़ विधानसभा, विधान नगर, रायपुर (छ.ग.) 492005
     पता (निवास) ई-1, विधानसभा आवासीय परिसर, विधान नगर, रायपुर (छ.ग.)
     दूरभाष कार्यालय +91-771-2283616, 2283615 (फैक्स)

निवास +91-771-2283740

     ई-मेल secycgvs@rediffmail.com
     विदेश यात्रा  विविध यात्राएं
     अभिरूचि पठन, पाठन, समाज सेवा, संगीत सुनना एवं ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलों का भ्रमण
   कैरियर दिनांक 6 दिसम्बर, 2012 को प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय का पदभार ग्रहण किया. इसके पूर्व दिनांक 9 जुलाई, 2004 को सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय का पदभार ग्रहण किया. सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय का पदभार ग्रहण करने के पूर्व प्रथमतः अविभाजित मध्यप्रदेश विधान सभा सचिवालय पश्चात् छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर दायित्वों का निर्वहन.
   सम्मेलन, गोष्ठिया एवं यात्राएँ:-
1986-2003 भारत के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन में संलग्न अधिकारी के रूप में सहभागिता.
1998 राष्ट्रकुल संसदीय संगठन/भारतीय संसदीय संगठन – मध्यप्रदेश शाखा के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के रूप में ब्रिटेन, फ्रांस, हालैण्ड, जर्मनी, बेल्जियम, आस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड एवं इटली का अध्ययन दौरा.
2004,कोलकाता बतौर सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा – भारत के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन में सहभागिता.
2005, रायपुर

 

छत्तीसगढ़ विधान सभा द्वारा आयोजित भारत के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन के आयोजन में शीर्ष भूमिका तथा इस अवसर पर आयोजित सचिवों के सम्मेलन के Co-Chairman के रूप में दायित्वों का निर्वहन
छत्तीसगढ़ राज्य से राज्यसभा के चुनाव में निर्वाचन पदाधिकारी का दायित्व
2006 राष्ट्रकुल संसदीय संगठन/भारतीय संसदीय संगठन की छत्तीसगढ़ शाखा के पदेन सचिव के बतौर आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर का अध्ययन दौरा

भारतीय संसदीय प्रतिनिधि मंडल के सचिव के रूप में नाईजीरिया (अबूजा) में आयोजित 52वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में सम्मिलित हुए

इस अवसर पर सम्मेलन पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका, रशिया, स्पेन का अध्ययन दौरा

2007 53वाँ राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन, नई दिल्ली भारत

तृतीय एशिया एवं इंडिया रीजन राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन, इस्लामाबाद पाकिस्तान

बतौर सचिव छत्तीसगढ़ विधानसभा भारत के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन में सहभागिता, तिरुवनंतपुरम

2008 बतौर सचिव छत्तीसगढ़ विधानसभा भारत के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन में सहभागिता, चंडीगढ़

राष्ट्रपति निर्वाचन में सहायक निर्वाचन पदाधिकारी का दायित्व

2009 मई, 2009 में सिडनी (आस्ट्रेलिया) में आयोजित 21वें राष्ट्रकुल संसदीय सेमिनार के परिप्रेक्ष्य में सिडनी एवं सिंगापुर यात्रा

अक्टूबर, 2009 में तंजानिया में आयोजित 55वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में सहभागिता

2010 फरवरी, 2010 में भोपाल (म.प्र.) में आयोजित भारत के विधायी निकायों के सचिवों का सम्मेलन में सहभागिता

सितम्बर, 2010 नैरोबी, केन्या में आयोजित 56वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में सहभागिता

56वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में चीन, जापान और मिश्र देश का अध्ययन दौरा

2011

 

जुलाई, 2011 में लंदन में आयोजित 57वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में सहभागिता

57वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में स्विटजरलैंड, कनाडा, और यूएसए का अध्ययन दौरा

2012

 

सितंबर, 2012 मे कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित 58वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में सहभागिता

58वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में साऊथ कोरिया, वियतनाम और इंडोनेशिया का अध्ययन दौरा

2014 अक्टूबर, 2014 मे याउंडे (कैमरून) में आयोजित 60वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि मण्डल के सचिव के रूप मे सहभागिता

सम्मेलन मे सहभागिता उपरांत फ्रांस, स्विट्जरलैंड और यू.ए.ई. की अध्ययन यात्रा

दिनांक 18 से 20 नवंबर 2014 तक ढाका(बांग्लादेश) मे आयोजित एशिया,दक्षिण पूर्व एशिया और इंडिया रीज़न की राष्ट्रकुल संसदीय संगठन द्वारा आयोजित कार्यशाला मे सहभागिता।
2015 दिनांक 8 से 10 अप्रैल, 2015 तक राष्ट्रकुल संसदीय संघ एवं मोनाश विश्वविद्यालय मेलबोर्न आस्ट्रेलिया के संयुक्त तत्वावधान में “संसदीय आचरण संहिता” विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में सहभागिता।
2016 दिनांक 21 से 24 जनवरी 2016 तक गांधीनगर (गुजरात) मे आयोजित 78वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन मे सहभागिता।
दिनांक 11 से 17 दिसंबर 2016 तक लंदन मे आयोजित 62वें राष्ट्रकुल संसदीय सम्मेलन में  सहभागिता । सम्मेलन मे सहभागिता उपरांत सेशेल्स एवं मॉरिशस की अध्ययन यात्रा
अतिरिक्त जानकारियाँ :- प्रथमतः मध्यप्रदेश पश्चात् छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों के लिये संसदीय कार्य, व्यवहार एवं प्रक्रिया से सम्बद्ध उद्बोधन.

देश में प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों एवं आवधिक पत्रिकाओं में संवैधानिक, संसदीय एवं विधिक विषयों पर आधारित लेखों का प्रकाशन

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