ये हैं वो जाबाज़ जज जगदीप सिंह जिन्होंने धमकियों के बावजूद राम रहीम को जेल की सलाखों में डाला

 रोहतक / रेप केस में डेरा सच्चा सौदा के चीफ राम रहीम को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई। जेल में बनाए गए कोर्ट में सोमवार को करीब 1 घंटा कार्यवाही चली। इस दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने के लिए 10-10 मिनट का वक्त दिया। सुनवाई के वक्त कोर्ट रूम में 8 लोग मौजूद थे। सजा के एलान के बाद बाबा कोर्ट रूम में ही रोने लगा। इससे पहले स्पेशल सीबीआई के जज जगदीप सिंह चॉपर के जरिए पंचकूला से सुनारिया जेल पहुंचे। सुनवाई के पहले रोहतक और सिरसा में कर्फ्यू लगा दिया गया था। हरियाणा के पंचकूला में सीबीआई अदालत में जज जगदीप सिंह ने ने गुरमीत बाबा राम रहीम इंसान को रेप केस में दोषी करार देने वाला फैसला सुनाया था . इसके बाद से हरियाणा में हिंसा जारी है. 15 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी के मामले पर अहम सुनवाई हुई  इस हाईप्रोफाइल मामले पर जींद के जज जगदीप सिंह को पिछले साल ही सीबीआई के विशेष जज के तौर पर पदस्थ किया गया था  जगदीप सिंह को बेहद न्यायप्रिय, सक्षम, कठोर, और सटीक रवैये वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है. सीबीआई की विशेष अदालत में उनके सहयोगी भी उनकी शैली और प्रतिभा की तारीफ करते हैं.कोर्ट ने इस फ़ैसले को सुनाने से पहले ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम करने का आदेश दिया था.

कोर्ट के अंदर जज के सामने हाथ जोड़कर खड़े थे.

आपको बता दें कि पेशी को लिए दोपहर ठीक दो बजे गुरमीत राम रहीम सिंह पिछले दरवाजे से कोर्ट रूम में दाखिल हुए थे. उस वक्त कोर्ट में डेरा प्रमुख के वकील एसके गर्ग के अलावा हरियाणा के डीजीपी समेत कई पुलिस और सेना के अधिकारी मौजूद थे. गुरमीत राम रहीम कोर्ट के अंदर जज के सामने हाथ जोड़कर खड़े थे.

सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने 2 बजकर 48 मिनट पर पढ़ना शुरू किया. इस बहुचर्चित मामले में 3 बजे फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि ये मामला संगीन है और इसके बाद उन्होंने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया. जिसे सुनकर वहां खामोश खड़े गुरमीत राम रहीम की आंखों में आंसू आ गए. वो एक तरह से होश हवास खो बैठे. 7 से दस मिनट तक वे शांत खड़े रहे.

फैसला सुनाए जाने के ठीक बाद गुरमीत राम रहीम को पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया. उसके बाद उन्हें अंबाला सेंट्रल जेल ले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई. कुछ ही  मिनटों में कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद चुपके से उन्हें कोर्ट परिसर से बाहर ले जाया गया. पहले उन्हें मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाया गया और फिर कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें अंबाला लेकर जाया गया.फैसला सुनाए जाने से पहले ही कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अवाला सेना के जवान भी वहां तैनात किए थे. कोर्ट परिसर में फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. जब फैसला नहीं सना दिया गया, तब तक न तो कोई कोर्ट परिसर में जा सकता था और न ही कोई बाहर आ सकता था.

एक टेंट के अंदर राम रहीम की कार भी बदल दी गई

इससे पहले करीब आठ सौ गाड़ियों के काफिले के साथ डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा सिरसा से पंचकुला पहुंचे थे. सुरक्षा के लिहाज से अंबाला शहर में सड़क पर ही एक टेंट के अंदर राम रहीम की कार भी बदल दी गई थी.डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख केंद्र हरियाणा के सिरसा शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है. वहीं राम रहीम के समर्थक पूरे रूट पर रोड के किनारे जुटे रहे. सड़कों के किनारे उनकी महिला अनुयायी लाठी डंडे लेकर जमी रहीं.

अपनी ईमानदारी और सख़्त स्वभाव के लिए अपने साथियों में चर्चित जगदीप सिंह ने बीते साल ही स्पेशल सीबीआई जज की ज़िम्मेदारी संभाली थी. जगदीप सिंह हरियाणा के रहने वाले हैं। उनकी लॉ की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से हुई है। जगदीप की पहली पोस्टिंग सोनीपत में हुई थी और सीबीआई कोर्ट में उनकी दूसरी पोस्टिंग है। जगदीप ने साल 2012 में सोनीपत में हरियाणा ज्यूडिशियल सर्विस ज्वाइन किया था। इसके बाद उन्हें पिछले साल CBI कोर्ट का स्पेशल जज बनाया गया। बतौर ज्यूडिशियल ऑफिसर ये उनकी दूसरी पोस्टिंग है। सीबीआई कोर्ट में पोस्टिंग वैसे कई जांच होने के बाद की जाती है लेकिन जगदीप की काबिलियत की वजह से उन्हें हाईकोर्ट ने एक ही पोस्टिंग बाद CBI कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी दी। 

गैर- जिम्मेदाराना व्यवहार पसंद नहीं

कहा जाता है कि CBI कोर्ट में जज नियुक्त होना आसान नहीं होता, लेकिन ये जगदीप सिंह की काबिलियत ही है कि हाईकोर्ट प्रशासन ने एक ही पोस्टिंग के बाद उन्हें CBI कोर्ट की जिम्मेवारी सौंप दी.ज्यूडिशियल सर्विस में आने से पहले जगदीप सिंह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के वकील थे.  जगदीप सिंह के दोस्तों के मुताबिक, वे अपना काम करने में पूरी तरह सक्षम और बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. अपने काम को लेकर सख्त रवैया रखते हैं, लेकिन न्यायप्रिय शख्स हैं. उन्हें गैर- जिम्मेदाराना व्यवहार पसंद नहीं, इसके वे बिल्कुल खिलाफ हैं. जगदीप सिंह के बारे में कहा जाता है कि जगदीप सिंह हरियाणा के रहने वाले हैं. वे जमीन से जुड़े इंसान हैं और बहुत कम बोलते हैं.

जगदीप सिंह ने साल 2000 में पंजाब यूनिवर्सिटी से वकालत की डिग्री ली थी. हरियाणा ज्यूडिशियल अफसर बताते हैं कि जगदीप सिंह बहुत होनहार स्टूडेंट रहे और काफी मेहनती हैं. वे उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के दिनों से जानते हैं. जगदीप सिंह सितंबर 2016 में सुर्खियों में आए, जब उन्होंने हादसे में घायल हुए चार लोगों की जिंदगी बचाई.

जानकारी के मु​ताबिक, एक बार जगदीप सिंह हिसार से पंचकूला आ रहे थे. रास्ते में एक एक्सीडेंट हो गया. इसमें चार लोग घायल हो गए. जगदीप सिंह ने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और घायलों को गाड़ी से बाहर निकाला. फिर उन्होंने एंबुलेंस को कॉल की, ले​किन एंबुलेंस को आने में समय था. इसलिए उन्होंने एक गाड़ी रुकवाई और चारों घायलों को अस्पताल पहुंचाया.

2002 में एक साध्वी ने लगाया आरोप 

बता दें कि जगदीप सिंह 15 साल पुराने राम रहीम के जिस साध्वी यौन शोषण केस में फैसला दिया .वह  साल 2002 में एक साध्वी ने यौन शोषण के आरोप लगाने के बाद सामने आया था .. चिट्ठी में जिन दो साध्वियों का जिक्र था, वो उस ख़त  के मुताबिक बाबा की प्रताड़ना का शिकार हुई थीं. चिट्ठी में कुरुक्षेत्र के एक सेवादार के बारे में भी लिखा गया कि प्रताड़ना के बाद पूरे परिवार ने डेरे से नाता तोड़ लिया. चिट्ठी में लिखा गया था कि अगर मैं अपना नाम पता लिखूंगी तो मुझे मार दिया जाएगा। किसी एजेंसी से मामले की जांच करवाई जाए और पता लगाया जाए कि कहां क्या चल रहा है. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया। इसके बाद पीएमओ ने सितम्बर 2002 में सीबीआई को इस मामले में जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जब जांच की तो चिट्ठी में लगाए गए आरोप सही पाए गए.इसके बाद सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ केस दर्ज किया और सीबीआई ने विशेष अदालत में 31 जुलाई 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया। उस समय गुरमीत राम रहीम को जमानत मिल गई.

2017 में पूरा हुआ गवाहियों का दौर
साल 2012 से ये केस पंचकुला की अदालत में चल रहा है। पहली सुनवाई जनवरी 2012 में हुई। केस में बाबा राम रहीम का ड्राइवर मुख्य गवाह है और अब तक 200 से ज्यादा सुनवाइयां हो चुकी हैं. 15 साल बाद अब साध्वी यौन शोषण मामले में गवाहियों का दौर पूरा हुआ.

एमएसजी-द मैसेंजर
राम रहीम के गुरु से रॉक स्टार बाबा बनने की कहानी एमएसजी से शुरू हुई थी। बाबा ने सबसे पहली फिल्म ‘एमएसजी-द मैसेंजर’ फरवरी 2015 में रिलीज की थी। हालांकि इसको लेकर पंजाब में विरोध हुआ, लेकिन आसपास के राज्यों में इसे खूब पसंद किया गया। राम रहीम की ओर से यह भी दावा किया गया कि इस फिल्म ने सौ करोड़ रुपए से ऊपर का कारोबार किया है। हालांकि यह बात तगल थी। इस फिल्म ने सिर्फ 16.65 करोड़ का ही बिजनेस किया था

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