देसाई के जमीन घोटाले की जांच पूर्व आईएएस अधिकारी बक्षी करेंगे

संवाददाता, मुंबई//शिवसेना नेता व उद्योग मंत्री सुभाष देसाई पर लगे करीब 50 हजार करोड़ रुपये के घोटाले संबंधी आरोपों की जांच पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव केपी बक्षी करेंगे। वे पिछले 15 वर्षों के दौरान हुए गैर अधिसूचित जमीनों की जांच करेंगे। यानी पिछली कांग्रेस-राकांपा आघाडी सरकार के कार्यकाल के दौरान गैर अधिसूचित जमीनों की जांच भी करेंगे। एक सदस्यीय जांच की विपक्ष ने आलोचना की है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि दागी मंत्री को बचाने के लिए सरकार ने एक सदस्यीय समिति गठित की है।

फडणवीस सरकार ने शासनादेश जारी किया, जिसके अनुसार एक सदस्यीय समिति इगतपुरी, नाशिक स्थित एमआईडीसी की अधिग्रहित की गई जमीन को गैर अधिसूचित किए जाने के मामले की जांच करेगी। जांच पूरी करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। गौरतलब है कि मॉनसून सत्र के दौरान विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता धनजंय मुडे, सुनील तटकरे और विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता राधाकृष्ण विखे पाटील, एनसीपी के अजित पवार, जयंत पाटील ने उद्योग मंत्री देसाई पर महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) में 50,000 करोड़ रुपये के भूखंड घोटाले का आरोप लगाया था। विपक्ष के आक्रामक को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वतंत्र जांच की घोषणा की थी। विपक्ष के दिए सबूत और पूरे अधिसूचित व गैर अधिसूचित जमीनों को जांच करेंगे।

सरकार मूल मुद्दे को किनारे करना चाहती है: मुंडे

उद्योग मंत्री सुभाष देसाई पर भूखंड का श्रीखंड खाने का आरोप लगाने वाले विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे ने एक सदस्यीय जांच समिति की आलोचना की है। वे कहते है सरकार 15 वर्षों तक के मामलों को जांच में शामिल कर मुख्य मुद्दे से किनारा करना चाहती है। चिक्की घोटाला सामने आने के बाद भी सरकार ने पिछले 15 वर्षों की जांच कराने की बात कही थी, लेकिन ढाई वर्ष बीत गए उसका कोई परिणाम नहीं आया।

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