उमा भारती से शशिकला तक कई नेताओं को पाठ पढ़ाने वाली ये IPS अब फिर सुर्खियों में

भोपाल। कर्नाटक की डीआईजी (जेल) प्रिजन डी. रूपा एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह बेंगलुरु जेल में सजा काट रही एआईएडीएमके की महासचिव वी. शशिकला को वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने का है।AIADMK की जनरल सेक्रेटरी शशिकला ने जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट हासिल करने के लिए 2 करोड़ की रिश्वत दी। इसका खुलासा डीआईजी प्रिजन डी रूपा ने अपनी रिपोर्ट में किया है।

डी रूपा, कर्नाटक कैडर से 2000 बैच की आईपीएस अफसर हैं। उन्होंने UPSC एग्जाम में 43वीं रैंक हासिल की थी।
– 2016 में उन्हें प्रेसिडेंट पुलिस मैडल से सम्मानित किया गया था।
– रूपा शार्प शूटर भी हैं, उन्होंने नेशनल पुलिस अकादमी में रहते हुए कई अवॉर्ड अपने नाम किए।
 कुछ समय पहले डी रूपा का एक पोस्ट वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने मैसूर के सांसद प्रताप सिन्हा पर आरोप लगाया था कि नेता अपने पसंद से अफसरों की पोस्टिंग कराते हैं। उन्होंने इस पोस्ट में सांसद के विचारों को खतरनाक बताते हुए लिखा कि इनकी वजह से राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी पसंद के अनुरूप पद नहीं मिल रहा है। इस पोस्ट को फेसबुक ने हटा दिया था।
– फेसबुक से पोस्ट को हटाए जाने के बाद उन्होंने लिखा, “ये अजीब है। माननीय प्रताप सिंह का विचारों विरोध करते हुए मैंने जो पोस्ट लिखा वह गायब हो चुका है। प्रिय फेसबुक, ये सही नहीं है।”
 ट्रेंड डांसर भी हैं रूपा…
 
– पर्सनल लाइफ में रूपा कला प्रेमी भी हैं। वे एक ट्रेंड भरतनाट्यम डांसर भी हैं।
– इसके अलावा उन्हें क्लासिकल म्यूजिक में भी महारत हासिल है। उन्होंने साइंस में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है।
– अपने 17 साल के पुलिस करियर में वे गडग और यादगिर जिले की एसपी रह चुकी हैं।
– उन्होंने कर्नाटक कैडर के आईएएस अफसर मुनीश मोऊदगिल से शादी की है।
मुख्यमंत्री के काफिले से हटा ली थी गाड़ियां…
– रूपा अपने दबंग कामों के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने बंगलुरु की डीसीपी रहते हुए वीवीआईपी और नेताओं की सुरक्षा में अनावश्यक रूप से लगाए गए पुलिस कर्मियों को सुरक्षा से हटवा दिया था। यही नहीं, उन्होंने उस वक्त के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के काफिले से बिना परमिट चल रहे पुलिस वाहनों को हटाने का आदेश दिया था।
डी रूपा उस वक्त सुर्ख़ियों में आई थी, जब उमा भारती को अरेस्ट करने आई

बता दें कि शशिकला के इस कारनामे का खुलासा करने वाली डी रूपा उस वक्त सुर्ख़ियों में आई थी, जब वे 2004 में तत्कालीन मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री उमा भारती को अरेस्ट करने आई थीं।वह अगस्त 2004 उमा भारती को गिरफ्तार करने हुबली(कर्नाटक) से भोपाल आ गई थी। इस घटनाक्रम के बाद उमा भारती को सीएम पद छोड़ना पड़ा था। इस कांड के बाद उमा भारती चाहकर भी फिर से मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं। जैसे-तैसे उनकी पार्टी में वापसी तो हुई लेकिन उस शर्त पर कि वे मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर रहेंगीं।दरअसल, 15 अगस्त, 1994 को हुबली के कित्तूर रानी चेनम्मा मैदान (जिसे लोग ईदगाह मैदान भी कहते हैं) में तिरंगा झंडा फहराया था। इस मामले में अदालत उमा के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद उमा भारती को 23 अगस्त 2004 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा था।- अदालत से जमानती वारंट जारी होने के बाद उमा भारती ने हुबली न्यायालय में हाजिर होने की घोषणा कर दी थी। उमा ने उस समय बतौर सीएम कहा था उन्होंने कोई अपराध नहीं किया इसलिए जमानत का प्रयास भी नहीं करेंगी। क्योंकि तिरंगा फहराना राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात है और इसके लिए वे कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं।

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