मैं अधिकारी बनने नहीं, जनसेवा के लिए सिविल सर्विस में आई हूं: नंदिनी

फरीदाबाद.मुकाम तो जिद से ही हासिल होता है। कर्नाटक के कोलार की रहने वाली नंदिनी के.आर. ने भी जिद की बदौलत यूपीएससी की परीक्षा में पहला रैंक हासिल किया है। पीडब्ल्यूडी इंजीनियर की नौकरी छोड़कर आईआरएस बनीं। बनना आईएएस था। यह सफलता अब उन्हें चौथे प्रयास में मिली है। नंदिनी का कहना है कि मैं अधिकारी बनने नहीं, जनसेवा के लिए सिविल सर्विस में आई हूं।
टॉपर बनने की जिद ने आसान की राह….
 खास बातचीत में नंदिनी ने बताया कि पिछली बार उन्हें इसी एग्जाम में 849 रैंक मिला था। वह 10वीं, 12वीं में कोलार जिले की टॉपर रहीं। इसलिए यूपीएससी में भी टॉपर आने की जिद ने आईएएस बनने की राह आसान की।
– नंदिनी के.आर. फरीदाबाद स्थित राष्ट्रीय सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं नारकोटिक्स अकादमी में दिसंबर 2015 से ट्रेनिंग कर रही थीं।
 7वीं कक्षा में ही बना लिया था आईएएस अफसर बनने का लक्ष्य2015 के परिणामों में टीना डाबी और 2016 में नंदिनी केआर ने सफलता हासिल कर पितृसत्तात्मक समाज और मानसिकता साफ संदेश दे दिया है कि महिलाएं अब किसी मामले में पीछे रहने वाली नहीं हैं। कौन हैं यूपीएससी टॉपर्स नंदिनी केआर, नीचे पढ़ें पूरा प्रोफाइल-नंदिनी केआर का जन्म कर्नाटक के कोलाल गोल्ड फील्ड में हुआ। उन्होने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट गर्ल्स हाईस्कूल से स्कूली शिक्षा ली। स्कूल के दिनों में ही उन्होने आईएएस अधिकारी बनने का फैसला किया था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब प्राइवेट नौकरी न मिली तो उन्होने सिविल सेवा की तैयारी की। इस बीच उन्होन कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी विभाग के लिए एक अभियंता के रुप में भी काम किया। नंदिनी ने प्रतिष्ठित एम.एस.रामैया इंजीनियरिंग कॉलेज, बेंगलुरु से बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) किया।नंदिनी ने सिविल सेवा परीक्षा 2015 में अपने तीसरे प्रयास में क्रेक किया। हालांकि उनकी रैंक तब बहुत अच्छी नहीं थी और उन्हें इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज आवंटित किया गया। फिर उन्होने अपनी तैयारी से समझौता किए बिना आईआरएस में शामिल हुई। इस साल वह बेहतर तैयारी के साथ दिखाई दी और मेहनत ने उसके हार्ड वर्क का सही परिणाम दे दिया। नंदिनी केआर जाति से ओबीसी वर्ग से आती हैं। उन्होने कन्नड़ साहित्य को सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय के रुप में लिया। नंदिनी चौथे प्रयास में देश की टॉपर बन गईं।

आईएएस बनना है, यह कब दिमाग में आया?

– मुझे मेरी मां विमला के.वी. हमेशा बेटा कहकर ही बुलाती थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि पब्लिक एग्जाम (बोर्ड एग्जाम) में टॉप आना है। मां की प्रेरणा से 10वीं, 12वीं की परीक्षा में जिला टॉपर रही। सच पूछो तो 7वीं कक्षा में ही मैंने आईएएस बनने की ठान ली थी। आईएएस बनने के लिए मैंने कर्नाटक में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर की नौकरी छोड़ी।
इस साल क्या यह उम्मीद थी?
– बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मुझे पहला रैंक मिलेगा। जिस तरह मैंने तैयारी की थी, मुझे यकीन था कि इस बार अच्छी रैंक आएगी।
प्रशासनिक स्तर पर क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
– मेरा मानना है कि शिक्षा अच्छी हो तो हम जैसे और युवा विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे आ सकते हैं। इसलिए मेरा पूरा फोकस शिक्षा को बेहतर बनाने पर रहेगा। साथ-साथ महिला सशक्तिकरण भी मेरी प्राथमिकता रहेगी।
परीक्षा की तैयारी के लिए क्या फोकस किया?
-परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप विषय सामग्री को लेकर दृढ़ हों। दिनभर में भले ही 4 घंटे पढ़ें लेकिन वह क्वालिटी के साथ पढ़ें। मैं सोती बहुत हूं। इसलिए तनाव में नहीं रहती।
सिविल सर्विस ज्वाइन करने की कोई खास वजह?
– सिविल सर्विस लोगों की समस्याओं को समझने का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। प्रशासनिक स्तर पर क्या कुछ होना चाहिए, क्या बदलाव हो सकते हैं, यह सब तो सिविल सर्विस से जुड़कर ही हो सकता था। मैं अधिकारी बनने नहीं, जनसेवा के लिए सिविल सर्विस में आई हूं।
लोगों तक पहुंचने के लिए क्या करेंगी?
दफ्तर में सिर्फ वही लोग आते हैं, जिन्हें व्यक्तिगत समस्या होती है। फील्ड वर्क एजेंडा बनाऊंगी।
कामयाबी के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी।
हर किसी को लक्ष्य बनाना चाहिए। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए तब तक प्रयास जारी रखना चाहिए, जब तक आपको मौका मिलता रहे। लेकिन जरूरी यह है कि प्रयास लक्ष्य भेदने वाला होना चाहिए।

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