J&K सरकार के फरमान पर IAS शाह फैसल बोले -‘कोड भाषा’ का इस्तेमाल करेंगे

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया का इस्तेमाल मनमानी तरीके से नहीं कर सकेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने गाइड लाइंस जारी की हैं. इन गाइड लाइंस के तहत सरकारी कर्मचारी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर राजनीतिक विचार साझा नहीं कर सकेंगे. सरकार के इस फैसले के खिलाफ जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस के पहले टॉपर तथा आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने कहा कि अब वह अपना सोशल एकाउंट अपडेट करने के लिए ‘कोड भाषा’ का इस्तेमाल करेंगे.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. राज्‍य सचिव की तरफ से जारी किए गए फरमान में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर किसी भी आपराधिक, अनैतिक या शर्मशार करने जैसी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए, जो सरकार की छवि खराब कर सकती है. फरमान में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को राजनीतिक गतिविधि के लिए अपना व्‍यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट बिल्‍कुल भी इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए. सरकारी जानकारी को भी सोशल करने पर सख्त मनाही की गई है. अगर कोई कर्मचारी इस तरह की गतिविधियों को शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सरकार के इस फरमान के खिलाफ राज्य के कर्मचारियों में विरोध देखा जा रहा है. 2009 में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा टॉप करने वाले पहले कश्मीरी शाह फैसल ने कहा है कि वे सोशल मीडिया का तो इस्तेमाल करेंगे मगर इसके लिए ‘कोड भाषा’ का इस्तेमाल करेंगे. शाह ने ‘कोड भाषा’ का इस्तेमाल करते हुए अपने फेसबुक पेज कर कई विचार पोस्ट भी किए. इस पर उनके साथियों ने उन्हें सलाह दी है कि सरकारी फरमान के खिलाफ खड़े होने से वह परेशानी में पड़ सकते हैं. हालांकि, आईएएस अधिकारी ने फेसबुक पर पोस्ट लिखी कि सरकारी कर्माचारियों को एक निश्चित आचार संहिता का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे उनका मतलब अच्छे व्यवहार से है. शाह की तरह कई और लोगों ने भी सरकार के इस फरमान का विरोध किया है. सीपीआई (एम) की राज्य इकाई ने इसे सत्तावादी अधिसूचना करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की है. पार्टी ने कहा कि सरकार का यह फरमान तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है.

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