IAS दीपक आनंद सस्पेंड, छापे में मिले थे 2.30 करोड़ की अवैध संपत्ति के सबूत

पटना.राज्य सरकार ने IAS अफसर दीपक आनंद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आशय का आदेश जारी किया। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय आयुक्त पटना प्रमंडल का कार्यालय निर्धारित किया गया है। वे फिलहाल सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दीपक आनंद और उनकी पत्नी शिखा रानी के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने दो जनवरी 2018 को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। उनपर सारण का जिलाधिकारी रहते बालू के अवैध, खनन, भंडारण और परिवहन के आरोप में अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है।

पटना से सीतामढ़ी तक हुई थी एसवीयू की कार्रवाई

स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) की टीम ने तीन जनवरी को दीपक आनंद के चार ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान आय से 2.30 करोड़ से अधिक की संपत्ति के सबूत मिले थे। पटना में सर्किट हाउस, सीतामढ़ी स्थित पैतृक घर, गोड्‌डा और कटिहार के ठिकाने खंगाले थे। लॉकर से 18.5 लाख का जेवर मिला था।

सर्किट हाउस से मिले थे ये सामान

सर्किट हाउस में आईएएस के कमरे से 25 लाख के किसान विकास पत्र, 27.5 लाख के पोस्टल डिपॉजिट के पेपर व जेवरात खरीद से जुड़ी 25 लाख की रसीद मिली थी।

– दीपक पटना में सर्किट हाउस में रहते हैं। पत्नी डॉ. शिखा रानी कटिहार में रहती हैं। आरंभिक जांच में पीएंडएम मॉल में भी दीपक की दो दुकानें मिली हैं।

– बता दें कि एसवीयू ने दीपक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। एफआईआर में आय से 1.55 करोड़ अधिक संपत्ति की बात कही थी।

2 लॉकरों का पता चला, होगा खुलासा

– तलाशी के दौरान दो लॉकर का भी पता चला था। दीपक के रियल एस्टेट, जेवरात, पोस्ट ऑफिस व बैंक में मोटी रकम निवेश के सबूत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक काफी पहले से ही आईएएस एसवीयू के राडार पर थे।

– दीपक के पास कुल बचत की अपेक्षा 1950% (साढ़े 19 गुणा) से अधिक की संपत्ति का पता चला है। एसवीयू के मुताबिक कुल आय में खर्च काट कर 11.76 लाख की बचत हुई।

– हालांकि हकीकत यह है कि दीपक के पास 2.30 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। यह नहीं होना चाहिए।

एक दशक में करोड़पति बने दीपक, निगरानी के घेरे में आए तीसरे आईएएस

– महज एक दशक की नौकरी में दीपक करोड़पति बन गए। सीतामढ़ी के मूल निवासी दीपक 2007 बैच के आईएएस हैं। पहली पोस्टिंग में बेतिया में एसडीओ थे।

– फिर समस्तीपुर के डीडीसी, बांका व सारण के डीएम के अलावा पंचायती राज निदेशक रहे।

– बीते एक दशक में यह तीसरा मौका है जब विजिलेंस या एसवीयू की जांच के घेरे में आईएएस अफसर आए हैं। सबसे पहले आईएएस शिव शंकर वर्मा पर कार्रवाई हुई थी।

– पिछले साल विजिलेंस ने आईएएस जितेंद्र गुप्ता को रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि कोर्ट से बरी हो गए थे। ताजा मामले में आईएएस दीपक पर कार्रवाई हुई है।

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