38 शहरों के बदलने की कहानी है ईशर जज अहलूवालिया की ‘हमारे शहरों का रूपांतरण’

भोपाल.अर्थशास्त्री और इंडियन काउंसलिंग फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) की अध्यक्ष ईशर जज अहलूवालिया की किताब ‘हमारे शहरों का रूपांतरण’ का विमोचन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 जुलाई, 2017 को कोर्टयार्ड बाय मैरियट (डीबी मॉल) में किया। इस मौके पर जाने-माने अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और मंजुल पब्लिशिंग हाउस के एमडी विकास रखेजा भी मौजूद थे।
शहरों की तस्वीर बदलने वाले नायकों की कहानियां…
 जरूरी है शहरों के विकास का मैनेजमेंट-
सीएम शिवराज सिंह चौहान से कहा, ‘शहरों की समस्या यही है कि यहां कॉलोनियां कट जाती हैं और लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी भी या नहीं, लेकिन शहरी विकास को रोका नहीं जा सकता। गांव में रहने वाला हर व्यक्ति थोड़े से पैसे जुटाता है और शहर में घर बनाने का सपना देखता है। बिना जनभागीदारी के शहरों को मैनेज करना मुश्किल है।’
‘ये किताब मैंने अधिकारियों से डेटा लेकर और दिल्ली में बैठकर नहीं लिखी। इसके लिए मैं शहरों में गई, जहां मुझे बदलते शहरों की कहानियां मिलीं। इसमें ऐसे अनजान नायकों की कहानियां हैं, जिन्होंने शहरों की तस्वीर बदलने में मदद की है। मप्र एक मात्र राज्य है, जहां से दो शहरों की कहानियां मेरी किताब में हैं। भोपाल और इंदौर।’
– ईशर जज अहलूवालिया
किताब के बारे में-
यह किताब 2014 में आई किताब ‘ट्रांसफॉर्मिंग अवर सिटीज:पोस्टकार्ड्स ऑफ चेंज’ का हिंदी रूपांतरण है, जिसे मंजुल पब्लिकेशन ने पब्लिश किया है। किताब में 38 शहरों की कहानियां शामिल हैं। किताब भारत के कुछ शहरों में हाल ही के वर्षों में किए गए प्रयासों पर आधारित है, जो इस अंधकार में आशा की किरण जगती है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में मलकापुर वह पहला शहर है जिसने अपने निवासियों के लिए चौबीस घंटे जल प्रदाय को सुनिश्चित किया है. गुजरात में सूरत शहर का प्लेग की महामारी वाले शहर से रूपांतरित होकर सबसे स्वच्छ शहरों में से एक बनना भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है. दिल्ली के आसपास जैव विविधता को पुनः संचित करना, पुणे की पाषाण झील को इसके पूरक स्वरुप में वापस लाना और भुवनेश्वर की समृद्ध विरासत को बनाए रखने के लिए इस मंदिर के नगर संरक्षण हेतु काम किया जाना, रूपांतरण के कुछ अन्य उदाहरण हैं।
किताब में दी गई केस स्टडीज़ को ईशर जज अहलूवालिया के कॉलम ‘पोस्टकार्ड्स ऑफ चेंज’ के लिए लिखा गया था। उन्हीं लेखों के बेहतर संस्करण इस किताब में प्रस्तुत किए गए हैं। हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, इंदौर, जयपुर, मगरपट्टा और अन्य कई शहरों ने शहरीकरण की चुनौतियों का जवाब नवाचारी तरीकों से दिया है। अब समय आ गया है कि भारत के शहरों के लोग अच्छे प्रशासन और ज़िम्मेदारी भरे व्यव्हार की माँग रखें और रूपांतरण की इन प्रक्रियाओं को आगे ले जाएँ, जिससे शहरी भारत की दिशा में बदलाव को सुनिश्चित किया जा सके।
इंदौर की हैं ईशर
इस मौके पर सीएम ने कहा, ईशर इंदौर में जन्मी हैं और मोंटेकजी, मध्यप्रदेश आपका ससुराल है। भोपाल का मौसम ही नहीं, यह शहर भी बहुत अच्छा है। मैं तो कहता हूं कि आप यहीं बस जाइए।
 पीपीपी बसों के लिए इंदौर की प्रशंसा –
ईशर ने कहा, ‘विवेक अग्रवाल (नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव) ने जब पहली बार पीपीपी मॉडल पर बस चलाने की शुरुआत इंदौर में की, तो मुझे अजीब लगा, लेकिन मैं इस सिस्टम को समझने गई, तब बसों पर लगे डिस्प्ले और कंट्रोल रूम को देख लगा यह बिल्कुल अलग तस्वीर है।’
 ईशर जज अहलूवालिया के बारे में-
 ईशर जज अहलूवालिया जानी-मानी अर्थशास्त्री हैं और इंडियन कॉउन्सिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन्स (ICRIER) की अध्यक्ष हैं। दिल्ली में रहती हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2008-2011 में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विस के क्षेत्र में गठित की गई हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। फिलहाल आप ICRIER के शहरीकरण पर किए जा रहे शोध कार्यक्रमों का नेतृत्व करती हैं। श्रीमती अहलूवालिया ने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता विश्वविद्यालय से बीए किया, दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में एमए किया और मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) से अर्थशास्त्र में पीएच-डी किया। उनका शोध भारत में औद्योगिक विकास, मैक्रो-आर्थिक सुधार और शहरी क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित रहा हैं। 2009 में शिक्षा और साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पदमभूषण दिया गया। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से उनका विवाह हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »