जीएसटी लागू होते ही शुरुआत में कंपनियों को आ सकती है वर्किंग कैपिटल की दिक्कत

नई दिल्ली/श्रीनगर. जीएसटी लागू होने के शुरुआती दिनों में कंपनियों के सामने वर्किंग कैपिटल की दिक्कत आ सकती है। इसलिए दो से चार महीने के लिए नकदी बढ़ाने के उपाय होने चाहिए। इंडिया रेटिंग्स रिसर्च ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। एजेंसी ने 11,000 कंपनियों की स्टडी से यह नतीजा निकाला है कि इनपुट क्रेडिट में इनके करीब 50,000 करोड़ रुपए दो महीने के लिए फंसेंगे। सर्विस टैक्स 15 से बढ़कर 18% होने से भी कंपनियों को शॉर्ट टर्म में वर्किंग कैपिटल की दिक्कत आएगी। बड़ी और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल वाली कंपनियों के लिए इस प्रॉब्लम से निपटना आसान होगा। उन्हें कर्ज आसानी से मिल जाएगा, लेकिन छोटी और कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक यह चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि इसका असर मॉनेटरी पॉलिसी पर भी होगा।
सिस्टम में सरप्लस नकदी को बरकरार रखा जाना चाहिए…
  नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद सिस्टम में नकदी काफी बढ़ गई थी। मार्च में बैंक लिक्विड एडजस्टमेंट फैसिलिटी के तहत औसतन 5 लाख करोड़ रुपए रिजर्व बैंक के पास जमा कर रहे थे। मई में यह रकम घटकर 3 लाख करोड़ रह गई है। अप्रैल में आरबीआई ने एक लाख करोड़ रुपए की नकदी कम करने के उपाय घोषित किए थे। इंडिया रेटिंग्स रिसर्च का मानना है कि फिलहाल सिस्टम में सरप्लस नकदी को बरकरार रखा जाना चाहिए।
 85% रकम उन कंपनियों की फंसेगी जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रु. से ज्यादा
– इंडिया रेटिंग्स रिसर्च ने अपनी स्टडी में जिन 11,000 कंपनियों को शामिल किया, वे औसतन 5.5% एक्साइज ड्यूटी चुकाती हैं। इनके प्रोडक्ट पर औसत वैट रेट 14% मानें तो इन कंपनियों के एक लाख करोड़ रुपए इनपुट क्रेडिट में ब्लॉक होंगे। ट्रांजिशन अवधि में इसमें से आधी रकम भी फंसी तो दो महीने के लिए कम से कम 50,000 करोड़ रुपए ब्लॉक हो जाएंगे। 85% रकम उन कंपनियों की फंसेगी जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा है। यहां ट्रांजिशन अवधि से मतलब शुरुआती दिनों से है। जीएसटी में इसके लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है।
 कंपनियों की लागत में हो सकता है इजाफा
– पैसे फंसने से कंपनियों को ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ सकती है। पूंजी यानी पैसे की डिमांड बढ़ेगी तो असर ब्याज दरों पर होगा। ब्याज दर बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी इजाफा होगा।
 रिटर्न और रिफंड पर हो सकती है मुकदमेबाजी
– कंपनियों को यह रकम प्रोविजनल आधार पर लौटाई जा सकती है, लेकिन इसमें भी दिक्कत है। कौन-सी कंपनी कितने रिटर्न और रिफंड की हकदार है, इसे लेकर मुकदमेबाजी शुरू हो सकती है।
 तिलहन पर 5% टैक्स से भी ब्लॉक होगी रकम
– ज्यादातर फूड ग्रेन्स जीएसटी से बाहर हैं, लेकिन तिलहन पर 5% टैक्स लगेगा। इससे एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) बनाने वाली कंपनियों को भी पैसे फंसने का अंदेशा है। तिलहन की पेराई में 70% खली निकलती है और सिर्फ 30% तेल मिलता है। जीएसटी में तेल 5% टैक्स कैटेगरी में पर खली 0% श्रेणी में है। इसलिए खली पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। यानी इनपुट की पूरी मात्रा पर 5% टैक्स चुकाना पड़ेगा, लेकिन क्रेडिट आउटपुट के एक हिस्से पर ही मिलेगा। तिलहन पर 5% टैक्स में से 1.5-2% क्रेडिट ही तेल पर मिलेगा। बाकी 3% के लिए रिफंड क्लेम करना पड़ेगा। इससे यह रकम कुछ समय के लिए ब्लॉक हो जाएगी।
 फोन बिल में टैक्स का एक और बोझ बढ़ेगा
– जीएसटी में मोबाइल फोन बिल पर टैक्स का दोहरा बोझ बढ़ेगा। कस्टमर्स को 3% ज्यादा टैक्स तो देना ही है। मोबाइल टावर कंपनियों ने कहा है कि वे बढ़ा हुआ सर्विस टैक्स टेलिकॉम कंपनियों से वसूलेंगी, क्योंकि उन्हें इसका इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। जाहिर है, टेलिकॉम कंपनियां इस बोझ को कस्टमर्स पर ही डालेंगी। जीएसटी में सभी टेलिकॉम सेवाओं पर टैक्स रेट 15% से बढ़ाकर 18% किया गया है। देश में इस समय करीब 4.5 लाख मोबाइल टावर हैं।
 ऑयल कंपनियों पर पड़ेगा 25,000 करोड़ का बोझ
– पेट्रोल-डीजल जीएसटी से बाहर हैं। लेकिन केरोसिन-रसोई गैस जैसे पेट्रो प्रोडक्ट पर यह लागू होगा। कंपनियों का कहना है कि दो टैक्स व्यवस्था अपनाने से उनकी लागत करीब 25,000 करोड़ रु. बढ़ जाएगी। प्लान्ट, मशीनरी और सर्विसेस पर जीएसटी लगेगा, दूसरी ओर एक्साइज और वैट का इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा।
 ज्वैलरी मेकिंग पर टैक्स नहीं
– केरल के फाइनेंस मिनिस्टर थॉमस आइजैक ने बताया कि सोने और ज्वैलरी की पूरी चेन पर एक ही टैक्स रेट लागू होगा और मेकिंग चार्ज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर की बैठक में ज्यादातर राज्य सोना, चांदी और डायमंड पर 5% के लिए राजी थे। लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु इस पर सहमत नहीं थे। इसलिए फैसला नहीं हो सका।
क्या है GST, कब से लागू होगा?
– GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स है। आसान शब्‍दों में कहें तो जीएसटी पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक जैसा बाजार बनाएगा।
– संसद इसका बिल पास कर चुकी है। 10 राज्य स्टेट जीएसटी पास कर चुके हैं। 1 जुलाई से GST देशभर में लागू होना है।
इसे क्यों लाया गया?
– 17 साल की कवायद के बाद GST इसलिए लाया गया कि अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। GST को केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जा रहा है।
– इससे एक्‍साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), स्टेट के सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैम्प ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या सेल्स और गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।

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