मोदी की सख्ती से घबराए अफसर क्लीन चिट की जुगाड़ में , IAS श्रीवास्तव और गर्ग के खिलाफ जांच खत्म

धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल।भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप या जांच को जो अफसर अब तक नौकरी का हिस्सा माना करते थे, वही अफसर इन दिनों घबराए हुए हैं। वजह है मोदी सरकार का सख्त रवैया। जिसके तहत पिछले दिनों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के तीन आईएएस अफसरों की छुट्टी कर दी गई।

कहीं जांचों की फेहरिस्त केंद्र की नजर में न आ जाए, इससे बचने के लिए अफसरों का सारा फोकस जांच खत्म करवाने पर है। इसी क्रम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के संयुक्त सचिव प्रवीण गर्ग को लोकायुक्त जांच में क्लीनचिट मिल गई है। वहीं मप्र कैडर के ही दूसरे आईएएस आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ चल रही ईओडब्ल्यू जांच बंद कर दी गई है। दोनों ही अधिकारी इन दिनों केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं।

गर्ग को क्लीनचिट, सांवलकर को नहीं

मप्र कैडर के 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रवीण गर्ग फिलहाल केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति हैं। उनके खिलाफ ट्रायफेक में पदस्थापना के दौरान लोकायुक्त ने वर्ष 2012 में पद के दुस्र्पयोग और आर्थिक गड़बड़ी किए जाने की प्राथमिकी दर्ज की थी।

उनके साथ में इंदौर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ विजय सांवलकर को भी आरोपी बनाया गया था। मामला इंदौर में जमीन आवंटन से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक लोकायुक्त ने इस जांच में से सिर्फ आईएएस गर्ग का नाम हटा दिया है। सांवलकर के खिलाफ जांच जारी रहेगी। सरकार ने इसकी सूचना बाकायदा केंद्र सरकार को भी भेजी है।

दस साल बाद बंद हुई जांच

मप्र कैडर के 1992 बैच के आईएएस आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2007 में आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ने गड़बड़ी के एक मामले में जांच प्रकरण दर्ज किया था। उनके खिलाफ इंदौर में औद्योगिक केंद्र विकास निगम में पदस्थापना के दौरान ठेकेदारों को भुगतान न करने की शिकायत की गई थी।

राज्य सरकार ने अपनी जांच में इस शिकायत को 2008 में ही बंद कर दिया था लेकिन ईओडब्ल्यू के रिकॉर्ड पर इसमें अब तक जांच चल रही थी। शिकायतकर्ता गौतम कोठारी द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत पर लगभग दस साल बाद अब ईओडब्ल्यू ने अब जाकर खात्मा लगाया है। श्रीवास्तव फिलहाल मध्यप्रदेश भवन नईदिल्ली में आवासीय आयुक्त के पद पर पदस्थ हैं।

दो दर्जन आईएएस के खिलाफ जांच जारी

प्रदेश में इन दिनों दो दर्जन आईएएस अफसरों के खिलाफ विभिन्न् मामलों में आर्थिक अनियमित्ता और पद के दुस्र्पयोग जैसे मामलों की जांच चल रही है। ज्यादातर मामले गंभीर अनियमिताओं और जमीन आवंटन से जुड़े हुए हैं। सूत्रों का मामना है कि अब अफसर खुद रूचि लेकर अपने खिलाफ चल रही जांच में साक्ष्य उपलब्ध करवा रहे हैं ताकि जांच का फैसला जल्द हो सके। इससे पहले भी लोकायुक्त संगठन में 8 मंत्रियों के खिलाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी लेकिन ज्यादातर मामलों में प्रकरण खत्म कर दिए गए।

किसी के साथ कुछ गलत न हो जाए

लोकसेवकों के खिलाफ लंबे समय से प्रकरण चल रहे हैं, यह बात सही है। जब जांच और अन्य तय प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, आगे की कार्रवाई नहीं कर सकते। फिर भी हम कुछ तेजी लाए हैं, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होता है कि किसी के साथ कुछ गलत न हो जाए। पुलिस स्टाफ की भी कमी है, इसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार को बार-बार रिमाइंडर भेज रहे हैं। सरकार की भी अपनी समस्याएं हैं।

-जस्टिस यूसी माहेश्वरी, उप लोकायुक्त, मप्र

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