पूर्व आइएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी ने थामा भाजपा का दामन

चुनाव के पहले वरिष्ठ नौकरशाहों का भाजपा का दामन थामने का सिलसिला जारी है।  ओडिशा कैडर की पूर्व आइएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गईं। मूल रूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली अपराजिता सारंगी ने हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा उन्हें ओडिशा से मैदान में उतार सकती है।1994 बैच की पूर्व आइएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी लंबे समय तक केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर रहने के बाद 2013 में वापस ओडिशा आ गई थीं। केंद्र में ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने मनरेगा को लागू करने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा में शामिल होने के बाद सारंगी ने कहा कि वह राज्य के लोगों के लिए काम करना चाहती हैं। उनके अनुसार, राजनीति एकमात्र ऐसा मंच है, जहां लोगों के लिए काम करने का पूरा मौका मिलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीतिक मंच से ओडिशा के लोगों के लिए वह और ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकेंगी।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व आइएएस, आइपीएस और आइएफएस समेत 17 अधिकारियों ने भाजपा का दामन थामा था। इनमें रायपुर के जिला कलेक्टर रहे ओपी चौधरी भी शामिल हैं। वह अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा में शामिल हुए और चुनाव जीतने वाले कई पूर्व अधिकारी केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल हैं।

ओडिशा कैडर की आइएएस अधिकारी रह चुकीं अपराजिता भागलपुर की बेटी है। वह बचपन से प्रतिभा की धनी रही है। पीजी अंग्रेजी के पूर्व हेड डॉ. अजीत कुमार मिश्र की बड़ी बेटी अपराजिता एसएम कॉलेज से अंग्रेजी विषय में ऑनर्स करने के बाद इसी विषय से पीजी भी की। माउंट कार्मेल स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल की। पीजी अंग्रेजी के वरीय शिक्षक डॉ. उदय मिश्रा बताते हैं कि अपराजिता स्कूल और कॉलेज के जीवन में हमेशा डिबेट में भाग लेती थीं। सांस्कृतिक गतिविधियों में भी उनकी रुचि रही है। सामाजिक सरोकार से भी वह जुड़ी हुई रही हैं। डॉ. मिश्र बताते हैं कि जब वे अजीत बाबू से मिलने उनके घर जाते थे तब उनकी बड़ी पुत्री अपराजिता समाजिक और राजनीतिक विषयों पर काफी चर्चा करती थीं।

अपराजिता डिबेट में नेशनल स्तर तक की प्रतियोगिता में भाग लेकर सफल हो चुकी हैं। अपराजिता के भाई सुजीत कुमार मिश्र भी संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर अभी पटना में रेलवे भर्ती बोर्ड के चेयरमेन हैं। उदय बताते हैं कि 1994 की परीक्षा में दोनों भाई-बहन ने सफलता हासिल की थी। सिविल सर्विस की परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही अपराजिता सफल हुई थी। वह ओडिसा कैडर में थीं। ओडिसा के कई जिलों में वह डीएम और आयुक्त रह चुकी हैं। शिक्षा विभाग में प्रधान सचिव के पद पर भी वह काम कर चुकी हैं। उनके पति ओडिसा कैडर में ही हैं। मालूम हो कि अपराजिता आईएएस की नौकरी छोड़ दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष भाजपा में शामिल हुई है।अपराजिता को जानने और पहचानने वाले बताते हैं कि वे न सिर्फ अच्छी और योग्य प्रशासक थीं बल्कि कुशल घरेलू महिला भी हैं। वह जहां-जहां रहीं वहां बेहतर कार्य करने के लिए उनको सम्मानित भी किया गया और कई पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं। अपराजिता जब छात्र जीवन में थीं तब उनका परिवार खंजरपुर में रहता था। अब आनंदगढ़ कॉलोनी में उनके परिवार का मकान है। चर्चा है कि अपराजिता ओडिशा में ही लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी।

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