पिता बने थे देशभर में आईएएस टॉपर, बेटा को इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड में मिली रैंक वन

दिल्लीपब्लिक स्कूल रांची में पहली कक्षा का छात्र धैर्य बर्णवाल ने साइंस ओलंपियाड फाउंडेशन (एसओएफ) की ओर से आयोजित सातवें इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड में फर्स्ट रैंक हासिल कर रांची ही नहीं, झारखंड और इंडिया का नाम रोशन किया है।
बताते चलें कि पिता सुनील कुमार बर्णवाल (वर्तमान में आईटी सेक्रेट्री) ने वर्ष 1996 में देशभर में आईएएस की परीक्षा में टॉपर होने का गौरव प्राप्त किया था। आज उनके सात वर्षीय बेटे उनकी इस परंपरा को कायम रखते हुए यह साबित किया कि पारिवारिक माहौल और मार्गदर्शन का किसी के जीवन पर कितना असर पड़ता है। धैर्य को इस उपलब्धि के लिए एसओएफ की ओर से इंटरनेशनल गोल्ड मेडल, मेरिट सर्टिफिकेट और नकद एक हजार पुरस्कार दिया जाएगा। धैर्य की सफलता पर पिता सुनील बर्णवाल, मां ऋचा संचिता और बड़ी बहन धृति बर्णवाल ने बधाई दी है। बताते चलें कि बड़ी बहन धृति ने भी इस ओलंपियाड में हिस्सा लिया था, लेकिन उसे इंटरनेशनल रैंक-569 हासिल हुई है। हालांकि पिछले साल मैथ्स ओलंपियाड में धृति को भी शानदार रैंक मिली थी।
धैर्य ने बताया कि स्कूल से जब वह घर लौटता है तो मां ही उसे पढ़ाती भी है। उनका ख्याल भी रखती है। बेटी धृति ने भी कहा कि पिता से ज्यादा समय मां ही देती है। मां रिचा संचिता ने कहा कि वे कोशिश रहती है कि बच्चे अपनी मर्जी से पढ़ाई करे। दिनभर स्कूल के बाद वे रात में बेटी को दो घंटे और बेटे को एक घंटे जरूर पढ़ाती हैं। बेटा और बेटी टीवी पर कार्टून भी देखते हंै, लेकिन वैसे कार्टून, जिसमें पॉजिटिव संदेश रहता है। बच्चे घर में अपने दादा-दादी के साथ भी काफी समय बिताते हंै। यही कारण है कि दोनों बच्चे रात में सोते समय गायत्री मंत्र का जाप करना नहीं भूलते। बेटी धृति को भी गीता के श्लोक याद करने का शौक है। धैर्य ने बताया कि वह बड़ा होकर पिता की ही तरह इंजीनियर बनना चाहता है। जबकि बेटी साइंटिस्ट बनने इच्छा रखती है।

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