लालू जज से बोले – हुजूर जेल में ठंड लगती है; तब जज ने कहा – तबला बजाइए, मस्त रहिए

रांची (झारखंड). चारा घोटाले के देवघर ट्रेजरी केस में गुरुवार को कोर्ट में पेश हुए लालू प्रसाद यादव ने जज के सामने जेल की कई दिक्कतें गिनाईं। उन्होंने कहा- साहब वहां ठंड बहुत लगती है। इस पर जज ने कहा- ठंड लगती है तो जेल में हारमोनियम, तबला बजाइए और मस्त रहिए। बता दें कि गुरुवार को इस केस में 16 दोषियों को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन बहस पूरी नहीं होने की वजह से इसे टाल दिया गया। अब इस केस में शुक्रवार को सजा सुनाई जा सकती है।

 क्या कहा जज ने?

लालू: जज साहब जेल में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहां लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा। ठंड भी बहुत लगती है।
जज: इसी वजह से तो आपको कोर्ट में बुलाया जाता है, ताकि आप अपने लोगों से मिल लें। ठंड लगती है तो जेल में हारमोनियम-तबला बजाइए, मस्त रहिए।

लालू: मैंने कुछ नहीं किया जज साहब, बेगुनाह हूं।
जज: उस वक्त सीएम आप ही थे। वित्त मंत्री भी तो आप ही थे। आपने फौरन कार्रवाई नहीं की। आप जाइए। आज तो आपका नंबर भी नहीं है।

लालू: हम भी वकील हैं जज साहब।
जज: आप जेल में कोई डिग्री ले लीजिए।

लालू: ठंडे दिमाग से सोचने से सब अच्छा हो जाता है जज साहब।
जज: हम किसी की नहीं सुनते। आपके शुभचिंतकों के दूर-दूर से फोन आ रहे हैं, लेकिन हम कानून के हिसाब से ही काम करेंगे।

जज: अगर आपको कोर्ट आने में परेशानी होती है तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद ली जा सकती है।
लालू: नहीं मैं आ जाऊंगा। कोर्ट आने में कोई दिक्कत नहीं है।
जज: ऐसे समय में बुलाएंगे कि किसी को पता भी नहीं चलेगा।

लालू ने कहा- कोर्ट पर  भरोसा
– कोर्ट से निकलने के बाद लालू प्रसाद ने मीडियाकर्मियों से कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है।
– उन्होंने खुद कहा कि उन्हें अब शुक्रवार को फैसला सुनाया जाएगा। लालू ने यह भी कहा कि यह पूरी साजिश बीजेपी की है। वही उनके खिलाफ सारे तंत्र का इस्तेमाल कर रही है।

क्या है देवघर ट्रेजरी केस?
– बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।

​कितनी सजा हो सकती है लालू को?
– लालू के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि लालू और बाकी दोषियों को मैक्सिमम 7 और मिनिमम 1 साल की जेल हो सकती है।
– वहीं, सीबीआई के एक अफसर के मुताबिक, इस केस में लालू को गबन की धारा 409 के तहत 10 साल तक की सजा और धारा 467 के तहत उम्रकैद भी हो सकती है। हालांकि, लालू के वकील ने इसे खारिज कर दिया।

इन्हें सुनाई जाएगी सजा
– लालू प्रसाद यादव-बिहार के पूर्व सीएम, जगदीश शर्मा-पॉलिटिकल लीडर, आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर, बेक जूलियस-आईएएस, फूलचंद सिंह-आईएएस, महेश प्रसाद-आईएएस, कृष्ण कुमार-गवर्नमेंट इम्प्लॉई, सुबीर भट्टाचार्य-ट्रेजरी ऑफिसर

ये चारा सप्लायर्स-ट्रांसपोर्टर्स भी दोषी
– त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजा राम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी।

ये हो चुके हैं बरी
– जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
– ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
– एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
– सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
– सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
– विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री

कुल कितने आरोपी थे ?
– एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।

सजा के बाद लालू के पास क्या ऑप्शन होंगे?
– 3 साल से कम सजा मिलने पर लालू को प्रोविजनल बेल मिल जाएगी।
– 3 साल से ज्यादा सजा हुई तो फैसले की कॉपी मिलते ही उनकी ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

लालू के चुनाव लड़ने पर कितने साल की और रोक लगेगी?
– झारखंड के पूर्व सॉलिसिटर जनरल अनिल सिन्हा के मुताबिक- लालू को चारा घोटाला के एक केस में 5 साल की सजा पहले ही सुनाई जा चुकी है। इसी सजा की वजह से उनकी लोकसभा मेंबरशिप खत्म हो गई। सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक उन पर चुनाव लड़ने की रोक लगी है। अगर इस केस में लालू को फिर 3 साल से ज्यादा की सजा सुनाई गई तो वो सजा पूरी होने की तारीख से छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।​

1996 में सामने आया था घोटाला
– जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था।
– इसके तहत 1990 के दशक में सरकारी ट्रेजरी से चारा सप्लाई के नाम पर ऐसी कंपनियों को पैसे जारी कर दिए गए जो थी ही नहीं।

लालू पर क्या आरोप?
– बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इन्क्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

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