मध्य प्रदेश के एक और सीनियर आईएएस ओपी रावत को बड़ी जिम्मेदारी ,देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त होंगे

भोपाल | मध्य प्रदेश के एक और सीनियर अफसर को बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है. आईएएस अफसर ओपी रावत देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त होंगे. दिसम्बर 1953 को जन्मे रावत 1977 बैच के एमपी कैडर के अधिकारी हैं . ओपी रावत इस पद तक पहुंचने वाले एमपी कैडर के पहले अफसर हैं.विधि मंत्रालय की ओर से यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि रावत की नियुक्ति उनके द्वारा कामकाज संभाले जाने के दिन से प्रभावी होगी.

रावत की नियुक्ति के साथ ही तीन सदस्यीय आयोग में खाली एकमात्र रिक्ति भर गई. उनकी नियुक्ति चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित किये जाने के कुछ दिनों पहले की गई है.  मध्य प्रदेश में आदिम जाति कल्याण, वाणिज्यिक कर और आबकारी विभाग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दे चुके ओपी रावत 2013 में सेवानिवृत्त हो गए थे. उन्हें सरकार ने अगस्त 2015 में चुनाव आयोग में आयुक्त पद से नियुक्त किया था.हाल ही में एमपी कैडर की स्नेहलता श्रीवास्तव लोकसभा की पहली महिला महासचिव नियुक्त हुईं हैं. इस पद पर उनका कार्यकाल 1 दिसंबर 2017 से 30 नवंबर 2018 तक है.।

आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव करायेंगे रावत 

साल के अंत में मप्र समेत आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव इन्हीं के कार्यकाल में होंगे। वे अभी में चुनाव आयुक्त हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति का कार्यकाल इसी माह खत्म हो रहा है।मप्र के राजनैतिक गलियारों व प्रशासनिक अफसरों के बीच रावत के अगले सीईसी बनने की खबर से हलचल तेज हो गई है। दरअसल, अभी तक अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार सबसे सीनियर चुनाव आयुक्त को ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनया जाता है। वर्तमान में चुनाव आयुक्तों में रावत सबसे सीनियर हैं। रावत की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी। उनके 11 माह के कार्यकाल में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक समेत नगालैंड, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम के विधानसभा चुनाव होंगे। वे दिसंबर 2018 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु ( दोनों में से जो भी पहले हो) तक रहता है। रावत वर्ष 2013 में केंद्र सरकार में भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम मंत्रालय में सचिव (लोक उपक्रम) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें 13 अगस्त 2015 को चुनाव आयोग में आयुक्‍त नियुक्‍त किया था।
मऊ व इंदौर दंगों को रोकने में अहम रोल 
रावत के बारे में कहा जाता है कि वे फैसले लेने में देरी नहीं करते और उनके फैसले मैरिट पर आधारित होते हैं। इंदौर कलेक्टर रहते हुए उन्होंने मऊ और इंदौर में सांप्रदायिक दंगों को रोकने में अहम रोल निभाया था। उन्होंने मप्र में आदिमजाति कल्याण, वाणिज्यिक कर, आबकारी सहित कई विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं।
ज्योति और रावत का नर्मदा कनेक्शन 
यह महज एक संयोग है कि वर्तमान सीईसी अचल कुमार ज्योति और उनके बाद यह पद संभालने वाले रावत ने नर्मदा नदी के लिए काम किया है। ज्योित सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। जबकि रावत नर्मदा घाटी विकास विभाग में उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

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