एनबीसीसी के सीएमडी एके मित्तल ने कहा -सारा काम सरकारी मशीनरी नहीं कर सकती , प्राइवेट पार्टनरशिप लानी पड़ेगी

 

सवाल : आपने 2013 में जब काम संभाला तो तीन साल में ही 1270 करोड़ रुपए के कैपिटल को 12 हज़ार रुपए के कैपिटल तक पहुंचा दिया. ये Miracle कैसे किया?
जवाब : जब आप एक Organisation में 30 साल तक काम करते हैं तो आपके कुछ सपने होते है. आप बहुत सी छोटी-बड़ी बातों को समझ चुके होते हैं. एक फिल्म में हीरो एक दिन का सीएम बनकर कमाल कर देता है तो यहां तो सरकार ने मुझे 5 साल के लिए सीएम बना दिया. ऐसे में तीन साल का वक्त बहुत होता है अपने उन सपनों को पूरा करने के लिए जिन्हें आपने 30 साल तक Organisation के लिए देखे हैं. किसी नए आदमी को जरूर दिक्कतें आती हैं. लेकिन मुझे 30 साल के अनुभव का फायदा हुआ. मैंने सिस्टम बनाए, ट्रांसपरेंसी लाया, इतनी बड़ी कंपनी में ट्रांसपरेंसी की जरूरत बहुत ज्यादा होती है तो जैसे-जैसे ट्रांसपरेंसी बढ़ी निवेशकों का कंपनी में विश्वास बढ़ा और आज हमारी कंपनी की मार्केट कैपिटल 18 हज़ार करोड़ रुपए की हो गई है.

एनबीसीसी के सीएमडी एके मित्तल ने अपने करियर की शुरुआत 1982 में एशियाड से की थी. दिल्ली के इनडोर स्टेडियम के निर्माण में उनकी भूमिका रही है. इसके बाद अलग-अलग जगहों पर उन्हें काम करने का मौका मिला. उनके काम की बदौलत उनकी पहचान बनी और आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं. जब एके मित्तल ने एनबीसीसी के सीएमडी का पदभार संभाला था तब उसका कैपिटल 1270 करोड़ रुपए था जो बढ़कर अब 12 हजार करोड़ रुपए का हो गया है. यह उपलब्धि उनकी लगन और क्षमता को बताती है. उनका मानना है कि यह सब तजुर्बे और प्लानिंग से हासिल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि एनबीसीसी रेलवे, कंस्ट्रक्शन, रीयल इस्टेट, पॉवर प्लांट, सोलर प्लांट और रोड कंस्ट्रक्शन जैसे काम करती है. ज़ी रीज़नल चैनल्स के सीईओ और एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर जगदीश चंद्र के साथ  रूबरू हुए एनबीसीसी के सीएमडी एके मित्तल. ने जगदीश चंद्र के धारदार सवालों का बेबाकी से जवाब दिया. मित्तल ने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में नहीं सोचा था कि वह चेयरमैन बनेंगे. उन्होंने किसी गॉड फादर के रोल से साफ इंकार किया और कहा कि ईश्वर ऐसे रास्ते बनाते गया.

एनबीसीसी के सीएमडी ने बताया कि अलग-अलग सरकारों और संस्थाओं के साथ काम करना और उनसे तालमेल स्थापित करना बड़ी चुनौती नहीं है. अपने आप रास्ता बन जाता है. एनबीसीसी दिल्ली में री-डेवलपमेंट के मॉडल पर काम कर रही है. सेल्फ फाइनेंसिंग के तहत न्यू मोतीबाग कॉलोनी में काम किया और ईस्ट किदवई नगर में काम चल रहा है. इसके बाद नौरोजी नगर, नेताजी नगर और सरोजनी नगर में भी सरकार ने री-डेवलपमेंट का काम सौंपा है, जिनकी वैल्यू 25 हजार करोड़ रुपए है.

 ईस्ट दिल्ली हब के बारे मित्तल ने बताया कि कड़कड़डूमा में डीडीए की 75 एकड़ जमीन है जहां 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से इंटिग्रेटेड टाउनशिप डेवलपमेंट का काम किया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रगति मैदान में भी री-डेवलपमेंट का काम हो रहा है, जहां एक कनवेंशन सेंटर बनाया जा रहा है, जिसमें 3 हजार की क्षमता का फिक्स्ड ऑडिटोरियम और 4 हजार फ्लैट होंगे. वहीं, एक पांच सितारा होटल भी बनाया जाएगा. प्रगति मैदान के आस-पास का इलाका सिग्नल फ्री बनेगा इसके लिए 7 टनल बनाए जाएंगे. ये प्रोजेक्ट दो साल में पूरे हो जाएंगे. एसे ही गुड़गांव में भी एनबीसीसी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बना रहा है. अलवर और फरीदाबाद में कई प्रोजक्ट पर काम होना है.

एनबीसीसी के सीएमडी ने बताया कि उनके दिए कुछ सुझावों पर पीएम ने भी सहमति जताई है. हर आदमी को सस्ता मकान देने का पीएम का जो सपना है उसके लिए अलग-अलग मंत्रालय काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पीएसयू के पास सरप्लस जमीन के लिए सरकार ने एनबीसीसी को लैंड मैनेजमेंट एजेंसी के तौर पर नामित किया है. मित्तल ने कहा कि सारा काम सरकारी मशीनरी नहीं कर सकती और जल्दबाजी में कोई काम नहीं हो सकता.

एनबीसीसी 26 राज्यों के साथ नॉर्थ इस्टर्न स्टेट्स में भी एक्टिव है. उन्होंने बताया कि मणिपुर में बहुत कठिनाइयां हैं. वहीं, नक्सल प्रभावित जगहों पर धमकियां भी मिलती हैं. मित्तल ने बताया कि जिन राज्यों में काम होता है वहां की सरकारों से सहयोग मिलता है. नए प्लान के बारे में उन्होंने बताया कि एनबीसीसी उत्तर प्रदेश में प्रवेश की कोशिश कर रही है. एनबीसीसी में उनका सबसे बड़ा योगदान उसे डिजीटाइज और इलेक्ट्रॉनिकली मजबूत करना रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि क्वालिटी कंट्रोल पर खास ध्यान दिया जाता है ताकि लोगों में सरकारी एजेंसी की पूअर क्वालिटी की धारणा खत्म हो सके. अगले तीन साल के रोडमैप के बारे में उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य देश में ऐसी एक-दो इमारतों का निर्माण करना है जो अब तक नहीं बन पायी हैं. एक सवाल के जवाब में मित्तल ने कहा कि इस सरकार में फैसले बहुत तेजी से लिए जाते हैं. उन्होंने पीएम मोदी के बारे में बताया कि विदेशों में हमारे प्रधानमंत्री बहुत लोकप्रिय हैं.

सवाल : आपने जब सिविल इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की तो क्या आपने सोचा था कि आप इस मुकाम पर पहुंचेंगे?

जवाब : यह तो नहीं सोचा था कि चेयरमैन बनूंगा. हां, यह जरूर सोचा था कि कुछ अच्छा काम करेंगे.

सवाल : आपको इस मुकाम तक पहुंचाने में क्या किसी ने गॉड फादर का रोल प्ले किया?

जवाब : मैं गॉड फादर में यकीन नहीं करता. साल 2013 में मैं चेयरमैन बना. इससे 4-5 साल पहले से ही ईश्वर ने ऐसे रास्ते बनाने शुरू कर दिए जिन पर चलकर मैं इस मुकाम तक पहुंच गया.

सवाल : एशियाड से कैसे जुड़ना हुआ?

जवाब : एशियाड से मैंने अपने करियर की शुरुआत की. 1982 में थापर कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद मैंने काम करना शुरू किया. 1982 में ही एशियाड हुआ था जिसके इनडोर स्टेडियम का निर्माण चल रहा था, तो सबसे पहली जॉब मेरी यहीं लगी. उसके बाद शापुर जी पालून जी कंपनी में मैंने तीन साल नौकरी की. कनॉट प्लेस में जीवन भारती बिल्डिंग है, यहां मैंने तीन साल काम किया और यहीं से कंस्ट्रक्शन और ठेकेदारी मेरे जीन्स में आ गई.

सवाल : सेंट्रल लीडरशिप या Appropriate Leadership की निगाह में आप कैसे आए?

जवाब : अगर आप अपना काम मेहनत और लगन से कर रहे हैं तो भी आप इस मुकाम पर पहुंच सकते हैं. मेरे साथ ऐसा ही हुआ. चार साल हो गए मुझे चेयरमैन की पोजीशन पर और मैंने यह महसूस किया है कि मैं जो भी करना चाहता हूं वो अपने आप हो जाता है. अगर आपके काम करने का तरीका ठीक है, आपमें positive attitude है तो फिर आपको इस तरह के किसी की जरूरत नहीं पड़ती.

 

सवाल : आपकी Organisation का basic mandate या area of operation क्या है?

जवाब : रेलवे के अलावा हमारे mandate में सारी construction cover होती हैं. Including Real Estate, Power Plants, Solar plants, Road construction और बाकी किसी भी तरह की कंस्ट्रक्शन हमारी कंपनी करती है. दिल्ली मेट्रो के पहले मेट्रो स्टेशन सीलमपुर का कंस्ट्रक्शन NBCC ने किया था. मैं उन दिनों इंचार्ज था तो कंपनी की Legacy इस तरह की रही है.

सवाल : दिल्ली में जो अलग-अलग सरकारी संस्थाएं हैं जैसे डीडीए इनके साथ आपका तालमेल क्या है?

जवाब : हम अलग-अलग सरकारों के लिए काम कर रहे हैं. एक प्रोजेक्ट डीडीए का है, एक सेंट्रल और एक राज्य सरकार का भी प्रोजेक्ट है. अलग-अलग एजेंसियों से अप्रूवल लेने पड़ते हैं. लोग कहते हैं कि पब्लिक सेक्टर में काम करना मुश्किल है. मुझे लगता है कि पब्लिक सेक्टर में काम करने के अपने फायदे हैं. इससे दूसरे organisations से तालमेल अच्छा हो जाता है और अप्रूवल मिलने में आसानी होती है.

सवाल : सुना है आपने 25 हज़ार करोड़ रुपए के तीन प्रोजेक्ट sanction कराए हैं वो क्या हैं?

जवाब: दिल्ली में हमनें Re-development का मॉडल शुरू किया है. Self-financing body पर हमने न्यू मोतीबाग कॉलोनी के redevelopment का काम शुरू किया है. इस पर 700 करोड़ रुपये का खर्च होना था. हमने सरकार से कहा इसके लिए हम खुद रुपये जुटाएंगे. हमने लीला होटल को बेचकर वो पैसे जुटाए. वो उस वक्त की सबसे बड़ी डील थी. इस डील के बाद लीला होटल मुश्किल में आ गया था क्योंकि उन्होंने बहुत महंगी कीमत पर जमीन खरीदी थी. हालांकि, हमनें उस 700 करोड़ रुपये से न्यू मोतीबाग को डेवलप किया. आज भारत सरकार के 80 प्रतिशत पॉलिसी मेकर इस कॉलोनी में रहते हैं. वह प्रोजेक्ट सरकार को बहुत अच्छा लगा क्योंकि पैसे की कमी है ऐसे में इस मॉडल पर हमने ईस्ट किदवई नगर के Redevelopment का काम शुरू किया. यहां 5 हजार मकान बन रहे हैं और ये एक बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट है. उस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए हमे 6 हजार करोड़ रुपये generate करने थे उस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए, उसके लिए हमने रिंग रोड के किनारे ऑफिस कॉम्पलेक्स बनाया जिसे पब्लिक सेक्टर और सरकारी डिपार्टमेंट को बेचा है और इस पैसे से हम प्रोजेक्ट का काम कर रहे हैं. इसके बाद सरकार ने हमें नारौजी नगर, नेताजी नगर और सरोजनी नगर के Redevelopment का काम भी सौंप दिया जिनकी वेल्यू 25 हजार करोड़ रुपये है. CPWD भी 7 हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट कर रही है. सरकार ने कहा CPWD ये पैसा कभी generate नहीं कर सकती तो उसका पैसा भी आप ही generate करके दें तो हमने 32 हजार करोड़ की सात कॉलोनियों का ये मॉडल उनको दिया जिसपर काम शुरू हो गया है.

सवाल : ईस्ट दिल्ली हब क्या है?

जवाब : कड़कड़डूमा, ईस्ट दिल्ली में डीडीए की 75 एकड़ लैंड है. उनका ड्रीम पोजेक्ट था यहां Integrated Township develop करें और दिल्ली की सबसे ऊंची 100 मंजिला इमारत यहां बनाई जाए. डीडीए पॉलिसी मेकर है. उनके पास वो क्षमता नहीं थी तो डीडीए ने वह प्रोजेक्ट हमें दे दिया. हमने स्पेन की एक कंपनी के साथ मिलकर उसका डिजाइन बनाया है. वह डिजाइन तैयार है जैसे ही नॉर्म्स पूरे होते हैं यहां Integrated Township development का काम शुरू हो जाएगा. यह प्रोजेक्ट 12 हजार करोड़ रुपये का है.

सवाल : क्या NBCC प्रगति मैदान में भी कोई प्रोजेक्ट कर रही है?

जवाब : वह प्रोजेक्ट लाइफ टाइम प्रोजेक्ट है जिसे हम Redevelop कर रहे हैं. यहां एक convention center बनाया जा रहा है, 7 हजार की capacity का, जिसमें 3 हजार की capacity का fixed auditorioum और 4 हजार फ्लैट. यह भारत का एकमात्र convention center है जो इतनी ज्यादा capacity का होगा. पहले यहां Exhibition के लिए अलग-अलग पवेलियन थे जिन्हें demolish कर Ground + 2 storey बिल्डिंग बनाई जाएगी, जहां Exhibition लगेंगी, जैसा की विदेशों में होता है. उसके साथ में एक 500 keys का 5 स्टार होटल बनाया जाएगा. चौथा component सबसे important है, 14 नवंबर से 28 नवंबर तक प्रगति मैदान आने वाला हर शख्स ट्रैफिक को curse करता है. तो Traffic intervention पर 800 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. पूरा नेटवर्क, भगवानदास रोड, पुराना किला, हाईकोर्ट रोड, आईटीओ से लेकर ओबरॉय तक सिग्नल फ्री हो जाएगा, including भैरों मार्ग. यहां 7 टनल बनाई जा रही हैं जो प्रगति मैदान के अंदर से जाएंगी और रिंग रोड तक निकलेंगी.

सवाल : कब तक पूरा होगा यह प्रोजेक्ट?

जवाब : इस प्रोजेक्ट के लिए 24 महीने का वक्त रखा गया है. जुलाई में प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा लेकिन G-20 को ध्यान में रखते हुए हमनें convention center को 18 महीने में पूरा करके देने का चैलेंज लिया है.

सवाल : प्रगति मैदान का पूरा नक्शा बदलने वाला है.

जवाब : पूरी तरह से नक्शा बदल जाएगा. हमने एक पीसी में नक्शा रीलिज किया था. State of the art structure है, जो अब तक भारत में कहीं नहीं बना है.

सवाल : गुड़गांव में आप कौन सा प्रोजेक्ट कर रहे हैं?

जवाब : गुड़गांव में हम हाउसिंग कॉम्पलेक्स बना रहे हैं जिसे पब्लिक को बेचा जा रहा है. अलवर और उसके आसपास के इलाके में हम affordable housing कर रहे हैं. फरीदाबाद में हम एक रियल इस्टेट प्रोजेक्ट कर रहे हैं. affordable housing प्रोजेक्ट है ये जिसके लिए हमें हरियाणा सरकार ने जमीन दी है और हमनें उन्हें रुपये दिए हैं.

सवाल : क्या इंडिया में affordable housing successful हो पाएगी?

जवाब : Affordable Housing Successful तो होगी. बस हमें कुछ norms बदलनी होगी. कहीं-कहीं पर 500-1000 फ्लैट बनाने से काम नहीं चलेगा. बल्कि integrated Township बनानी होंगी, ताकि जिन लोगों ने वहां फ्लैट खरीदे हैं उन्हें सबकुछ वहीं मिल सके.

सवाल : क्या आपने पीएम को कुछ सुझाव दिए हैं?

जवाब : हमारे दिए सुझावों को पीएम ने agree किया है. हमने तीन प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाई है. एक हैदराबाद और एक कोलकाता का प्रोजेक्ट है. बात साफ है कोई भी 40 किमी दूर जाकर काम नहीं करना चाहता. बात पैसों की नहीं बात टाइम की है, कमफर्ट की है. Integrated Township ही इसका समाधान है.

सवाल : प्राइवेट कंपनियों से क्या आपकी कंपनी प्रतिस्पर्धा कर पाएगी?

जवाब : 25 साल से हमारी कंपनी प्राइवेट रियल इस्टेट कंपनियों से competition कर रही है. हम रियल इस्टेट में उतने ही एक्टिव हैं जितने वो हैं, बस इतना फर्क है बाकी लोग लोन लेकर पैसा लगाते हैं और debt में चले जाते है, हमारे पैसे हमारे अपने हैं, इसलिए हमारी condition, Private real estate कंपनियों से बेहतर है.

सवाल : पीएम का साल 2020 तक हर आदमी को सस्ता मकान मिलने का जो mandate है उसे कैसे पूरा करेंगे?

जवाब : पीएम के mandate को पूरा करने के लिए अलग-अलग मंत्रालय उसके लिए काम कर रहे हैं. Housing ministry, हमारी पेरेंट कंपनी Urban development ministry इस तरफ काम कर रहे हैं. इसके अलावा NBCC को एक और काम दिया गया है जिसमें कहा गया है कि Sick PSU या Closer PSU’s के surplus लैंड को या तो सेल करिए या वहां affordable housing बनाइए. तो हम पता लगा रहे हैं कि कहां-कहां लैंड इस्तेमाल की जा सकती है. लैंड चुनौती नहीं है, लैंड तो रेलवे और दूसरे सरकारी विभागों के पास बहुत पड़ी है. यहां चुनौती स्कीम बनाना और उसके usable करना वह सबसे बड़ा चैलेंज है.

सवाल : PSU’s आपने identify किए हैं जिनके पास surplus लैंड है?

जवाब : सरकार ने उन्हें पहले ही identify किया हुआ है. 26 PSU’s जो बंद होने वाली हैं और 74 ऐसी हैं जो sick हैं. हमें mandate दे दिया गया है. उन्होंने हमें Land Management Agency के तौर पर nominate किया हुआ है. 5 कंपनियों का हमनें already auction निकाल रखा है. हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली, कोटा में इन कंपनियों की लैंड है. हमनें लोगों को जमीन खरीदने का ऑफर दिया है, अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये स्कीम वहां चलेंगी.

सवाल : Initial response कैसा है?

जवाब : हमें जो inquiry मिल रही हैं, उससे कहा जा सकता है रिस्पॉन्स बहुत अच्छा है. उदाहरण के तौर पर Indian Oil को refinery लगाने या डिपो के लिए जमीन नहीं मिल रही थी. अब उन्हें सरकार की तरफ से सरकारी रेट पर आराम से जमीन मिल जाएगी.

सवाल : कहते हैं दिल्ली में डीडीए ने 49 सालों में 5 लाख मकान बनाए. अब 16 लाख मकान बनाने हैं. तो इतना बड़ा जो mandate है वो कैसे पूरा होगा ?

जवाब : सारा काम सरकारी मशीनरी नहीं कर सकती. ना NBCC, ना DDA, ना CPWD. प्राइवेट पार्टनरशिप लानी पड़ेगी लेकिन इसमें हम जल्दबाजी नहीं कर सकते. नहीं तो मकान बनकर खड़े हो जाएंगे, और ना वो बेच पाएंगे और ना कोई खरीद पाएगा. इस परेशानी से बचने के लिए हमारी जैसी संस्था उनसे जुड़ेगी. ताकी उनपर कंट्रोल रखा जा सके और बायर को वक्त पर मकान मिल सके.. अभी प्राइवेट रियल इस्टेट कंपनियों को जमीन तो मिल जाती है और वो प्रोजेक्ट भी शुरू कर देते हैं, आधा मकान बनाया और फिर आधे के बाद दूसरा प्रोजेक्ट शुरू कर देते हैं तो सरकार का सपना पूरा करने के लिए मॉनिटरिंग करनी भी जरूरी है.

सवाल : आप दिल्ली के साथ क्या दूसरी स्टेट्स में भी ऑपरेट कर रहे हैं?

जवाब : हम 26 स्टेट्स के साथ नॉर्थ इस्टर्न स्टेट्स में भी बहुत एक्टिव हैं. पिछले 15 साल में नॉर्थ इस्टर्न स्टेट्स में जो विकास हुआ है वो NBCC ने ही किया है. वहां पर होने वाले विकास कार्यों के लिए जो पैसा जाता है वो NBCC के जरिये ही जाता है.

सवाल : पीएम की Priority है North East… गुवाहाटी, मणिपुर में आप क्या कर रह हैं?

जवाब : मणिपुर बहुत difficult जगह है. यहां हम एक NIT बना रहे हैं. एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बना रहे हैं. गुवाहाटी में एक बहुत Ambitious प्रोजेक्ट हमने शुरू किया है. नई सरकार के बनने पर सीएम ने मुझे बुलाया और कहा कि गुवाहाटी नॉर्थ ईस्ट है. मैं यहां एक ऐसी बिल्डिंग बनाना चाहता हूं जिसमें मुझे, बीजिंग, जापान, सिंगापुर और मलेशिया का कल्चर दिखे. उनका विजन है कि वह उस एरिया की tallest building होनी चाहिए. उस पर काम चल रहा है. लैंड अलॉट हो चुकी है और डीपीआर भी बन रही है. PMGSY प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत त्रिपुरा को हमने पूरा जोड़ दिया है.

सवाल : नक्सल एरिया में आपको काम करने दे रहे हैं वो लोग?

जवाब : धमकियां आतीं हैं लेकिन सबसे बड़ी बात है गवर्नमेंट का सपोर्ट होना. नक्सल इफेक्टेड जितने भी एरिया हैं वहां डेवलेपमेंट होता है तो खास कर गांव वालों को बहुत खुशी होती है.

सवाल : नॉर्थ ईस्ट में कहते हैं construction and corruption they are travel together आपका क्या कहना है?

जवाब : इसी वजह से तो सेंटर ने PSU लगाई क्योंकि स्टेट गवर्नमेंट इश्यू को हैंडल नहीं कर पाते. सरकार को लगा कि यहां से पैसा जाता है पर वहां इस्तेमाल नहीं हो पाता. इसीलिए सेंटर PSU को लगाया ताकि पैसा जब जा रहा है तो जवाबदेही भी हमारी होगी, तो अब वो इश्यू खत्म हो गया. अब मैं कह सकता हूं एक-दो ऐसे स्टेट हैं जहां पर इस शब्द का नाम ही नहीं है.

सवाल : नॉर्थ ईस्ट के अलावा और किस स्टेट में ऑपरेट कर रहे हैं आप?

जवाब : ‘उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, राजस्थान के अंदर हमने ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाई है, वहां के सीएम का एक विजन था कि जो डेवलेपमेंट आप दिल्ली में कर रहे हैं वो हमारे यहां भी आकर करिये. उन्होंने ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाई जिसमें 50% सरकार का है और 50% हमारा. जयपुर में गांधी नगर से हमने डेवलपमेंट की शुरुआत की है इसके बाद हम आगे बढ़ेगें.

सवाल : गवर्नमेंट का कोऑपरेशन आपको मिल रहा है राजस्थान में?

जवाब : सब जगह कोऑपरेशन मिलता है हमारा किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से कोई संबंध नहीं है लेकिन हमें कोऑपरेशन पूरा मिलता है और जितनी इच्छा उनकी NBCC को इंगेज करने की है उतनी ही PWD को बाहर निकालने की है.

सवाल : आप कई राज्यों में मुख्यमंत्री से मिलते हैं तो राजस्थान में how you rate Vasundra Raje as a CM?

जवाब : जहां तक काम की बात है तो मैं NBCC के लिए जितने भी मुख्यमंत्री से मिलता हूं तो 70 परसेंट मंत्री पॉजिटिव हैं काम को लेकर.

सवाल : कुछ और नए प्लान हैं?

जवाब : हम लोग UP में Enter करने की कोशिश कर रहे हैं, सेंट्रल गवर्नमेंट के तो बहुत से प्रोजेक्ट किये हैं लेकिन स्टेट गवर्नमेंट के नहीं किये थे. पिछले 15 साल से हमने UP में कोई काम नहीं किया लेकिन अब हम लोग वहां काम करना चाहते हैं और सरकार भी चाहती है.

सवाल : पिछले 3 सालों में as a chairman आपका सबसे बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन क्या रहा?

जवाब : जब तक आपके लोग आपके साथ नहीं हैं तब तक आप कामयाब नहीं हो सकते. सबसे बड़ा मेरा चैलेंज था जो मैंने डिजीटाइज किया इलेक्ट्रॉनिकल किया. सबसे पहले किसी ने ACR ऑनलाइन भरने का काम किया तो वो हमने किया. दूसरा चैलेंज था ट्रांसपेरेसी पर फोकस करना जितने भी टेंडर होने चाहिए वो वेबसाइट पर होने चाहिए. ये सारे काम मेरे लिए चैलेंज थे और ऑउट साइड NBCC कि बात करें तो जो मेरा क्लाइंट है उसकी डीलीवरी उसको उसके समय पर होनी चाहिए.

सवाल : आपकी रेपोटेशन है गवर्नमेंट और पॉलिटिकल सरकल्स में कि जो लॉस में है उसे आप प्रॉफिट में कन्वर्ट कर देते हैं?

जवाब : एक कंपनी है पब्लिक सेक्टर्स हिन्दुस्तान स्टील वर्क्स लिमिटेड जो बहुत खराब काम कर रही थी. भारत सरकार ने मुझे बुलाया और कहा, हम आपको इसके साथ मर्ज करना चाहते हैं, इसके लिए कोई राजी नहीं हुआ. मैने कहा मर्ज कर दिजिए, आज वो कंपनी डेब्ट फ्री हो गई है उसके पास बैंक लोन था, उसी के एसेट से हमने लोन पूरा कर दिया अब वो हर तीन महीने में प्रोफिट डिफरेंट तरीके से दिखाएगी.

सवाल : रियल इस्टेट में आप भी एक डेवलेपर कि तरह हैं साइज बड़ा है आपका. रियल इस्टेट के हालात अच्छे नहीं है. 3-4 साल से तो इस मंदी के माहौल में आप कैसे सरवाइव कर रहे हैं?

जवाब : गवर्नमेंट का हम पर भरोसा है और कुछ उनकी रिक्वायरमेंट भी है कि सरकार से अगर कुछ लेते हैं तो उनकी सेफ्टी रहती है. हम किसी भी रेट
पर बेचते हैं, ना टेंडर कि जरूरत है क्योंकि उनका भरोसा है कि आज डिलीवरी का कमिटमेंट का वादा किया है तो आज देंगे. जो भी सरकारी कर्मचारी लोन पर लेकर मकान खरीदना चाहता है वो ये सोचता है कि इससे भरोसेमंद कंपनी कोई नहीं हो सकती तो ये फर्क हमारे और प्राईवेट डेवलपर में.

सवाल : आम धारणा है गवर्नमेंट कंस्ट्रक्शन एजेंसीज की क्वालिटी पूअर रहती है तो क्वालिटी कंट्रोल के लिए कोई कदम उठा रहे हैं?

जवाब : हमारे यहां (3 TL) मॉनिटरिंग सिस्टम है, इंटर्नल क्वालिटी सिस्टम है जो प्रोजेक्ट में देखी जाती है. इसके अलावा हम थर्ड पार्टी क्वालिटी इंश्योरेंस को इंगेज करते हैं तो हमारा मैकेनिज्म ऐसा है कि क्वालिटी कंट्रोल होना ही होना है तो इतना मुश्किल नहीं है क्वालिटी को मेंटेन करना.

सवाल : अगले तीन साल के लिए आपका क्या रोड मैप है?

जवाब : मेरा एक ऐम है कि कम से कम हिन्दुस्तान में 1 या 2 ऐसी बिल्डिंग बनाऊं जो हिन्दुस्तान में नहीं है. आपको बड़ा ताज्जुब होगा TV tower बना है, दिल्ली में सबसे ऊंचा स्ट्रक्चर 1982 में NBCC ने बनाया है तो हम चाहते हैं कि ऐसे लैंड मार्क प्रोजेक्ट बना के जाएं जिन्हे आने वाली जनरेशन देखे.

सवाल : इन सारे प्रॉसेस में एडमिनिस्ट्रेटिव मिनिस्ट्री उनका सपोर्ट-कोऑपरेशन कैसे मिलता है?

जवाब : बिना उनके कोऑपरेशन के ये सब हो ही नहीं सकता. हम जिस मंत्रालय के लिए काम करते हैं उनका सहयोग बहुत है.

सवाल : रियल इस्टेटमेन वालों के लिए एक प्रॉब्लम है-इन्वायरमेंट मिनीस्ट्री, आपका अनुभव कैसा है?

जवाब : मुश्किलें आती हैं इसमें कोई शक नहीं है लेकिन अगर आप सिस्टमेटेक्ली अप्रोच करते हैं तो काफी हद तक कम कर सकते हैं.

सवाल : आपने दूसरी सरकार के साथ भी काम किया तो क्या फर्क महसूस होता है?

जवाब : इस सरकार के अंदर डिसीजन मेकिंग बहुत फास्ट है.

सवाल : आज सारे देश में मोदी की चर्चा है तो आप एक सिटिजन के तौर पर कैसे देखते हैं?

जवाब : फक्र होता है. आप चाहे गल्फ में जाइये या यूरोप में जाइये वो हमारे प्रधानमंत्री को नाम से ऐसे जानते हैं जैसे कि वह बहुत पॉपुलर हों, तो आप जब विदेश में जाते हैं तो आपको जो सम्मान मिलता है वो किसी लीडर की वजह से मिलता है.

सवाल : सारे माहौल में GDP की ग्रोथ में आपका डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन काफी रोल प्ले करेगा?

जवाब : बिल्कुल बनेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »