रिव्यू कमेटी की बैठक , पांच अफसरों की नौकरी पर लटकी तलवार

0 तीन आईएएस, एक आईपीएस और एक आईएफएस को दी जा सकती है अनिवार्य सेवानिवृत्ति

0 बाबूलाल का मामला भी रिव्यू में जाएगा

रायपुर।  प्रतिनिधि//आईएएस रिव्यू कमेटी की बैठक 13 अप्रैल को मंत्रालय में होगी। केंद्र के कार्मिक एवं पेंशन विभाग के अधीन बनी रिव्यू कमेटी में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और एक एसीएस के अलावा केंद्र से नियुक्त प्रतिनिधि भाग लेंगे। कमेटी करीब सौ अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड का रिव्यू करेगी। राज्य में कम से कम पांच ऐसे अफसर हैं, जिनकी नौकरी पर तलवार लटक रही है। रिव्यू कमेटी इन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर विचार कर सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों ने बताया कि बैठक की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

राज्य में कई आईएएस ऐसे हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। हालांकि रिव्यू कमेटी सिर्फ भ्रष्टाचार के प्रकरणों की समीक्षा नहीं करती, बल्कि ऐसे अफसरों की सेवा पर भी निर्णय करती है, जिनका काम जनता के लिए संतोषजनक नहीं होता। रिव्यू कमेटी की व्यवस्था शुरू से रही है, लेकिन इस कमेटी का पहले खास महत्व नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार्ज लेने के बाद रिव्यू कमेटी को सशक्त बनाया गया है। पिछले साल इस कमेटी की सिफारिश पर आईपीएस राजकुमार देवांगन को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा चुकी है। ऐसे में इस बैठक को लेकर मंत्रालय में पदस्थ अफसरों में हड़कंप है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों का हर 15 व 25 साल में रिव्यू होता है। इस बार 1981 से 92 बैच के 24 डायरेक्ट आईएएस अफसरों का रिव्यू होना है। इसके अलावा 2000 से 2007 के बीच अवॉर्ड पाए 58 प्रमोटी आईएएस भी रिव्यू के दायरे में होंगे। 182 से 92 बैच के 37 आईपीएस और 18 आईएएफएस का रिव्यू होगा।

राज्य में सीनियर स्तर के कई आईएएस अफसरों पर भ्रष्टाचार के प्रकरण चल रहे हैं। एक महिला आईएएस हैं, जो पहले रायपुर की कमिश्नर रह चुकी हैं। उन पर राजस्व मंडल का अध्यक्ष रहते हुए कई प्रकरणों में गलत निर्णय देने का आरोप लगा था। अब ये मामले हाईकोर्ट में चल रहे हैं। पिछले साल रिव्यू कमेटी की बैठक में उन्हें वाच लिस्ट में डाला गया था। इस बार उनकी नौकरी खतरे में है। एक वरिष्ठ आईएएस पिछले कुछ सालों से मंत्रालय में बिना काम के रखे गए हैं। छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड में रहते हुए उन पर घोटाले के आरोप लगे थे। नॉन घोटाले में फंसे एक अफसर भी इस दायरे में आ रहे हैं। राज्य के एक आईएएस के खिलाफ यौन प्रताड़ना मामले की जांच चल रही है। उनका प्रमोशन रोका गया था। वे भी जांच के दायरे में हैं। एक आईएफएस सीनियर होकर भी डीएफओ बने हुए हैं, क्योंकि यूपीएससी ने उन्हें सबसे निचले स्तर पर रखने को कहा है। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इन पांचों अफसरों के अलावा मंत्रालय में पदस्थ सचिव स्तर के कई अफसर हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के पुराने मामले हैं। बाबूलाल अग्रवाल का मामला भी रिव्यू में जाएगा। उन पर सीबीआई, आयकर और ईडी के प्रकरण दर्ज हैं।

डेपुटेशन पर राजधानी में जमे अफसरों पर नजर

कई आईएफएस अफसर राजधानी में विभिन्न विभागों में डेपुटेशन में जमे हैं। पर्यटन, संस्कृति आदि विभागों में संचालक के पद पर आईएफएस अफसर हैं। मंत्रालय में भी एक दर्जन आईएफएस हैं। राज्य निर्माण के दौरान एसीएस स्तर के दो अफसर थे अब पांच हैं। आईएफएस में भी पीसीसीएफ के दो पद थे अब पांच हैं। फील्ड में अफसरों की कमी है, जबकि राजधानी में भरमार है। जीएडी के सूत्रों ने बताया कि रिव्यू कमेटी ऐसे प्रकरणों पर भी विचार करेगी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »