डॉ. मनमोहन सिंह के टीचर के नाम पर चेयर,पीयू रिलीज करेगी स्टैंप, जस्टिस खैहर लेंगे डिग्री

चंडीगढ़ //पूर्वप्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के टीचर रहे डॉ. रंगनेकर की याद में पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स में चेयर स्थापित की जाएगी और इसका पहला लेक्चर डॉ. सिंह ही देंगे। ये जानकारी वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि चार मार्च को होने वाली कन्वोकेशन में उपराष्ट्रपति चांसलर वैंकेया नायडू चीफ गेस्ट होंगे। पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जगदीश सिंह खैहर भी इसी कन्वोकेशन में अपनी ऑनरेरी डिग्री रिसीव करेंगे। पिछली बार वह व्यस्तता के कारण नहीं ले पाए थे। यूनिवर्सिटी इस बार लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, प्रो. एमएम शर्मा और प्रो. तेजिंदर सिंह विर्दी को ऑनरेरी डिग्री देने वाली है। इस बार का खेल रत्न मिल्खा सिंह, ज्ञान रत्न प्रो. बीएन गोस्वामी और उद्योग रत्न सुनील कांत मुंजाल को दिया जाएगा।
प्रो. ग्रोवर ने बताया कि यूनिवर्सिटी कैंपस में ऑनर्स स्कूल शुरू होने की शताब्दी मनाएगी। पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर में 1919 में पहले टीचर की नियुक्ति हुई थी और ऑनर्स स्कूल कोर्स शुरू हुए थे। उससे पहले तक पीयू सिर्फ एग्जाम लेने वाली यूनिवर्सिटी थी। जनवरी 2019 में ही पीयू में 10 साल तक वीसी रहने वाले प्रो. आरसी पॉल की सौवीं जन्मशताब्दी है। इसे समर्पित स्टैंप रिलीज की जाएगी। पीयू ने इसके लिए सरकार को लिख दिया है। तीन दिवसीय प्रोग्राम में हर डिपार्टमेंट पार्टिसिपेट करेगा। इसके लिए विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा। वीसी अगले साल पीयू में होने वाले नए अपडेट की जानकारी साझा करने के लिए प्रेस कान्फ्रेंस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कन्वोकेशन के साथ ही वह लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, डॉ. तेजिंदर सिंह विर्दी, प्रो. मनमोहन शर्मा और जगदीश सिंह खैहर का लेक्चर कराने के प्रयास मे हैं।
पैसा मिले मिले कोर्स शुरू होंगे 
वीसीप्रो. ग्रोवर ने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस के लिए यदि ग्रांट मिल जाती है तो पीयू अपना प्लान 10 साल में पूरा कर लेगी लेकिन यदि ग्रांट नहीं मिलती तब भी 15 साल में सभी नए कोर्स शुरू कर दिए जाएंगे जो इस बार प्रस्तावित किए गए हैं। एमबीबीएस पीएचडी जैसे कोर्सेज शुरू करने और कांट्रेक्ट फैकल्टी रखने का प्रस्ताव यूनिवर्सिटी ने रखा है। यदि पैसा नहीं मिलता तो कम चलने वाले कुछ कोर्स कम करने होंगे। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के लिए इंप्रूव करना मजबूरी है क्योंकि इसके बिना केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। प्रो. ग्रोवर ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पंजाब सरकार के बराबर ही ग्रांट देने में दिलचस्पी जताई है। इसके बदले हरियाणा के दो जिलों के कॉलेजों को एफिलिएट करना होगा। इस दिशा में वह चीफ सेक्रेटरी हरियाणा, चीफ सेक्रेटरी पंजाब और यूटी के एजुकेशन सेक्रेटरी से मिल चुके हैं। पंजाब के गवर्नर वीपी बदनौर और हरियाणा के गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी से भी उनकी मुलाकात हो चुकी है।

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