आद‍ित्यनाथ की टीम में हैं ये 5 मह‍िलाएं, राजनाथ के बेटे को जगह नहीं

उत्तर प्रदेश का ज़िम्मा संभालने वाली नई टीम में कैबिनेट में पाँच महिलाओं को जगह दी गई है जिनमें रीता बहुगुणा जोशी, गुलाब देवी, स्वाति सिंह, अनुपमा जायसवाल और अर्चना पांडे शामिल हैं.इनमें दो का ज़िक्र ज़रूरी हो जाता है. रीता कांग्रेस की बड़ी नेता रह चुकी हैं और स्वाति सिंह नया चेहरा हैं.मायावती पर विवादित टिप्पणी करने वाले भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति पहली बार विधायक बनीं और मंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहीं.हालांकि भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ अमेठी में शानदार जीत दर्ज की. उम्मीद थी कि गरिमा सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहींहालांकि भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ अमेठी में शानदार जीत दर्ज की. उम्मीद थी कि गरिमा सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं

सबसे ज़्यादा ओबीसी, 7 ठाकुर, 8 ब्राह्मण, 6 दलित, 8 कायस्थ और वैश्य, 2 जाट और एक मुसलमान को जगह दी गई है.भाजपा के इकलौते मुसलमान मंत्री मोहसिन रज़ा हैं जो विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं और कुछ वक़्त पहले ही भाजपा के कुनबे में शामिल हुए थे. में पाँच महिलाओं को जगह दी गई है जिनमें रीता बहुगुणा जोशी, गुलाब देवी, स्वाति सिंह, अनुपमा जायसवाल और अर्चना पांडे शामिल हैं.

 इन मह‍िलाओं को बनाया गया मंत्री…
स्वाति सिंह- राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
-यूपी के नवनिर्वाचित सीएम योगी आदित्यनाथ के मंत्रालय में स्वाति सिंह ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली है।
-मायावती पर विवादित टिप्पणी करने वाले बीजेपी नेता दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह ने अखिलेश के भाई अनुराग को हराया था।

-पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली स्वाति को बीजेपी ने लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से टिकट दिया था, जहां उन्होंने कुल 108506 वोट हासिल किए।

डॉ. रीता बहुगुणा जोशी
-पहले कांग्रेस के टिकट पर और इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाली रीता बहुगुणा जोशी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
-इन्होंने मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को लखनऊ कैंट सीट पर करारी श‍िकस्त दी है।
-बहुगुणा उत्तराखंड के लखनऊ में निवास करने वाले 1 लाख से ज्यादा वोटरों में खासी पकड़ रखती हैं, जबकि कैंट क्षेत्र में ही 30 हजार के करीब उत्तराखंडी वोटर हैं।

-बताते चलें क‍ि रीता बहुगुणा के भाई विजय बहुगुणा भी उत्तराखंड बीजेपी में शामिल हैं।

गुलाब देवी
 -गुलाब देवी चंदौली से आती हैं और भाजपा की कल्याण सिंह वाली सरकार में राज्यमंत्री रह चुकी हैं।
-भाजपा का दलित चेहरा गुलाब देवी ने इस बार सपा की लक्ष्मी गौतम को हराया है।

-दलितों में सही मैसेज देने के लिए इन्हें राज्यमंत्री बनाया गया है।

अर्चना पांडेय
 -पूर्व मंत्री रामप्रकाश त्रिपाठी की पुत्री अर्चना पांडेय छिबरामऊ से पहली बार विधायक बनी हैं।
-इस क्षेत्र में ब्राम्हणों का असर है। ब्राह्मण फेस होने के कारण उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया है।
अनुपमा जायसवाल
-अनुपमा जायसवाल ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली, वो बहराइच सीट से चुनाव जीती हैं।

लखनऊ कैंट सीट पर अपर्णा यादव को शिकस्त देने वाली रीता बहुगुणा जोशी और नंद गोपाल नंदी कांग्रेस से आए थे लेकिन दोनों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है. सपा से भाजपा में आए एस पी सिंह बघेल को भी मंत्री बनाया गया है.मंत्रीमंडल में सूबे की राजधानी और पश्चिमी हिस्से को ख़ासी तरजीह दी गई है. लखनऊ से मेयर रहे दिनेश शर्मा, स्वाति सिंह, रीता बहुगुणा जोशी और आशुतोष टंडन को मंत्री बनाया गया है.इसी तरह से पश्चिमी यूपी से लखनऊ पहुंचे नेताओं को इफ़रात में मंत्री पद मिले हैं. सूबे के इस हिस्से से आने वाले धरमपाल सिंह, गुलाबो देवी, सुरेश राणा, श्रीकांत शर्मा, अतुल गर्ग, भूपेंद्र चौधरी, लक्ष्मी नारायण चौधरी, संदीप सिंह को मंत्री पद मिला है.साथ ही इलाहाबाद को भी मंत्रीमंडल में अच्छी-ख़ासी जगह मिली है. बुंदेलखंड इस मामले में कुछ बदक़िस्मत रहा. 19 की 19 सीटों पर भाजपा जीती लेकिन यहां से सिर्फ़ दो लोगों को मंत्री बनाया गया है.महरौनी के मन्नु कोरी को राज्य मंत्री बनाया गया है जबकि उरई से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया है.

जाट समुदाय के दो नेताओं लक्ष्मी नारायण चौधरी (कैबिनेट) और भूपेंद्र सिंह चौधरी(राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है जबकि वैश्य समुदाय से चार लोगों को मंत्रीपरिषद में जगह दी गई है। नंद कुमार गुप्ता ‘नंदी'(कैबिनेट), राजेश अग्रवाल(कैबिनेट), अनुपमा जायसवाल(राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) और अतुल गर्ग(राज्यमंत्री) को कैबिनेट में जगह मिली है। वहीं कायस्थ जाति के सिद्धार्थनाथ सिंह (कैबिनेट) को भी योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

तीन कुर्मी मंत्री तो एक यादव को मिली कैबिनेट में जगह

वहीं वोट बैंक के लिहाज से अहम माने जाने वाले कुर्मी समुदाय से तीन लोगों को मंत्री बनाया गया है। मुकुट बिहारी वर्मा (कैबिनेट), स्वतंत्र देव (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) और जय कुमार सिंह ‘जैकी’ (राज्यमंत्री) को योगी कैबिनेट में जगह मिली है।जबकि मुलायम सिंह यादव का वोट बैंक माने जाने वाले यादव जाति से पार्टी ने महज एक व्यक्ति गिरीश यादव को राज्यमंत्री बनाया गया है। जबकि कोइरी समुदाय से स्वामी प्रसाद मौर्या (कैबिनेट) और सैनी समुदाय से धरम सिंह सैनी (राज्यमंत्री स्वतंत्रप्रभार) को मंत्री बनाया गया है।

तीन दलित और 4 एमबीसी बने मंत्री

योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में दलितों और अति पिछड़े वर्ग को भी जगह दी गई है। विपक्ष हमेशा बीजेपी पर दलित विरोधी राजनीति का आरोप लगाता रहा है लेकिन योगी मंत्रिमंडल में उन्हें भी पर्याप्त जगह दी गई है।एमबीसी में कोरी से मनोहर लाल पंथ मन्नु कोरी (राज्यमंत्री), राजभर समुदाय से ओम प्रकाश राजभर (कैबिनेट), अनिल राजभर (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार), बिंद-निषाद-नोनिया समुदाय से दो लोगों दारा सिंह चौहान (कैबिनेट) और जय प्रकाश निषाद (राज्यमंत्री) को मंत्री बनाया गया है।

एकमात्र मुस्लिम को मिली कैबिनेट में जगह

वहीं दलित समुदाय में चर्मकार जाति से रमापति शास्त्री, धोबी समुदाय से गुलाबो देवी (राज्यमंत्री) और पासी समुदाय से सुरेश पासी (राज्यमंत्री) को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। जबकि सिख समुदाय से बलदेव सिंह ओलख (राज्यमंत्री) औऱ मुस्लिम समुदाय से एक मोहसिन रज़ा (राज्यमंत्री) को कैबिनेट में जगह दी गई है।रजा शिया समुदाय से आते हैं। रजा योगी मंत्रिमंडल में एकमात्र मुस्लिम चेहरा है। रजा को मंत्री बनाया जाना इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान 403 सीटों में से एक भी सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था। रजा न तो विधानसभा के सदस्य हैं और नहीं वह विधानपरिषद के सदस्य है।

पंकज सिंह को कैबिनेट में जगह नहीं

योगी की टीम में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को मंत्री पद दिया गया है.लेकिन संभावानाओं से उलट नोएडा से जीते गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को कैबिनेट में जगह नहीं दी गई है.पहले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में राजनाथ सिंह भी शामिल बताए जा रहे थे लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया था और अंत में हुआ भी वही.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »