छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता प्रोटोकॉल में 22वें नंबर पर, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

बिलासपुर. राज्यों के महाधिवक्ताओं को केंद्र सरकार ने प्रोटोकाल की लिस्ट में 25वें स्थान पर रखा है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2013 में जारी की गई प्रोटोकाल लिस्ट में महाधिवक्ता को 22वें नंबर पर रखा गया है। इस नंबर पर राज्यमंत्री, सांसद, संसदीय सचिव, प्रदेश के मुख्य सचेतक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, वक्फ ट्रिब्यूनल के चेयरमैन आदि भी हैं। स्टेट बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष और कौंसिल के सदस्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर इसे अपमानजनक बताया है।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र व राज्य की सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ पांच पदों को ही संवैधानिक दर्जा हासिल है, जिनमें से महाधिवक्ता एक हैं। वर्तमान में जेके गिल्डा महाधिवक्ता हैं।

केंद्र सरकार द्वारा 1979 में जारी प्रोटोकाल की लिस्ट में राज्य के महाधिवक्ताओं को 25वें नंबर पर रखा गया है। लिस्ट में महाधिवक्ता की जगह को अपमानजनक बताते हुए स्टेट बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन कोषराम साहू और कौंसिल के सदस्य रामनारायण व्यास ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ पांच पदों को संवैधानिक दर्जा दिया गया है। इनमें राज्यपाल, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और महाधिवक्ता शामिल हैं।

संवैधानिक दर्जा प्राप्त प्रदेश के सर्वोच्च कानून अधिकारी को प्रोटोकाल की लिस्ट में 25वें स्थान पर रखना अपमानजनक है। चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की बेंच ने मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने इस दौरान मौजूद एडिशनल साॅलिसिटर जनरल और अतिरिक्त महाधिवक्ता को केंद्र व राज्य सरकार का जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई 16 मई को होगी।

इसलिए अहम है यह पद
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिए एटार्नी जनरल की नियुक्ति की जाती है, यह संवैधानिक पद है। एटार्नी जनरल संसद को संबोधित कर सकते हैं। वहीं, हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। वे भी विधानसभा को संबोधित कर सकते हैं। एटार्नी जनरल केंद्र और महाधिवक्ता राज्य के सर्वोच्च कानून अधिकारी होते हैं। महाधिवक्ता स्टेट बार कौंसिल के पदेन सचिव भी होते हैं।

एटार्नी जनरल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत होती है। इस अनुच्छेद में एटार्नी जनरल के कार्यों व अधिकारों की विस्तृत व्याख्या की गई है। वहीं राज्य के महाधिवक्ताओं की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत की जाती है। महाधिवक्ता राज्य के विधिक सलाहकार होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में प्रस्तुत मामलों में सरकार का पक्ष रखते हैं।

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