हितेश चंद्र अवस्थी बनाए गए UP के कार्यकारी DGP

लखनऊ: उत्तर प्रदेश शासन में दो शीर्ष पद कार्यवाहक अधिकारियों के हवाले हैं। छह महीने पहले मुख्य सचिव के पद से डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय के सेवानिवृत होने के बाद उनकी कुर्सी राजेंद्र कुमार तिवारी बैठे हैं तो शुक्रवार को पुलिस विभाग के मुखिया ओपी सिंह के सेवानिवृत होने के बाद हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस महानिदेशक पद का कार्यभार संभाला है। वह सूबे के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक हैं। महानिदेशक सतर्कता अधिष्ठान अवस्था के पास पुलिस विभाग के मुखिया का अतिरिक्त कार्यभार है। बता दें कि, डीजीपी बनने की रेस में वरिष्ठता सूची के क्रम में भी 1985 बैच के IPS हितेश चंद्र अवस्थी ही सबसे आगे थे.

ओपी सिंह को रिजर्व पुलिस लाइंस लखनऊ में आयोजित रैतिक परेड में विदाई दी गई. 1983 बैच के आईपीएस ओपी सिंह 23 जनवरी 2018 से डीजीपी पद पर कार्यरत थे. आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह के साथ डीजी अभिसूचना भावेश कुमार सिंह और डीजी विशेष जांच महेन्द्र मोदी भी रिटायर हो गए हैं.पुलिस मुख्यालय में देर शाम को ओपी सिंह ने हितेश चंद्र अवस्थी को कार्यभार सौंपा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम को ओपी सिंह के आवास पर आयोजित विदाई समारोह में भी पहुंचे। गुरुवार देर शाम से ही फर्रुखाबाद में 26 बच्चों को बंधक बनाने की सिरफिरे की हरकत पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ आला पुलिस अधिकारियों के साथ योजना बनाने में हितेश चंद्र अवस्थी की सक्रियता से आभास होने लगा था कि वह कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक होंगे। सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक 1985 बैच के आईपीएस हितेश चंद्र अवस्थी जून 2021 में रिटायर होंगे।अपने करियर में साफ छवि के अफसरों में गिने जाने वाले हितेश चंद्र अवस्थी करीब 14 वर्ष तक सीबीआई में तैनात रहे हैं। 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश सिंह 23 जनवरी, 2018 से डीजीपी पद पर कार्यरत थे।

बता दें कि, ओपी सिंह ने पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद 31 दिसंबर 2017 को डीजीपी का पद संभाला था. ओपी सिंह 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. इससे पहले वह डीजी सीआईएसएफ के पद पर भी रह चुके हैं. नेपाल से लगी सीमा के लखीमपुर खीरी जिले में पुलिस प्रमुख के रूप में तैनात रहने के दौरान ओपी​ सिंह ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए थे. उन्होंने 1992-93 में इस क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों का सफाया किया था.दिलचस्प है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश में ब्यूरोक्रेेसी के शीर्ष अधिकारी के पद पर कई महीनों से कार्यकारी के रूप में राजेंद्र कुमार तिवारी ही मुख्य सचिव का काम देख रहे हैं। छह माह का अतिरिक्त कार्यकाल समाप्त करने के बाद अनूप चंद्र पाण्डेय मुख्य सचिव के पद 31 अगस्त 2019 को रिटायर हो गए थे। उसके बाद से ही राजेंद्र कुमार तिवारी कार्यवाहक मुख्य सचिव के पद पर जमे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक मुख्य सचिव की खोज पूरी नहीं हो सकी है।

प्रदेश के डीजीपी के लिए जिन अफसरों की सूची भेजी जा गई थी, उसमें 1984 बैच के आईपीएस एपी महेश्वरी का नाम पहले नंबर पर था जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में डीजी हैं। इसके बाद यूपी में विजिलेंस में तैनात 1985 बैच के हितेश चंद्र अवस्थी, केंद्र में आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार, यूपी में नागरिक सुरक्षा के डीजी 1986 बैच के जेएल त्रिपाठी, सीआरपीएफ में एडीजी मोहम्मद जावेद अख्तर, बीएसएफ में स्पेशल डीजी नासिर कमाल, यूपी में डीजी सुजानवीर सिंह, केंद्र में बीएसएफ में एडीजी 1987 बैच के मुकुल गोयल, ईओडब्ल्यू में डीजी आरपी सिंह, डीजी रूल्स एंड मैनुअल विश्वजीत महापात्रा, मानवाधिकार आयोग में डीजी जीएल मीणा, भर्ती बोर्ड के डीजी 1988 बैच के आईपीएस राजकुमार विश्वकर्मा के साथ ही हाल ही में प्रतिनियुक्ति से वापस आने वाले देवेंद्र सिंह चौहान, केंद्र में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में एडीजी अनिल अग्रवाल, यूपी में जेल विभाग के डीजी आनंद कुमार, डीजी कोऑपरेटिव सेल अशित कुमार पांडा, एडीजी पावर कॉर्पोरेशन कमल सक्सेना, एडीजी ट्रैफिक विजय कुमार, एडीजी पीटीसी बृज राज और 1989 बैच के आईपीएस और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड में एडीजी के पद पर तैनात आशीष गुप्ता के नाम हैं।

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