स्टाइलिश संत भय्यू महाराज को ले डूबी रंगीन मिजाजी -दूसरी शादी और घरेलू कलह

इंदौर से विशेष रपट//

दुनिया को संयम और मुक्ति की सीख देने वाले भय्यू महाराज, दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कुहू के बीच चल रहे विवाद से टूट गए थे। दर्जनों ऐसे मौके आए जब पत्नी और बेटी आमने-सामने हो गई। दोनों के बीच सुलह और सब कुछ सामान्य करने के प्रयास भय्यू महाराज करते रहे, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। मंगलवार को बेटी पुणे से इंदौर आने वाली थी, तब उनके घर मौजूद परिजन और कर्मचारियों को भी विवाद होने का भय सता रहा था। भय्यू महाराज को भी शायद इस बात का अंदेशा हो गया था। हजारों लोगों को उनकी समस्याओं का चुटकियों में हल बताने वाले भय्यू महाराज शायद जब अपनी समस्या का हल नहीं तलाश पाए तो उन्होंने खुद की जीवनलीला समाप्त कर ली।

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संत भय्यू महाराज (50) ने मंगलवार12 जून 2018 को आत्महत्या कर ली। उन्होंने सिल्वर स्प्रिंग्स स्थित घर में रिवॉल्वर कनपटी पर रखकर गोली चला दी, जो आरपार हो गई। उन्होंने पॉकेट डायरी में डेढ़ पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा है। पुलिस की प्राथमिक जांच में घरेलू विवाद के तनाव में आत्महत्या की बात सामने आ रही है। वहीं, पुलिस को दिए बयान में पत्नी-बेटी ने पारिवारिक विवाद की बात करते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगाया।
डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कि घर में भय्यू महाराज, मां व सेवक विनायक और योगेश थे। पत्नी डॉ. आयुषी बाहर गई थीं। पुलिस को विनायक ने बताया कि घर में कई लोग रहते हैं। दो सेवादार और थे जिन्हें सुबह 11 बजे उन्होंने नीचे भेज दिया था और पुणे में रहने वाली बेटी कुहू के कमरे में चले गए थे। पत्नी दोपहर करीब 12 बजे लौटीं तो देखा कि लाइसेंसी रिवॉल्वर भय्यू महाराज के हाथ के पास पड़ी थी और सिर से खून बह रहा था। विनायक और योगेश उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। अस्पताल के जीएम के मुताबिक दोपहर 2.06 बजे सेवक उन्हें यहां लेकर आए। वे ब्रॉट डेड (अस्पताल आने के पूर्व मृत्यु होना) थे। भय्यू महाराज की आत्महत्या के मामले में पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। भय्यू महाराज कई दिन से पारिवारिक तनाव में थे। पत्नी आयुषी से उनके विवादों की बात पर पुलिस जांच कर रही है। सूत्र बताते हैं दूसरी शादी के बाद पत्नी का दखल उनके जीवन में काफी बढ़ गया था। इसे लेकर कई बार उनमें कहा-सुनी हो चुकी थी। भय्यू महाराज पहली पत्नी से हुई बेटी कुहू से बहुत प्यार करते थे। दूसरी शादी होने के बाद बेटी ने उनसे दूरी बना ली थी। दूसरी पत्नी से उनकी तीन महीने की बेटी है।

बेटी ने पूजा का सामान फेंक दिया था 

जानकारी के मुताबिक दूसरी पत्नी को घर लाते ही बेटी ने पूजा का सामान फेंक दिया। पहली पत्नी माधवी के निधन के बाद भय्यू महाराज ने डॉ. आयुषी से शादी करने के निर्णय के बारे में बेटी कुहू को नहीं बताया था। वह शादी से सहमत नहीं थी। गुस्से के कारण कुहू शादी में भी शामिल नहीं हुई। डॉ. आयुषी जब पहली बार घर आईं तो कुहू ने इसका विरोध किया। दोनों में कहासुनी भी हुई। कुहू ने गुस्से में भय्यू महाराज के पूजन स्थल से दीपक और सामान फेंक दिया। डॉ. आयुषी को इससे बहुत तकलीफ हुई। उन्होंने भय्यू महाराज से कहा- ‘तुमने कुहू की इस हरकत का विरोध क्यों नहीं किया।’ भय्यू महाराज ने कहा कि बेटी नादान है। उसकी मां इस दुनिया में नहीं है। समय के साथ-साथ सब सामान्य हो जाएगा। डॉ. आयुषी को बुरा लगा। वह कुहू की हरकत से ज्यादा इस बात से दुखी हुई कि उनके पति ने उनका साथ नहीं दिया। डॉ. आयुषी ने शादी के कुछ समय बाद मकान का रंगरोगन करवाया। पुताई के दौरान उन्होंने कुहू की मां व भय्यू महाराज की पहली पत्नी माधवी की सारी तस्वीरें हटवा दीं। जब कुहू पूणे से घर आई और मां की तस्वीरें गायब देखी तो हंगामा कर दिया। डॉ. आयुषी और कुहू के बीच जमकर कहासुनी हुई। उस वक्त भी भय्यू महाराज बेटी के पक्ष में खड़े रहे। उन्होंने डॉ. आयुषी को समझाने की कोशिश की और कहा वह बेटी को कैसे डांट सकते हैं। इन दोनों घटनाओं से डॉ. आयुषी और गुस्सैल हो गई। अब वह भय्यू महाराज और उनके करीबी कर्मचारियों से भी सीधे लड़ने लगी थी। भय्यू महाराज बेटी और पत्नी के बीच फंस चुके थे। घर का हर कर्मचारी इस बात से भयभीत रहता था कि घर में किसी भी वक्त बवाल मच सकता है।

कलह की बड़ी वजह: माता-पिता को घर के सामने दिला दिया बंगला

डॉ. आयुषी ने भय्यू महाराज के सामने अपने माता-पिता को साथ रखने का प्रस्ताव रख दिया। दबाव में भय्यू महाराज ने अपने घर के सामने ही बड़ा बंगला किराए पर लिया और डॉ. आयुषी के माता-पिता को ठहराया। जैसे ही कुहू को इस बारे में पता चला, उसने पिता से नाराजगी जताई। भय्यू महाराज ने बेटी को समझाने का प्रयास किया और कहा कि वह कुछ समय में सब कुछ ठीक कर देंगे। उन्होंने स्कीम-74 में 60 लाख रुपये का प्लॉट खरीद लिया है। वहां बड़ा बंगला बनाकर कुहू के साथ रहेंगे। कुहू ने उनकी बातों पर विश्वास करने से इन्कार कर दिया। भय्यू महाराज को हर वक्त यही लगता था कि पत्नी और बेटी में किसी भी वक्त हाथापाई हो सकती है। आश्रम के कर्मचारी और नौकर-नौकरानी भी गृह कलह से सहमे-सहमे रहते थे।

घर अस्त-व्यस्त देख पत्नी से उनकी बहस हुई

कुहू पुणे से मंगलवार को ही इंदौर आई थी। बेटी के कमरे को अस्त-व्यस्त देख पत्नी से उनकी बहस हुई थी। नौकरों को भी इस बात पर उन्होंने डांटा था। कुछ महिला अनुयायी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा वे प्रॉपर्टी के विवाद और पारिवारिक कलह को लेकर तनाव में थे। भय्यू महाराज का सूर्योदय आश्रम के नाम से एक एनजीओ चलता है, जो नर्मदा नदी के आसपास विकास कार्य करता है। कई ग्रामीणों के लिए इनके एनजीओ ने एक हजार से ज्यादा तालाब और पानी की टंकियों की व्यवस्था करवाई थी।

 

8 जून : पत्नी के जन्मदिन पर चारों ओर खुशियां, लेकिन चेहरे पर तनाव 
इक तस्वीर 8 जून की है, जब भय्यू महाराज ने रात में बायपास स्थित रेस्तरां आर-9 में पत्नी डॉ. आयुषी का जन्मदिन मनाया। इस कार्यक्रम में बेटी कुहू को छोड़ आश्रम के सभी लोग और परिजन शामिल हुए। उन्होंने मेहमानों की अगवानी भी की।

10 जून : बेटी से मिलने जा रहे थे, रास्ते से लौटे
भय्यू महाराज अपनी बेटी कुहू से मिलने के लिए पुणे रवाना हुए थे। हालांकि बीच रास्ते से ही लौट आए। दोपहर में बापट चौराहा स्थित अपने आश्रम पहुंचे और सीधे अपने कक्ष में चले गए। कुछ करीबी लोगों से मिले, लेकिन भक्तों से नहीं मिले। शाम तक आश्रम में ही रहे। आश्रम से जुड़े लोगों की मानें तो महाराज कुछ उदास और परेशान थे।
और आज : बेटी के रूम को लेकर पत्नी से बहस
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे भय्यू महाराज बेटी कुहू के कमरे में पहुंचे तो वह अस्त-व्यस्त मिला। पत्नी को बोला कि कुहू आने वाली है। इसे व्यवस्थित क्यों नहीं रखते हो? इसे लेकर दोनों के बीच बहस भी हुई। इसके बाद खड़े होकर नौकरों से कमरा व्यवस्थित कराया। काम पूरा होने तक वहीं खड़े रहे।

11 जून : रेस्तरां में घंटेभर बैठे, एडमिशन के लिए मिली महिला  बेटी कुहू पुणे से मंगलवार को आने वाली थी। वे इससे खुश थे, लेकिन चेहरे पर तनाव भी था। वह दोपहर साढ़े तीन बजे राऊ स्थित अपना स्वीट्स रेस्तरां पहुंचे। वहां एक घंटे रुके और एक महिला से बातचीत की। इसके बाद चले गए। दोनों अलग-अलग गाड़ियों से आए थे। बताया जा रहा है कि वह महिला किसी शिक्षण संस्थान में दाख़िले के लिए भय्यू महाराज से मिलने आई थी।

अाखिरी लम्हा… पत्नी की जुबानी 
उन्हें देख मेरा गला ही सूख गया
– जैसा पत्नी डॉ. आयुषी ने अस्पताल में करीबी लोगा को बताया  गु रुजी रोज की तरह उठे। योगा किया। पूजा-पाठ करने के बाद मुझसे कहा- आज कटहल की सब्जी खाने की इच्छा है। मैं कॉलेज जाने से पहले बोलकर गई थी, खाना खा लेना। वापस आई तो पहले बच्ची को खिलाया। इसके बाद मैंने नौकरों से पूछा- गुरुजी कहां हैं। नौकर बोले- किसी कमरे में हैं। मैंने कई कमरों में जाकर देखा। गुरुजी नहीं दिखे। थोड़ी चिंता हुुई। बाथरूम तक में जाकर देख लिया। फिर ज्यादातर बंद रहने वाले एक कमरे में जाकर देखा। दरवाजा अंदर से बंद था। खटखटाया। कोई हलचल नहीं। मैंने जोर से आवाज लगाकर नौकरों को बुलाया। नौकर दौड़ते हुए आए। मैंने कहा- दरवाजा तोड़ दो। दरवाजा तीन से चार झटके में टूटा। महाराज आंखें फेरे हुए पड़े थे। चारों तरफ खून फैला हुआ था। मेरा तो जैसे गला ही सूख गया। आवाज बंद पड़ गई। गाड़ी में रखकर उन्हें अस्पताल की ओर भागे। घटना के बाद डॉ. आयुषी बदहवास… रोती… चीखती हुई अस्पताल पहुंची। लोगों से पूछा गुरुजी कहां, कहां रखा है उनको। चेहरे पर तनाव था, लेकिन आंसू एक भी नहीं। जैसे ही उन्हें बताया कि आईसीयू में हैं। आयुषी दो-दो सीढ़ी एक साथ चढ़कर आईसीयू की ओर भागीं। उनकी ऐसी हालत देखकर वहां मौजूद रिश्तेदार, शिष्य भी बिलख पड़े। डॉ. आयुषी अस्पताल में रोते, बिलखते हुए कहती रहीं एक भी दिन गुरुजी ने मुझसे नहीं कहा कि कोई तनाव है। मुझे गुरुजी की ऐसी आदत हो गई थी कि हम एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हर घंटे में मैं उनको फोन लगाती थी या वो मुझे मोबाइल लगाकर हाल जान लेते थे। हम कई मिनटों तक बातें किया करते थे। अब मुझे फोन कौन लगाएगा? सब लोग तो गुरुजी से मिलने घर आते थे। अब हमारे घर कौन आएगा? दो घंटे हो गए। उनका फोन ही नहीं आया।‘मैं बहुत तनाव में हूं। थक चुका हूं
‘पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने के लिए यहां कोई होना चाहिए’, ‘मैं बहुत तनाव में हूं। थक चुका हूं, इसलिए जा रहा हूं। विनायक मेरा विश्वासपात्र है। सब प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट वही संभाले। किसी को तो परिवार की ड्यूटी करनी जरूरी है तो वही करेगा। मुझे उस पर विश्वास है। मैं कमरे में अकेला हूं और सुसाइड नोट लिख रहा हूं। किसी के दबाव में आकर नहीं लिख रहा हूं। कोई इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।’

कुहू करीब तीन महीने बाद मंगलवार को इंदौर लौटी थी। वह सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंची और पिता को देखा। पिता को खून से सना देख बदहवास हो गई। दोपहर में वह गुस्से में घर (सिल्वर स्प्रिंग) पहुंची और डॉ. आयुषी की तस्वीरों को फोड़ना शुरू कर दिया। उनके साथ मौजूद कांग्रेस की महिला नेता ने उसे संभाला और कमरे में लेकर गई। मां और बेटी में मारपीट न हो, इसके लिए दोनों को अलग रखा और उनके कमरों के बाहर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा।

बेटी कुहू और पत्नी आयुषी ने पुलिस को बताया-
मैं उन्हें (डॉ. आयुषी को) अपनी मां नहीं मानती। उन्हीं के कारण पिता ने यह कदम उठाया। उन्हें जेल में बंद कर दीजिए। -कुहू
डॉ. आयुषी के कारण ही पिता ने यह कदम उठाया, इन्हें जेल में बंद कर दीजिए
कुहू को मैं और मेरी बेटी पसंद नहीं थी। इसलिए बेटी के जन्म के बाद ही मैं अपनी मां के घर रहने चली गई थी, क्योंकि कुहू यहां रहने वाली थी। कुहू के पुणे जाने के बाद कुछ दिन पहले ही मैं इंदौर आई थी और हम दोनों (भय्यू महाराज और वह) अच्छे से रह रहे थे। -डॉ. आयुषी
विवाद में डरते-सहम जाते थे : नौकर
हर बात पर वे पत्नी से ज्यादा बेटी का पक्ष लेते थे। इसी पर दोनों में विवाद भी होते थे। इस दौरान वह डरकर सहम जाते थे।

 तक का सफर…
मूल रूप से शुजालपुर के रहने वाले थेे। 29 अप्रैल 1968 को जमींदार परिवार में जन्मे। नाम उदयसिंह देशमुख। 90 के दशक में प्रॉपर्टी का क्रय-विक्रय भी किया। मुंबई की एक कंपनी में काम किया। फिर सियाराम सूटिंग के लिए विज्ञापन भी किया। मॉडलिंग का भी शौक था।
1996 में सुखलिया स्थित सूर्योदय आश्रम की स्थापना की।
1999 में विधिवत श्रीसद्गुरु पारमार्थिक ट्रस्ट का गठन किया।
2003 से धर्म के साथ समाजसेवा शुरू की।
प्रॉपर्टी को लेकर भी विवाद आ रहा सामने, जिससे भी वह तनाव में थे
मौत की खबर मिली तो अनुयायियों को यकीन नहीं हुआ। जैसे ही पता चला कि वे बॉम्बे अस्पताल में हैं, वहां पहुंच गए।
देशभर में जन्मे अनाथ बच्चों को दे गए अपना नाम
भय्यू महाराज से जुड़ी आखिरी यादें…
सबसे बड़ी घोषणा…
भय्यू महाराज ने दत्त जयंती के अवसर पर पर्यावरण महायज्ञ कराया था। इसमें घोषणा की थी कि देशभर के ऐसे बच्चे जो अनाथ हैं, ऐसी माताएं जिनके साथ ज्यादती हुई और संतान को मजबूरी में जन्म दिया, उन सबको मैं अपना नाम देता हूं। किसी भी संस्थान में पिता के नाम की जरूरत हो तो ऐसे बच्चे मेरेे नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
आखिरी भेंट… आश्रम में कुछ खास लोगों से
रविवार दोपहर डेढ़ बजे आश्रम पहुंचे। गार्ड से मिले। सीधे अपनी गादी पर बैठे। रात तक बैठे रहे। इस दौरान कुछ खास लोगों से ही मिले। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि उस दिन उनकी मुद्रा कुछ अलग ही थी।
भाजपा की वजह से आत्महत्या : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी माणक अग्रवाल ने कहा भाजपा मंत्री पद लेने का दबाव बना रही थी, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। सीबीआई जांच होना चाहिए।
आखिरी कार्यक्रम…
हाल ही में जाति के नाम पर देश के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा के बाद इसे खत्म करने के लिए हमसाज नामक आयोजन कराया था। सभी धर्मों के गुरुओं को एक मंच पर भय्यू महाराज लाए थे। वे कार्यक्रम के संरक्षक थे। इसमें किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, साध्वी प्रज्ञा भारती भी आई थीं।
जब शुजालपुर आए थे तो कहकर गए थे, जल्द ही रहने आऊंगा…
शुजालपुर शहर के सिटी क्षेत्र में जन्मे भय्यू महाराज पैतृक निवास को दोबारा बनवा रहे थे। वे जून में ही मां और परिवार के साथ यहां शिफ्ट होने वाले थे। वे अपना अधिकांश समय इसी मकान में बिताने के इच्छुक थे। करीबियों के अनुसार तनावमुक्त जीवन व्यतीत करने के साथ ही किसानों के लिए सुविधाएं व संसाधन जुटाने की योजना पर भी वे काम कर रहे थे। भय्यू महाराज को बचपन में गोद में खिलाने वाली उनके मकान के सामने निवासरत पदमादेवी चौधरी ने बताया पिछली बार जब भय्यू महाराज पैतृक घर आए थे तो वादा करके गए थे कि वे जल्द यहां आकर लंबी अवधि तक रुकेंगे। पुराने साथी रहे रेवती रमण ने बताया उन्हें म्यूजिक बहुत पसंद था। उनके घर 2 हजार से ऑडियो कैसेट का रिकॉर्ड है।
तनावमुक्ति के लिए पैतृक घर जाने वाले थे, वहीं पर लंबे समय रुकने का था इरादा
दिखाई उदारता… हमला करने वालों को माफ किया
पिछले साल पुणे से इंदौर आते वक्त उन पर हमला भी हुआ था। पुलिस ने आरोपी पकड़ भी लिए थे, लेकिन भय्यू महाराज ने उन्हें माफ कर दिया था।
राजनीति में दखल… बड़े नेताओं से मेल-मुलाकात
दत्त जयंती और गुरु पूर्णिमा दो ऐसे आयोजन थे जिसमें देशभर के नेता आते थे। महाराष्ट्र के भाजपा, कांग्रेस नेताओं में उनका अच्छा प्रभाव था। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, भारत रत्न लता मंगेशकर, देवेंद्र फडनवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सुशील कुमार शिंदे उनके बेहत करीबी थे।
1.45 पर मौत की पुष्टि 1.57 पर आखिरी ट्वीट
भय्यू महाराज के अधिकृत ट्विटर अकाउंट से मंगलवार दोपहर 1 .57 बजे आखिरी ट्वीट हुआ। इसमें मास शिवरात्रि की बधाई दी। 1 .46 मिनट पर गोपीनाथ कविराज की पुष्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। 12.13 बजे नरेंद्रसिंह तोमर को जन्मदिन पर बधाई दी। ट्विटर अकाउंट स्टाफ द्वारा संचालित किया जाता है।
रात तक मां को नहीं दी मौत की जानकारी
भय्यू महाराज की मौत की जानकारी उनकी मां कुमुदिनी देशमुख को देर रात तक नहीं दी गई थी। वहीं, घटना के बाद शाम करीब चार बजे भय्यू महाराज की सास रश्मि शर्मा उनके घर पहुंचीं, तब उन्हें घटना के बारे में पता चला।
लग्जरी लाइफ स्टाइल… रफ्तार के थे शौकीन
भय्यू महाराज लग्जरी कारों के शौकीन थे। हाल ही में उन्होंने मस्टेंग कार खरीदी थी। अलसुबह बायपास पर वह रफ्तार से कार चलाते हुए देखे जाते थे। एक बार मुंबई तक वह खुद कार चलाकर गए थे। साढ़े 7 घंटे में पहुंच गए थे।
भय्यू महाराज हमेशा रोलेक्स की घड़ी पहनते थे। खुद को संवार कर रखने का भी शौक था। चेहरे का भी खास ध्यान रखते थे। आम जनता से मिलने से पहले वह ड्रेसिंग रूम में करीब तीन घंटे बिताते थे। जनता के बीच वह सफेद कुर्ते, पायजामा में आते थे, लेकिन किसी पार्टी या निजी समारोह में जाना हो तो सूट-बूट में नजर आते थे।
लोगों को जीने की राह दिखाते थे, खुद हारे जिंदगी से | सुबह पत्नी से मनपसंद सब्जी बनवाई, दोपहर में बेटी के कमरे में खुद को मार ली गोली

 

जब चर्चा में आए… 7 साल पहले अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाया, मोदी का उपवास खुलवाया
2011 में अन्ना हजारे का अनशन समाप्त कराने के लिए यूपीए सरकार ने भय्यू महाराज की मदद ली थी। उन्हें अन्ना के मंच पर भेजकर आंदोलन खत्म कराने की बात कही थी। भय्यू महाराज ने हजारे को जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया था। सितंबर 2011 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब उपवास खुलवाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था।
जब विवादों में रहे… लगाया सम्मोहित करने का आरोप 

खुद को अभिनेत्री बताने वाली मल्लिका राजपूत नामक लड़की ने भी भय्यू महाराज पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने सम्मोहित कर रखा है। मल्लिका ने सोशल मीडिया पर भय्यू महाराज के साथ कुुछ फोटो भी शेयर किए थे। भय्यू महाराज पर किताब लिखना और 950 प्रति बिकना भी उसने कहा था।
जब चौंकाया… पत्नी माधवी के निधन के 2 साल बाद आयुषी से दूसरी शादी की घोषणा
पहली पत्नी माधवी का नवंबर 2015 में पुणे में निधन हो गया था। वे महाराष्ट्र के औरंगाबाद की रहने वाली थीं। दो साल बाद ही उन्होंने दूसरी शादी की घोषणा कर सबको चौंका दिया था। भय्यू महाराज ने 30 अप्रैल 2017 को मध्यप्रदेश के शिवपुरी की डॉ. आयुषी के साथ दूसरी शादी की।
जब सरकार से नाराजी… राज्यमंत्री का दर्जा ठुकराया
प्रदेश में नर्मदा किनारे छह करोड़ के पौधे सरकार ने लगाए थे। इस पौधारोपण की पोल खोलने के लिए गुरुजी सहित पांच बाबा ने प्रदेश में अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के कुछ समय बाद ही सरकार ने विरोध करने वाले पांचों बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया था। भय्यू महाराज ने मंत्री पद भी लेने से इनकार कर दिया था। इसी तरह इंदौर में धम्म-धर्म सम्मेलन राज्य सरकार ने कराया था। लेकिन सरकार ने गुरुजी को तवज्जो नहीं दी थी। इससे वह बहुत नाराज थे। उन्होंने आयोजन का पैसा किसान और जरूरतमंद को देने की बात कही थी।

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