सिविल सर्विसेज परीक्षा के मेधावियों को कामयाबी

यूपीएससी ने सिविल सर्विसेज एग्जाम-2017 के नतीजे घोषित कर दिए। हैदराबाद के अनुदीप दुरिशेट्‌टी ने टॉप किया है। दूसरे स्थान पर अनु कुमारी और तीसरे पर सचिन गुप्ता रहे। टॉप 10 में दो महिलाएं हैं। टॉप करने वाले अनुदीप ओबीसी श्रेणी से हैं। पिछले साल की टॉपर रही नंदनी केआर भी ओबीसी कैटेगरी से ही थीं। अनुदीप अभी आईआरएस में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वह गूगल में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 2011 में बिट्स पिलानी से ग्रेजुएशन किया था। 2013 के एग्जाम उनकी 790वीं रैंक आई थी। नरसिंहपुर की तपस्या परिहार को 23वीं रैंक मिली। वहीं ग्वालियर के आशुतोष श्रीवास्तव की 421वीं एवं आदित्य त्रिपाठी को 452वीं रैंक मिली है।यूपीएससी जारी नतीजों में कुल 990 उम्मीदवार सफल रहे। इसमें 476 उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के हैं, 275 ओबीसी, 165 एससी और 74 एसटी श्रेणी के हैं। इनमें से 180 उम्मीदवारों का चयन आईएएस के लिए हुआ है। उल्लेखनीय है कि यूपीएससी मेन्स की परीक्षा 28 अक्टूबर, 2017 को हुई थी।

 ये हैं सिविल सर्विसेज परीक्षा के 4 टॉपर्स

देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली सिविल सर्विसेज परीक्षा, 2017 (UPSC) का अंतिम परिणाम के अनुसार हैदराबाद में रहने वाले अनुदीप डुरीशेट्टी ने टॉप किया है। हरियाणा से अनु कुमारी ने दूसरा स्थान हासिल किया। सबसे अलग बात कि तीसरा स्थान पाने वाले सचिन गुप्ता भी हरियाणा से हैं। अनु और सचिन के साथ हरियाणा के करीब सात परीक्षार्थियों ने प्रदेश का नाम चमकाया है हरियाणा के दो सीनियर आईएएस अधिकारियों के बेटा-बेटी ने आईएएस मेरिट में स्थान बनाया है। इनमें विक्रमादित्य सिंह की आईएएस में 48 वीं रेंक बनी है। उनके पिता वाई एस मलिक, रोड ट्रांसपोर्ट विभाग नई दिल्ली में सचिव है। दूसरी श्रुति अरोडा है। उनकी 118 वीं रेंक बनी है। उनकी मां केसनी आनंद अरोडा हरियाणा में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत है। बिहार के अतुल ने चौथा स्थान हासिल किया है। आपको बताते हैं कैसा रहा इन चारों टॉपर्स का सफर।

टॉपर अनुदीप डुरीशेट्टी
टॉपर अनुदीप डुरीशेट्टी इससे पहले भी इस परीक्षा में सफल हो चुके थे और फिलहाल हैदराबाद में इंडियन रेवेन्यू सर्विस में काम कर रहे थे। बिट्स पिलानी से ग्रेजुएट अनुदीप गूगल में भी काम कर चुके हैं। डुरीशेट्टी अनुदीप ने एंथ्रोपोलॉजी विषय के साथ परीक्षा दी थी। रिजल्ट के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह इस सफलता से काफी खुश हैं और इस सफर में उनका साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं।

अनु कुमारी, सेकंड टॉपर
दूसरे नंबर पर आने वाली अनु कुमारी हरियाणा के सोनीपत की हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में बीएसएसी करने के बाद आईएमटी नागपुर से एमबीए की पढ़ाई की है। मूल रूप से पानीपत के गांव दिवाना के रहने वाले बलजीत सिंह की बेटी अनु कुमारी का यह दूसरा प्रयास था। अनु ने बताया कि वह पिछले 9 सालों से प्राइवेट जॉब कर रही थी, इसी बीच शादी हो गई, बेटा भी हो गया। यूपीएससी की तैयारी करने के लिये अनु ने अपने बेटे को डेढ़ साल तक खुद से दूर अपने माता-पिता के पास भेज दिया था। समाज के लिये कुछ कर गुजरने का जुनून लेकर पढ़ाई करने वाली अनु खुद पुरखास गांव में अपनी मौसी के पास रहीं।

सचिन गुप्ता, तीसरा स्थान 
तीसरा स्थान पाने वाले सचिन गुप्ता भी हरियाणा के हैं। उन्होंने पटियाला के थापर यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई की है। इंजिनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी की लेकिन वह सिविल सेवा में आना चाहते थे। उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया और अब नतीजा सबके सामने है।

अतुल प्रकाश को चौथा स्थान
यूपीएससी 2017 की परीक्षा में चौथा स्थान बिहार के अतुल प्रकाश ने हासिल किया है। उनके पिता रेलवे में इंजिनियर हैं और अतुल की पढ़ाई विभिन्न रेलवे स्कूलों में हुई। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अतुल का सिलेक्शन आईआईटी में हो गया और उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजिनियरिंग की। हालांकि वह आईएएस बनना चाहते थे और अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने इस कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर लिया।

यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की ओर से जारी परिणाम के अनुसार कुल 990 स्टूडेंट्स सफल हुए जिनमें जनरल कैटिगरी के 476, ओबीसी कैटिगरी के 275, एससी के 165 और एसटी के 74 स्टूडेंट पास हुए हैं। टॉपर ओबीसी कैटिगरी के हैं। यह लगातार दूसरा मौका है, जब टॉपर इस कैटिगरी के हैं। इन 990 में 180 आईएएस के लिए चुने जाएंगे। बाकी इंडियन पुलिस सर्विस, इंडियन फॉरेन सर्विस के अलावा दूसरी ग्रेड ए सर्विस में चुने जाएंगे। इस बार सिविल सर्विसेज परीक्षा में टॉप पोजिशन पाने वालों के बीच नया ट्रेंड यह दिखा कि किसी एक विषय या जगह ने इसमें दबदबा नहीं बनाया।

किसान की बेटी बनी IAS

सिविल सर्विसेज में सलेक्ट होना हर युवा प्रतिभागी का सपना होता है। इस सपने को शहर के युवा भी कड़ी मेहनत से पूरा कर रहे हैं। यूपीएससी और एमपीपीएससी में सिलेक्शन के लिए युवा सालों तक प्रिपरेशन करते हैं। हालांकि यूपीएससी में मप्र का सिलेक्शन परसेंटेज न के बराबर है। हर साल यूपीएससी में महज पांच से सात सिलेक्शन होते हैं। औसत देखा जाए तो 0.5 प्रतिशत सिलेक्शन हो रहे हैं। 2008 के बाद से हिन्दी मीडियम स्टूडेंट्स के लिए इस एग्जाम को क्रेक करना सपना ही हो गया है।

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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की तपस्या परिहार की देश में 23वीं रैंक बनी है. माना जा रहा है कि एमपी के जो कैंडिडेट सिलेक्ट हुए हैं, उनमें वे टॉप पर हैं.तपस्या के पिता विश्वास परिहार मूल रूप से किसान हैं. तपस्या ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय का हकदार उनका संयुक्त परिवार है. उनके चाचा विनायक परिहार जो कि सामाजिक कार्यकर्ता हैं ने उन्हें सर्वाधिक प्रोत्साहित किया. तपस्या की दादी देवकुंवर परिहार नरसिंहपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष रही हैं. तपस्या का विषय लॉ था. उन्होंने कानून की पढ़ाई पुणे के लॉ कॉलेज से की है.

यूपीएससी में 421वीं रैंक पर चयनित हुए आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि जनवरी 2017 में हरदा में डीएसपी पद के लिए उनकी ज्वाॅनिंग हुई थी। यह उनका दूसरा अटैंप्ट था। जॉब के दौरान उन्हें 15 से 16 घंटे की ड्यूटी करनी होती थी।ऐसे में वे रोजाना पढ़ाई के लिए पांच घंटे ही देते थे। इसके अलावा रविवार को पूरे 15 घंटे तैयारी करते थे। उन्होंने बताया कि सेल्फ स्टडी करके भी यूपीएससी जैसी सेवा में सफलता हासिल कर सकते हैं।यूपीएससी सिविल सर्विसेज में ऑल इंडिया 452 रैंक पाने वाले आदित्य त्रिपाठी पेशे से सिविल इंजीनियर हैं।उन्होंने दिल्ली में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सिविल सर्विसेज की तैयारी की और 23 वर्ष की उम्र में सेलेक्ट हो गए। उनका कहना है कि यह वहम है कि सिविल सर्विसेज में सफलता के लिए 15 से 16 घंटे पढ़ना जरूरी है। मैंने तो रोजाना 8 घंटे पढ़ाई करता था।

गुना। की ज्येष्ठा मैत्री का आईएएस बनी

गुना। की रहने वालीं और वर्तमान में मुरेना में पदस्थ प्रोवेशनर डीएसपी ज्येष्ठा मैत्री का आईएएस के लिए चयन हो गया है। उनकी 156 रैंक आई है। वह मूलत: गुना की रहने वाली हैं। लेकिन वर्तमान में उनकी पोस्टिंग मुरैना में ही थी। 2016 में बनी थी डीएसपी ज्येष्ठा ने बताया कि जून 2016 में मेरा डीएसपी के लिए चयन हुआ था। छह माह की ट्रेनिंग के बाद प्रोवेशनर के लिए मेरी पहली पोस्टिंग मुरैना में जनवरी 2017 में हुई। ज्येष्ठा के पिता गिरीश चंद आर्य एमपीईबी में कार्यरत है और मां मंजू प्राचार्य हैं

छत्तीसगढ़ से पांच मेधावियों को कामयाबी

यूपीएससी में इस बार छत्तीसगढ़ से पांच मेधावियों ने कामयाबी पाई है। इनमें राजधानी रायपुर के देवेश ध्रुव, सूरजपुर के उमेश गुप्ता, भिलाई की बेटी अंकिता शर्मा और बिलासपुर के वर्णित नेगी शामिल हैं।यपुर के पचपेड़ी नाका स्थित आम्रपाली सोसायटी में रहने वाले देवेश कुमार ध्रुव को यूपीएससी में 47वां रैंक मिला है। देवेश आईआईटी खड़गपुर से 2012 के पासआउट हैं। देवेश ने बताया कि उन्हें पांचवें अटैम्प्ट में ये सफलता मिली है। शुरुआत में दो बार उन्होंने कुछ विषयों के लिए कोचिंग ली। इसके बाद तीन बार सेल्फ स्टडी की और एग्जाम की तैयारी की। इस दौरान उन्हें फैमिली का पूरा सपोर्ट मिला। देवेश का कहना है उन्हें आईएएस मिलने की संभावना है। देवेश के पिता तोरलाल ध्रुव और माता पद्‌मावती ध्रुव हैं। उनकी दो बहनें लीना और अंजलि ध्रुव डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहीं हैं।

कलेक्टर ने कहा था, यूपीएससी क्रैक करो…
यूपीएससी क्रैक करने वाले उमेश कुमार गुप्ता को जो रैंक मिली है उससे वे आईपीएस बन सकते हैं। लेकिप उनकी पसंद आईआरएस है। सरगुजा के छोटे से गांव मानपुर के रहने वाले उमेश को यूपीएससी में 179 वीं रैंक मिली है। उनका कहना है कि कोई भी परीक्षा हो, सफलता नहीं बल्कि खुद का परिश्रम ही इकलौता रास्ता है। प्रारंभिक पढ़ाई मानपुर में करने के बाद उमेश ने बारहवीं अंबिकापुर से पास की। तब तत्कालीन कलेक्टर सरगुजा रोहित यादव से मुलाकात हुई। उन्होंने ही यूपीएससी की राह सुझाई। उनके पिता रामसेवक गुप्ता एसईसीएल में पंप ऑपरेटर हैं, मां गृहिणी हैं। उमेश ने 2017 में जून में प्रीलिम्स दिया था। अक्टूबर में मेन्स उमेश ने आईआईटी बीएचयू से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की और कोल इंडिया में कैंपस सलेक्शन भी हुआ। इसके बाद यूपीएससी में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग सर्विस की परीक्षा दी और रेलवे में सलेक्शन हो गया। और इसी 13 अप्रैल को इंटरव्यू दिया।

कृषक पिता की बेटी अंकिता को 203 वीं रैंक
दुर्ग के विद्युत नगर में रहकर अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल से ग्रहण करने वाली 27 वर्षीय अंकिता शर्मा शुक्ला का सलेक्शन यूपीएससी में हुआ है। उनका 203वां रैंक लगा है। अंकिता के पिता राकेश शर्मा मूल रूप से कृषक हैं। अंकिता पिछले करीब 1 साल से दिल्ली में रहकर यूपीएससी में सलेक्शन के लिए पढ़ाई कर रही थी। परिणाम की घोषणा के बाद उनके पिता ने  इसकी जानकारी दी। अंकिता के पति विवेकानंद शुक्ला आर्मी में कैप्टन हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग जम्मू के अखनूर में हैं। विवेकानंद शुक्ला का परिवार सेक्टर-7 भिलाई में निवास करता है।

अंकिता के पिता राकेश शर्मा ने बताया कि अंकिता शुरू से ही पढ़ने में तेज थी। दुर्ग में रहकर 12 वीं तक पढ़ाई करने के बाद उसने शंकराचार्य कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई की। उसके बाद से उसने केवल एक लक्ष्य बनाकर यूपीएससी की तैयारी की। रोजाना 8 से 12 घंटे तक केवल वह पढ़ती थी। शादी के बाद भी उसका लक्ष्य को लेकर यह जुनून बरकरार रहा। अंकिता की छोटी बहन निकिता सीए की तैयारी कर रही, वहीं उससे छोटी युक्ति इस वर्ष बीकॉम फाइनल में है। राकेश शर्मा पिछले कुछ समय से राजनीति से जुड़े हुए हैं ।

पॉवरग्रिड में काम करते एग्जाम की तैयारी की
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सर्विस परीक्षा 2017 का परिणाम घोषित कर दिया है। जून महीने में हुई इस परीक्षा में शहर के वर्णित नेगी ने 504 रैंक हासिल किया है। वर्णित ने यह रैंक दूसरे अटेंप्ट में हासिल किया है। नेहरू नगर के वर्णित ने कर्नाटक सूरत से बीटेक किया। वहीं से उनका प्लेसमेंट पावरग्रिड कंपनी में हो गया। डेढ़ साल नौकरी करने के बाद वर्णित ने यूपीएससी की तैयारी करनी शुरू की। वर्णित 2016 में नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले अटेंप्ट में इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाए थे। वर्णित के पिता प्राचार्य बीएन नेगी और माता तखतपुर कॉलेज में असि. प्रोफेसर डॉ. सीमा नेगी हैं।

राजस्थान की 20 से ज्यादा प्रतिभाओं

ने ऑल इंडिया रैंक हासिल की

राजस्थान की 20 से ज्यादा प्रतिभाओं ने ऑल इंडिया रैंक हासिल की है। नागौर जिले से दो का चयन आईएएस में हुआ है। आईएएस के लिए चयनित होने वाली प्रतिभाओं में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समधी डीडवाना निवासी कमलेश कुमार पंवार की बेटी गरिमा पंवार ने इस परीक्षा में 212वीं रैंक हासिल की है। वहीं मेड़ता रोड निवासी राहुल भाटी को 554वीं रैक मिली है।राहुल वर्तमान में उप निदेशक भारतीय ऊर्जा नियामक विभाग दिल्ली में कार्यरत है।गरिमा बताती हैं कि उसने आईएएस परीक्षा की तैयारी जयपुर व डीडवाना में की। इसके लिए उसके पिता कमलेश कुमार और माता नंदूश्री पंवार का पूरा सहयोग रहा। गरिमा ने बताया कि उसका और परिजनों का दोनों का ही सपना था कि वह आईएएस बने। गरिमा ने बताया कि उनकी इस कामयाबी में उनके भाई का बड़ा योगदान रहा है। वे बताती हैं कि लंबे समय तक उनके भाई ने बीमारी के दौरान जीवन के लिए कड़ा संघर्ष किया था। तब उनके जीवन को करीब से देखा तो लगा कि वह अपनी जिंदगी के लिए कड़ा मुकाबला कर सकते है तो वह अपने जीवन में खुद के लिए तो संघर्ष कर ही सकती है। मेड़ता रोड कस्बे के माली मोहल्ला निवासी उम्मेदसिंह भाटी प्राध्यापक राउमावि मेड़ता रोड के 26 वर्षीय पुत्र राहुल भाटी का पूर्व में आईईएस में चयन होने के बाद वर्तमान में दिल्ली में भारतीय ऊर्जा नियामक विभाग में उप निदेशक पद पर कार्यरत है। पूर्व में गत माह ही आईएफएस में भी चयन हुआ था। अब आईएएस में 554वीं रैक प्राप्त हुई है। चयन होने पर मेड़ता रोड में खुशी की लहर छा गई। राहुल भाटी के परिजनों ने बताया कि वह शुरू से ही प्रतिभावान विद्यार्थी रहा। उसने तय रखा था कि वह आईएएस बनेगा। राहुल भाटी के पिता मेड़ता रोड सीनियर बॉयज स्कूल में ही प्राध्यापक है। माता सूरज देवी भाटी गृहिणी है। भाटी ने मेड़ता रोड में ही सीनियर तक की शिक्षा सरकारी स्कूल में ही ग्रहण की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई जोधपुर से करने के बाद जुलाई 2013 में दिल्ली में मेट्रो में चयन होने के बाद 7 माह तक नौकरी करने के बाद इस्तीफा दे दिया था। 2015 में आईईएस में चयन हुआ।

जक़ात से 26 मुस्लिम युवा

बने आईएएस आईपीएस

नासिर हुसैन

जहां चाहा हो तो राह अपने आप बन ही जाती है. ऐसा ही कुछ साबित किया है जक़ात फाउंडेशन ऑफ इण्डिया ने. यूपीएससी के फाइनल रिजल्ट में 26 उन मुस्लिम युवाओं के नाम शामिल हुए हैं जिन्होंने जक़ात फाउंडेशन की मदद से कोचिंग कर यूपीएससी की तैयारी की थी. पिछले साल की तुलना में इस बार 10 बच्चे ज्यादा चुने गए हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि जक़ात फाउंडेशन जक़ात (दान) के पैसों से चलता है.
इस साल जक़ात की मदद से आईएएस और आईपीएस बनने वाले युवाओं में सबसे अधिक यूपी और केरल से 9-9 युवा हैं. जबकि जम्मू-कश्मीर से तीन और महाराष्ट्र-बिहार से 2-2 युवा हैं. पिछले साल के मुकाबले इस बार लड़कियों की संख्या कम है. पिछले साल जहां 4 लड़कियों ने जक़ात की मदद से ये परीक्षा पास की थी तो इस बार ये संख्या सिर्फ 2 है. लेकिन सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारियों के लिए जक़ात फाउंडेशन की मदद पाना आसान नहीं है.जक़ात की मदद पाने के लिए पहले सिविल सर्विस प्री परीक्षा स्तर की परीक्षा पास करनी होती है. उसके बाद इंटरव्यू भी पास करना होता है. इस परीक्षा का आयोजन जक़ात फाउंडेशन ही करता है. तो जक़ात फाउंडेशन की मदद पाने का क्या है तरीका और कैसे तैयारी कराती है युवाओं को. आइए जानते हैं खुद जक़ात फाउंडेशन के अध्यक्ष डाक्टर सैय्यद जफर महमूद से. जो खुद भी सिविल सर्विस से रिटायर्ड हैं.ऑल इण्डिया लेवल पर होती है परीक्षा और इंटरव्यूजफर महमूद बताते हैं कि आमतौर पर अप्रैल के आखिरी रविवार को हम राष्ट्रीय स्तर पर लिखित परीक्षा कराते हैं. ये परीक्षा दिल्ली में होती है. तीन सेंटर श्रीनगर, मल्लापुरम (केरल) और कोलकाता में हम खुद जाकर परीक्षा लेते हैं.लिखित परीक्षा का पेपर सिविल सर्विस की प्री परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के स्तर का होता है. परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों का सिविल सर्विस के रिटायर्ड और सर्विस कर रहे अधिकारियों का पैनल इंटरव्यू लेता है. लिखित परीक्षा के लिए नवंबर में आन लाइन आवेदन लिए जाते हैं.

लड़कियों के लिए सीट की नहीं है कोई सीमा

डॉ. जफर का कहना है कि एक बैच के लिए हम 50 लड़कों का चुनाव करते हैं. लेकिन लड़कियों के लिए सीट की कोई सीमा नहीं है. लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बाद चाहें जितनी लड़कियां कोचिंग के लिए आ सकती हैं. हालांकि अभी तक एक बैच में 10 से 12 लड़कियां आती हैं, जिसमें से तीन से पांच लड़कियां कामयाब हो रही हैं. जक़ात फाउंडेशन इस तरह कराती है परीक्षा की तैयारी

डॉ. जफर का कहना है कि दिल्ली में हमारे पास चार हॉस्टल हैं. सबसे पहले हम चुने गए लड़के-लड़कियों को दिल्ली की कुछ अलग-अलग कोचिंग में दाखिला दिलाते हैं. इसका खर्च जक़ात फाउंडेशन ही उठाती है. कोचिंग में पढ़ाई करने के बाद शुरू होती है जक़ात फाउंडेशन की पढ़ाई.
जक़ात फाउंडेशन इस तरह जुटाती है आर्थिक मदद

जक़ात फाउंडेशन एक एनजीओ है. ये पूरी तरह से दूसरे लोगों द्वारा की गई मदद से ही चलती है. मदद के रूप में जक़ात फाउंडेशन को नाम के अनुसार जक़ात, सदका, इमदाद और चैरेटी के रूप में पैसा मिलता है. इसी का इस्तेमाल जक़ात फाउंडेशन सर सैय्यद कोचिंग एण्ड गाइडेंस सेंटर फॉर सिविल सर्विस को चलाने में करती है.

कैसे पड़ी जक़ात फाउंडेशन की नींव

डॉ. जफर का कहना है कि वो जब एएमयू में पढ़ते थे वो खुद और उनके कई दोस्त सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते थे. लेकिन मदद करने वाला कोई कोचिंग सेंटर नहीं था. दूसरा ये कि मैं खुद भी सच्चर कमेटी में रहा था. रिपोर्ट में जो हाल मैंने देखा तो उसके बाद लगा कि वाकई सिविल सर्विस की तैयारी कराने के लिए इस तरह का कोई सेंटर होना जरूर चाहिए.

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