व्हीलचेयर पर बैठ छत्तीसगढ़ की बाजी पलटने में जुटा आईएएस

अजीत जोगी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद पहले भारतीय पुलिस सेवा और फिर भारतीय प्रशासनिक की नौकरी की। बाद में वे मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सुझाव पर राजनीति में आये और वे विधायक और सांसद दोनों रहे।अजीत जोगी राजनीति की शतरंज के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। जोगी की हर चाल के पीछे कुछ ऐसा छिपा होता है जिसका अनुमान राजनीतिक पंडित भी नहीं लगा पाते हैं।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों में से साल 2013 में बीजेपी को 49 और कांग्रेस को 39 सीटें मिली थीं. लेकिन, राज्य की स्थापना से लेकर 2018 तक के हर विधानसभा चुनाव में चर्चा का केंद्र बिंदु एक पूर्व आईएएस अफसर होता है. भारत ही नहीं इंग्लैंड तक के डॉक्टर कह चुके हैं कि वह कभी अपने पैरों पर चल नहीं पाएगा, लेकिन जब वह व्हीलचेयर के सहारे ही प्रदेश का दौरा करता है तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखती हैं. नंगे पैर स्कूल जाने वाला शख्स एक मिशनरी की सहायता से पढ़ता है और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल पाकर वहां पढ़ाने लगता है. फिर आईपीएस से होते हुए आईएएस बनता है और ये सफर सीएम की कुर्सी तक इंकलाब रहता है. जो कभी सोनिया गांधी का भाषण लिखने का किस्सा सुनाता है तो कभी सभाओं में यह कहने से नहीं हिचकता कि ‘हां मैं सपनों का सौदागर हूं और सपने बेचता हूं.’ हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के मुखिया अजीत जोगी की. अजीत जोगी राजनीति के वह खिलाड़ी हैं, जिनके जीतने और हारने की संभावना हमेशा बराबर की रहती है. कांग्रेस में जबतक रहे गांधी परिवार के इतर कोई उनके सामने टिक नहीं पाया. दुर्घटना के बाद शारीरिक कमजोरी के बाद जो विरोधी उन्हें चुका हुआ मान चुके थे, वह भी कभी उनकी ताकत के सामने टिक नहीं पाए. उनकी कूटनीति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह चुनाव में फायदा पाने के लिए विरोधी उम्मीदवार चंदूलाल साहू के नाम से 11 और उम्मीदवार मैदान में उतार सकते हैं. व्यक्तिगत जीवन में इतने कठोर कि बेटी के शव को इंदौर के कब्र से निकालकर अपने गांव में दफनाने का फैसला ले सकते हैं.

इस तरह आए राजीव गांधी से हुई करीबी
कहा जाता है कि वह जब कलेक्टर हुआ करते थे तभी से उन्होंने नेताओं से करीबी बनानी शुरू कर दी थी. रायपुर में रहते हुए उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस के शीर्ष नेता विद्याचरण शुक्ला और श्यामाचरण शुक्ला से नजदीकी बढ़ाई. इस बीच वह अर्जुन सिंह के भी करीब आ गए. कहा जाता है कि जिन दिनों वह रायपुर में कलेक्टर हुआ करते थे, उन दिनों राजीव गांधी इंडियन एयरलाइन्स में पायलट थे. वह रायपुर भी कभी-कभी जाते रहते थे. कहा जाता है कि उन दिनों अजीत जोगी के निर्देश थे कि जिस दिन राजीव गांधी आएं, उन्हें पहले से सूचना दे दी जाए. ऐसे में राजीव के आने पर वह अपने घर से नाश्ता लेकर वहां पहुंच जाते थे.

साल 1986 में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति का एक प्रत्याशी खोज रही थी. चूंकि अजीत जोगी अर्जुन सिंह को साधने में सफल हो चुके थे. ऐसे में अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह को कहा कि वह अजीत जोगी को लेकर राजीव गांधी के पास जाएं. जोगी को देखते ही राजीव ने कहा, मैं इन्हें जानता हूं. इन्हें प्रत्याशी बनाइए.

2.30 घंटे का ये भी किस्सा बड़ा फेमस है
कहा जाता है कि अजीत जोगी जब इंदौर के कलेक्टर थे तो एक दिन ग्रामीण इलाके के दौरे पर थे. देर रात घर लौटने पर पत्नी से मालूम चला कि पीएम दफ्तर से उनके लिए फोन आया है और राजीव गांधी बात करना चाहते हैं. रात करीब 9:30 बजे उन्होंने पीएम ऑफिस के नंबर पर फोन किया. उस समय राजीव गांधी के पीए रहे वी जॉर्ज ने फोन उठाया और कहा, पीएम आपसे बात करना चाहते हैं और आप गांव में घूम रहे हो. वह चाहते हैं कि आप इस्तीफा दे दें. जोगी ने कहा कि वह डेपुटेशन पर पीएम ऑफिस ज्वाइन कर सकते हैं, रिजाइन की क्या जरूरत है. इस पर जॉर्ज ने कहा कि पीएम चाहते हैं कि आप राज्यसभा के लिए मध्यप्रदेश से नामांकन भरें. उन्हें 2.30 घंटे का समय दिया गया और कहा गया कि दिग्विजय सिंह आपको लेने पहुंच रहे हैं. बीबीसी के एक आर्टिकल में भी इसका जिक्र मिलता है.

हादसा और अजीत जोगी
साल 2004 में एक चुनाव प्रचार के दौरान अजीत जोगी का एक्सीडेंट हो गया. उनके पैर में गंभीर चोटें आईं और वह चलने में बिल्कुल अक्षम हो गए. डॉक्टर ने लाख कोशिश की. इस दौरान इसकी भी खबरें आने लगी कि जोगी ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेंगे. ऐसी खबरों पर जोगी ने मुस्कुराते हुए कहा था, मुझे इच्छा मृत्यु का वरदान मिला है. 100 साल से पहले आप लोगों के बीच से जाने वाला नहीं हूं. जिस तरह इस हादसे के बावजूद राजनीति में उनकी सक्रियता है, वह उनकी जीवटता को ही दिखाता है.

बेटे पर लगे हैं आरोप
अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी भी राजनीति में सक्रिय हैं और विधायक हैं. साल 2000 में पिता के मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर एनसीपी के एक नेता की हत्या का आरोप लगा. इसके बाद वह लंबे समय तक जेल में रहे. उनके विरोधी यहां तक कहते हैं कि अमित, संजय गांधी की तरह हैं. कहा जाता है कि बाद के विधानसभा चुनावों में तो विपक्षी सिर्फ ये कह कर कि अजीत जोगी फिर से मुख्यमंत्री बन जाएंगे चुनाव जीत गए.

विवाद
अजीत जोगी की जाति को लेकर विवाद है. वह जिस परिवार से आते हैं वह अनुसूचित जाति में हैं. लेकिन जोगी के पास आदिवासी होने का सर्टिफिकेट है. विपक्ष के लोग आरोप लगाते हैं कि जोगी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर सर्टिफिकेट बनवाया है. उनका आरोप है कि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर ले तो उसका आरक्षण समाप्त हो जाता है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. जोगी पर यह भी आरोप लगता है कि वह रमन सिंह से मिले हुए हैं और कांग्रेस को हराने का काम करते हैं. साल 2013 में जिस नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व मारा गया, उसकी साजिश में जोगी का नाम भी आया. लेकिन, जोगी ने अपने ऊपर आरोप लगाने वाले सभी लोगों पर मानहानि का केस कर दिया है.

व्यक्तिगत जीवन
29 अप्रैल 1946 को जन्म अजीत प्रमोद कुमार जोगी ने काफी संघर्ष से मुकाम हासिल किया है. कई इंटरव्यू में वह खुद बताते हैं कि शुरुआती स्कूल के दिनों में जूते-चप्पल खरीदने के पैसे उनके पास नहीं थे और वह नंगे पैर स्कूल जाते थे. अजीत जोगी के पिता ने ईसाई धर्म स्वीकार किया था. ऐसे में उन्हें मिशन की मदद मिली और वह स्कूली शिक्षा में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज तक पहुंचे. भोपाल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी से जोगी मेकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडेलिस्ट हैं. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मैडल हासिल किया. इसके बाद वह रायपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाने लगे. लेकिन इस दौरान वह लगातार सिविल सर्विसेज की तैयारी करते रहे. इसमें भी उन्हें कामयाबी मिली और वह आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुए और डेढ़ साल बाद ही वह आईएएस बन गए. वे लगातार 14 सालों तक कलेक्टर रहे हैं, जिसे वह एक रिकॉर्ड बताते हैं. साल 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन पर वह राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने. वह दो बार राज्यसभा सदस्य, दो बार लोकसभा सदस्य, एक बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं.

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