रोहतक के ‘अपना घर’ में बच्चियों से यौन शोषण को भूल गए लोग ,जज जगदीप सिंह ने सुनाई सख्त सज़ा

*रोहतक के अनाथालय में बच्चियों-युवतियों से यौन शोषण मामले मेंसाल बाद फैसला
डायरेक्टर जसवंती, दामाद जयभगवान, फुफेरे भाई सतीश को उम्रकैद बेटे कोसाल की सजा, बेटी-बहन समेत 3 दोषियों को अंडरगोन किया यानी जितनी सजा भुगत चुके वही रहेगी

रोहतक के ‘अपना घर’ में बच्चियों से यौन शोषण मामले में सीबीआई कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाई। जज जगदीप सिंह ने मुख्य आरोपी व अपना घर (अनाथालय) की संचालिका जसवंती देवी, उसके दामाद जयभगवान, फुफेरे भाई व ड्राइवर सतीश को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, बेटे जसवंत सिंह को 7 साल जेल की सजा हुई है। जसवंती पर 52 हजार, जयभगवान व सतीश पर 50-50 हजार, जसवंत पर 20 हजार रु. जुर्माना लगाया है। जसवंती की बेटी सुषमा उर्फ सिमी, चचेरी बहन शीला, अपना घर की काउंसलर वीना को अंडरगोन किया है। यानी जितनी सजा भुगत चुकी हैं, वही रहेगी। जसवंती की सहेली रोशनी व अपना घर के कर्मचारी रामप्रकाश सैनी को प्राेबेशन पर रखा है। यानी कुछ समय के लिए उनका चरित्र देखा जाएगा। शिकायत मिली तो दोबारा कार्रवाई हो सकती है। ये एक दिन भी जेल में नहीं रहे। जज जगदीप सिंह की ओर से फैसला सुनाए जाने पर जसवंती देवी फूट-फूट कर रोने लगी। उसने कहा कि मैंने बच्चों को रखा। मेरी बेटी की शादी थी, मैं वहां नहीं थी। मेरे पीछे से यह सब हो गया। सुषमा और बीना भी रोने लगी। वह चाहती थी कि सतीश को कम सजा मिले। कहने लगी कि उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। जसवंती के भाई जसवंत ने कहा कि मुझे कहने का मौका नहीं मिला। मेरी सजा कम की जाए। मेरे से गलती हो गई। सतीश ने कहा कि साहब, हमें नहीं पता था कि जयभगवान ने क्या किया? उसी ने फंसाया है। उसने उन्हें कभी नहीं बताया कि उसने रेप किया है। जब डीएनए मिलान के बाद खबर आई, तब पता चला कि जयभगवान ने रेप किया। जयभगवान ज्यादा नहीं बोला। उसने अपना जुर्म कबूलते हुए कहा कि उससे गलती हो गई।
दोषियों का बायोडाटा 
अपना घर की संचालिका मुख्य जसवंती देवी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड रोहतक की सदस्य भी थी। वह रोहतक की श्रीनगर कॉलोनी की रहने वाली है। उसका भाई जसवंत एक स्कूल में लेक्चरर था। वह सेक्टर-3 का रहने वाला है। जय भगवान झज्जर में रेडियोग्राफर था। वह रोहतक के मदीना का रहने वाला है। वह जसवंती का दामाद है। सुषमा जयवंती की बेटी है। सतीश रोहतक के गांव बलंभा का रहने वाला है। वह जसवंती के बुआ का लड़का है। वह उसका ड्राइवर भी रहा है। शीला जींद के कंडेला की रहने वाली है। वह जसवंती की चचेरी बहन है। रोशन उसकी सहेली है। रामप्रकाश सैनी अपना घर में कर्मचारी था। वह हनुमान कॉलोनी का रहने वाला है। वीना अपना घर में काउंसलर थी।  रोशनी और रामप्रकाश सैनी को प्रोबेशन पर रखा है। यानी इनका चरित्र कुछ समय के लिए देखा जाएगा। यदि कहीं से कोई शिकायत मिलती है तो उनके खिलाफ दोबारा कार्रवाई हो सकती है। ये दोनों एक दिन भी जेल में नहीं रहे। दोनों ने हाईकोर्ट से जमानत ले ली थी।
जसवंती की दरिंदगी का एक उदाहरण
7 मई 2012 को अपना घर से भागकर दिल्ली पहुंची 3 लड़कियों की शिकायत पर बाल संरक्षण आयोग की टीम ने 9 मई 2012 को छापा मारकर 105 बच्चियों व युवतियों को मुक्त कराया। तब उनके साथ हुए यौन शोषण का खुलासा हुआ। लड़कियों ने बताया कि उन्हें रसूखदार लोगों के पास भेजा जाता। अश्लील वीडियो बनाए जाते। बंधुआ मजदूरी कराई जाती। डांस पार्टियों में ले जाया जाता। अगर कोई मना करे तो जसवंती बेरहमी से पीटती और सजा के तौर पर भूखा रखा जाता। लड़कियों ने कहा था कि उन्हें नेताओं की पार्टियों, दिल्ली के जीबी रोड व होटलों में गलत काम के लिए ले जाया जाता था, पर ऐसे किसी नेता पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई। छापेमारी के समय जसवंती ने धौंस दिखाई थी, उसकी पहुंच सीएम और राज्य के बड़े लोगों तक है। उसकी धमकी कितनी सच थी।

वो बयान जिससे खुला बच्चियों के शोषण का मामला
मैं रोहतक के अपना घर से भागकर आई हूं। संचालिका जसवंती के ड्राइवर ने मेरे साथ दुराचार किया। जसवंती व उसकी बेटी सुषमा अपने घर में काम कराती हैं। जसवंती का दामाद प्रताड़ित करता है। पिटाई से पैर नीला पड़ा हुआ है। जसवंती गंदी गालियां देती है। सजा के तौर पर खाना भी नहीं देती। खेतों में काम कराया जाता है। मेरी छोटी बहन भी कैद है।’
7 मई 2012 को दिल्ली में चाइल्ड हेल्पलाइन के बाद सीबीआई काे दिया एक पीड़िता का बयान
121 गवाह सीबीआई की ओर से पेश किए गए

बड़ा सवाल वो नेता-अफसर कहां गए, जिनको बच्चियों ने शोषक बताया
पुलिस का दावा है कि उसे नहीं पता था कि अपना घर में कुछ गलत हो रहा है। जबकि पीड़ित बच्चियों ने पुलिस व अफसरों पर भी उनसे गलत काम करने के आरोप लगाए थे। अगर पुलिस और अफसर संलिप्त थे, तो उनके नाम बतौर आरोपी सामने क्यों नहीं आए, जबकि छापेमारी के वक्त एक सब इंस्पेक्टर संदिग्ध हालात में वहां से मिला भी था।
आगे क्या : आरोपियों के वकील विशाल गर्ग ने कहा, ‘इस फैसले को जल्द ही हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।’
जसवंत सिंह
जज जगदीप सिंह नेमाह में ही दो सख्त फैसले सुनाए
जींद के रहने वाले जज जगदीप सिंह सख्त फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। पिछले साल 28 अगस्त को दुष्कर्मी बाबा राम रहीम को उन्होंने ही 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। इन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की। 2012 में ज्यूडिशियल सर्विस जाॅइन की। पहली पोस्टिंग सोनीपत में हुई। काबिलियत की वजह से इन्हें सीबीआई कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई। जज के रूप में उनकी ये दूसरी पोस्टिंग है। 2016 में सड़क मार्ग से यात्रा के दौरान हादसे में घायल हुए लोगों को अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाने को लेकर चर्चा में आए थे।
आईपीएस विवेक शर्मा ने गजब किया

अपना घर प्रकरण के दौरान आईपीएस विवेक शर्मा तत्कालीन एसपी थे, जो मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी थे। अब वो मध्यप्रदेश में गृह सचिव हैं। इस मामले में शुरूआती तथ्य जुटाने में रोहतक पुलिस ने बहुत काम किया। इसका असली क्रेडिट सीबीआई को ही मिले, जो इसे मुकाम तक ले गई। मामले में एसआईटी सदस्य धारणा यादव ने सबसे ज्यादा काम किया था, जिसमें लड़कियों को समझाने से लेकर उनसे सभी बातें निकलवाई और तथ्य जुटाए। सुप्रीम कोर्ट के वकील आरएन महलावत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में 2012 से 2014 तक लीगल कंसलटेंट तैनात रहे। केस को अंजाम तक पहुंचाने में इन्होंने अहम रिपोर्ट दी। पहले वर्ष में केस सीबीआई में धीमी गति से चला। आयोग की चेयरपर्सन प्रो. शांता सिन्हा चाहती थीं कि जल्द फैसला हो, उन पर केस छोड़ने का दबाव बना, नहीं तो फैसला 2014 में ही आ जाता। सीबीआई में लंबे समय बाद सबूतों पर सुनवाई हुई।

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