ये बिहार है – मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में 8552 में से 3717 पद खाली, हाईकोर्ट को कहना पड़ा “अलार्मिंग सिचुएशन “

रिपोर्टर | पटना//बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर दायर पीआईएल पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को विभागीय रिकॉर्ड के साथ 27 फरवरी को हाजिर होने का आदेश दिया है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने जितेंद्र कुमार सिंह की जनहित याचिका पर कहा- यह अलार्मिंग सिचुएशन है। आदेश दिए। याचिकाकर्ता के वकील मणिभूषण प्रताप सेंगर ने हाईकोर्ट को बताया- राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के कैडर में चिकित्सा पदाधिकारियों के स्वीकृत 5,777 पदों में 1724 और स्पेश्लाइज्ड मेडिकल अफसर के स्वीकृत 2775 पदों में 1993 पद खाली हैं।
इस पर सरकार कुछ नहीं कर रही। जब हाईकोर्ट ने जवाब मांगा तो आननफानन में स्वास्थ्य विभाग ने 17 जनवरी को अधिसूचना निकाल कर खाली पदों को भरने की कवायद शुरू की। दूसरी ओर, बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा के तहत बिहार के छह मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर एवं प्रोफेसरों के हजार से अधिक पद खाली हैं। यही नहीं, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के 325 पद खाली हैं।

आधुनिकीकरण- ब्योरा दो हफ्ते में पेश करने का आदेश

पटना| कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पुलिस जांच एवं अभियोजन के आधुनिकीकरण में उठाए गए कदम का विस्तृत ब्योरा दो हफ्ते में पेश करने का आदेश दिया है। सूबे में पुलिस अनुसंधान को पुख्ता करने, उसे आधुनिक उपकारणों से लैस कर अभियोजन को मजबूत करने के लिए एडवोकेट बसंत कुमार चौधरी की पीआईएल पर कोर्ट ने यह आदेश दिया। प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया- एफआईआर को ऑनलाइन करने की सुविधा व उसके डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब तक 51 हज़ार एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड हो चुकी है। शेष पर काम चल रहा है। हाइकोर्ट ने इन मामलों में प्रगति रिपोर्ट दो हफ्ते बाद दायर करने को कहा।

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