माल्या का ट्वीट-“मैं सीबीआई के आरोपों से हैरान हूं, सब झूठ है।

नई दिल्ली. बैंकों के लोन डिफॉल्ट केस में फंसे विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई ने 2 दिन पहले गैर-जमानती वॉरंट जारी किया था। अब माल्या ने इस पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि वे यूपीए और एनडीए के बीच फुटबॉल बनकर रह गए हैं, जिसमें कोई रेफरी नहीं है। माल्या बोले- सबूतों का तोड़ा-मरोड़ा जा रहा… – माल्या ने गुरुवार को एक साथ कई ट्वीट किए। इनमें लिखा कि उनके खिलाफ लगे आरोपों से जुड़े सबूतों को इन्वेस्टगेशन एजेंसी और मीडिया तोड़-मरोड़कर पेश कर रही हैं। – उन्होंने अपनी ट्वीट में लिखा, मैं सीबीआई के आरोपों से हैरान हूं, सब झूठ है। पुलिसवाले बिजनेस और इकोनॉमिक्स के बारे में न जाने कितनी समझ रखते हैं

उन्होंने अपनी ट्वीट में लिखा, “मैं सीबीआई के आरोपों से हैरान हूं, सब झूठ है। पुलिसवाले बिजनेस और इकोनॉमिक्स के बारे में न जाने कितनी समझ रखते हैं।”
– उन्होंने यह भी लिखा, “मीडिया खुशी-खुशी एक पिच की तरह इस्तेमाल हो रही है और मैं एक फुटबॉल की तरह। एक-दूसरे की कट्टर विरोधी दो टीमें यूपीए और एनडीए आपस में मैच खेल रही हैं। बदकिस्मती से मैं इसमें कोई रेफरी नहीं है।”
बीजेपी ने लगाए थे यूपीए-2 सरकार पर आरोप
– बीजेपी स्पोक्सपर्सन संबित पात्रा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “माल्या को पहली बार 2004 और फिर 2008 में लोन दिया गया, जबकि उन्हें नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) डिक्लेयर कर दिया गया था”।
– “क्या डूबते जहाज (कांग्रेस) ने डूबती एयरलाइंस (माल्या की किंगफिशर) की मदद की थी? मनमोहन के कहने पर ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने माल्या पर सॉफ्ट रुख अपनाया और उनके अकाउंट भी फ्रीज नहीं किए गए।”
– “अक्सर, ये सवाल पूछा जाता है कि खराब रेटिंग के बावजूद माल्या को 9 हजार करोड़ का लोन कैसे मिल गया? इसका जवाब ये है कि पीछे से कोई ताकत जरूर मदद कर रही थी। हमारे पास लेटर और ईमेल सबूत के तौर पर मौजूद हैं।”
– बता दें कि बैंकों से 9000 करोड़ रुपए के लोन डिफाल्ट के मामले में माल्या पिछले साल देश छोड़कर ब्रिटेन भाग गए हैं।
मनमोहन ने खारिज किए थे आरोप
– बीजेपी के इन आरोपों को मनमोहन सिंह ने खारिज कर दिया था। सोमवार शाम को उन्होंने प्रेस कॉन्फेंस की थी। जिसमें कहा, “हर सरकार में प्राइम मिनिस्टर और दूसरे मिनिस्टर्स को इंडस्ट्री लीडर्स की तरफ से ऐसे लेटर मिलते रहते हैं। इन्हें रिलेटेड अथॉरिटीज के पास भेज दिया जाता है।”
– “मैंने जो किया वो पूरे भरोसे के साथ किया। देश का कोई कानून नहीं तोड़ा। ये तो बहुत आम बात है। वो लेटर मामूली कागज के टुकड़े से ज्यादा और कुछ नहीं है। सरकारों के पास ऐसे लेटर आते रहते हैं।

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