मैं कुछ नहीं हूं सिर्फ चेहरा हूं ये पुलिस विभाग पूरा एक सिस्टम है :ऋषिकुमार शुक्ला ,डीजीपी

  • पुलिस  मुख्यालय में चौथे माले के तीन पावरफुल अधिकारियों में से पहले राज्य के४३वे डीजी
  • ऋषिकुमार शुक्ला से विशेष संवाददाता नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की बातचीत 

ऋषिकुमार शुक्ला मध्यप्रदेश के ४३ वें पुलिस महानिदेशक हैं….ये अजब संयोग भर नहीं है कि पुलिस  मुख्यालय में चौथे माले पर  आजकल पुलिस विभाग के तीन बडे अफसर विराजते हैं. जिनमें सबसे खास खुद श्री ऋषिकुमार शुक्ला ही है .पुलिस मुख्यालय का पुराना चेहरा नई इमारत में आने के बाद से ही बदला –बदला है. इस नई इमारत में बहुत सारे अफसरों के बैठने की बडी.सुचारू- सुरक्षित व्यवस्था है .चौथे माले का सबसे खूबसूरत और शानदार कक्ष है  डीजी यहीं बैठते हैं. यहाँ से भोपाल की शानदार छवि बैकग्राउंड में दिखती है. सीपी एण्ड बेरार नेहरू और भोपाल की स्थानीयता को अपने आंचल मे समेटता हुआ पूरा चौथा माला शानदार वास्तुकला से अभिमंत्रित सा है. इस माले पर डीजी ऋषिकुमार शुक्ला से मिलने की कतार में काफी लोग होते हैं

इस सिस्टम का मात्र  एक हिस्सा  हूँ .

डीजी श्री शुक्ला बहुत असाधारण अफसर हैं जो नपा तुला और गंभीर बोलतें हैं लेकिन बहुत सहनशीलता से वे बहुत सारे मुलाकातियों को सुनते है. वे इंटरव्यू करने लोगों की संख्या से परेशान हैं क्योंकि बहुतेरे मुलाकाती या तो इंटरव्यू लेना चाहते है या बहुतेरे कोई ज्ञान की बात समझाना चाहते हैं. लेकिन अलग-अलग मुलाकातियों से बात करते समय बहुरंगी प्रतिभाओं से साक्षात्कार उनकी हर रोज की कहानी का छोटा सा हिस्सा होता है.श्री शुक्ला का concept  बिल्कुल साफ है..वे किसी को इंटरव्यू नहीं देते वे कहते हैं कि मैं कुछ नहीं हूं सिर्फ चेहरा हूं ये विभाग पूरा का पूरा एक system  है यहाँ सब काम कर रहे है सिर्फ चौथे माले पे काम होता है वैसा नहीं है. हर माले पे काम हो रहा है. अनुभवी आईपीअफसरों की पूरी की पूरी टीम है इँस्पैक्टर हैं हवलदार है काँस्टैबल हैं तकनीकी टीम है. ये सारी की सारी टीम काम करती है और मैं इस टीम का हिस्सा हूँ तो इस टीम में सब है तो मैं इंटरव्यू देकर क्या करूँगा. और जो मेरे बारे में जानते है वे जानते हैं कि मैं इस सिस्टम का मात्र  एक हिस्सा  हूँ .

डीएसपी महोदय लौटे तो चेहरा भय से लाल था

डीजी से अधिकारिक रूप से मिलने आये पुलिस के अन्य स्थानों से पहुँचने वाले मँझले और अदने स्तर के छोटे अफसरों की भीड. में से कुछ चेहरे जब मिलकर लौटे तो कईयों के चेहरे खिले हुए थे. इसी दौरान मिलने आये एक डीएसपी महोदय जब लौटे तो चेहरा भय से लाल था और आवाज को साँप सूघ गया था.इसी दौरान एक अधेड.किस्म के बृद्ध जो रिटायर्ड मालूम होते थे उनकी शिकायत डीजी श्री शुक्ला नें बहुत ध्यान से सुनी. लेकिन वे सज्जन जिस मामले को लेकर शिकायती मोड में थे .डीजी महोदय का उस शिकायत के बिषय में बार -बार ज्ञान वर्धन करने पर आमादा थे. आखिरकार डीजी श्री शुक्ला ने उन सज्जन को कहा कि आप हमे शिकायत पढने -समझने का मौका दीजिये तभी तो हम कुछ कर पायेंगे.समीप ही विराजे एक पत्रकार भी कोई बात कहना समझना चाहते थे. लंच का वक्त निकल रहा था मिलने वाले अफसरों और दीगरों की लगी कतार में शीघ्र न मिल पाने की बेचैनी देखने में आती है.

पुलिस के को आधुनिक बनाने समन्वित प्रयास जरुरी 

आधुनिकीकरण के इस दौर मे इतना सब कुछ होते हुए भी पुलिस के संगठनों को आधुनिक बनाये जाने के लिये समन्वित प्रयास करना है .राज्य में पुलिस संगठन ने सरकार के निर्देशों के परिपालन करते हुए कानून व्यवस्था को बनाये रखने में सामूहिक प्रयासों से कार्य किया है. श्री ऋषिकुमार शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश की पुलिस के पासजल्दी ही  इतने संसाधन होंगे कि हम आधुनिक कहला सकें. पुलिस मुख्यालय में खडे स्कैन कियास्क जिनसे जांच की जाती है उसके लिये मोबाइल वाँन जैसे वाहनों से सामान की जांच के उपकरण होने से काम में सहूलियत होगी.

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