मीठी-मीठी यादें लेकर घर लौटे बुजुर्ग अधिकारी,जेएनपीए में अनूठे सेमीनार का समापन:

 भोपाल, /जीवन के 95 बसंत देख चुके सेवानिवृत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री एस एन श्रीवास्तव ने जब सामने खड़े पुलिस के पुराने साथियों को देखा तो लाठी का सहारा छोड़कर दौड़ लगा दी। उनमें समाया युवाओं जैसा जोश व जज्बा देखकर सभी अचंभित हुए बिना नहीं रह सके। फिर क्या वर्षों पूर्व एक दूसरे से बिछुड़े अन्य बुजुर्ग सेवानिवृत अधिकारियों में भी जोश भर गया और ऐसा अद्भुत मिलन हुआ जो भुलाए भी नहीं भुलाया जा सकेगा। मौका था जेएनपीए ( जवाहर लाल नेहरु पुलिस अकादमी) सागर में प्रशिक्षण ले चुके आज़ादी के बाद से लेकर वर्ष 1968 तक के उप निरीक्षकों के बैच के सेमीनार सह मिलन समारोह का। जेएनपीए में पिछले तीन दिन से जारी इस सेमीनार का समापन हुआ। सभी बुजुर्ग प्रतिभागीअपना अनभव बांटकर और मीठी-मीठी यादें लेकर अपने-अपने घर लौटे।
  सेमीनार में सबसे वरिष्ठ प्रतिभागी थे उपनिरीक्षक बैच 1947 के  सेवानिवृत अधिकारी श्री एस.एस श्रीवास्तव। इनके  अलावा वर्ष 1956, 1960, 1963, 1964, 1965, 1966, 1967  व 1968 बैच के सेवानिवृत पुलिस अधिकारियों ( उप निरीक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक) ने सपत्नीक इस सेमीनार में हिस्सा लिया। सभी का वर्षो बाद हुआ यह मधुर मिलन एवं  अकादमी के प्रति प्रेम जिन लोगों ने भी देखा वे शायद ही इसे कभी भुला पाएंगे।
 सेमिनार में भाग लेने आए बुजुर्ग पुलिसियन देर रात तक अपनी पुरानी यादों का खजाना आपस में बांटते रहे। पुलिस सेवा के दौरान गुजारे अपनी जिन्दगी के हसीन लम्हों की चर्चा के दौरान कभी आँखे नम हुईं तो कभी हँसी के ठहाकों से प्रांगण गूँज उठा।
सेमीनार के दौरान बुजुर्ग प्रतिभागियों ने जेनपीए के उस मैदान की मिट्टी को अपने माथे पर लगाया, जिस पर वर्षो पहले  प्रशिक्षण के दौरान अपना पसीना बहाया था। साथ ही अपनी यादों को संजोने के लिये ग्रुप फोटो सेशन भी कराया।
           समापन अवसर पर सभी ने विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  श्री संजय राणा तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर के प्रति विशेष आभार जताया। जिनकी पहल पर इस सेमीनार का आयोजन हुआ। विदाई समारोह के अवसर पर शहडोल रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री जी. जर्नादन ने प्रतिभागी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये सभी से आग्रह किया कि वे यहां से जाने के बाद अपना विवरण, बैच, जन्म,निवास स्थान,कार्यकाल,पुलिस सेवा में किय गये उल्लेखनीय कार्य, पदक, सेवानिवृति के बाद का जीवन, पुरानी यादें, ट्रेनिंग टाइम के पल लिखित रूप में अवश्य भेजें, ताकि उनका पुलिस की नई पीढ़ी के उपयोग के लिए दस्तावेजीकरण कराया जा सके। जेएनपीए के उप निदेशक एव डीआईजी श्री राजेश हिंगणकर  का इस आयोजन में विशेष योगदान रहा। सेमीनार के तीनों दिन उनकी मौजूदगी रही।
 पुलिस मुख्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मिले सम्मान से गदगद बुजुर्ग प्रतिभागियों का कहना था कि यहाँ आकर ऐसा लग रहा है कि जैसे माता-पिता के तीर्थयात्रा से लौटने पर बच्चे जलसा कर रहे हैं।
 //अनुभव बांटे और सुझाव भी दिए//
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा अपने अनुभव सुनाए, साथ ही उपयोगी सुक्षाव भी दिए। वर्ष 1967 बैच के अधिकारी  श्री आर.पी. तिवारी  ने कहा पुलिस के लिये सबसे महत्वपूर्ण है, समाज मे अपनी छबि बनाये रखना। अगर पुलिस अधिकारी की छवि अच्छी है तो कानून-व्यवस्था बनाये रखने में जनता भी पूरा सहयोग करती है। वर्ष 1965 बैच के श्री बी.पी.शुक्ला ने मुखबिर तंत्र की मजबूती पर जोर दिया। उनका कहना था पुलिस बल को सूचना तंत्र की मजबूती के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। कुछ अधिकारियों कहना था प्रमोशन समय से हों ताकि विभाग को अधिक अनुभवी अधिकारियों के  अनुभव का लाभ मिले। सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री एस.के. शर्मा ने कहा कि छोटी-छोटी शिकायतों की भी बारीकी से जांच हो, क्योंकि ऐसी शिकायतों पर ध्यान न देने से कभी-कभी काननू व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो जाती है। विभागीय जांच का काम सिखाने के लिये अधिकारियों के रिफ्रेसर कोर्स आयोजित कराने, स्थानांतरण करते वक्त पुलिस कर्मियों  की पारिवारिक स्थितियों पर ध्यान  देने , बिना ठोस वजह के अचानक तथा बार-बार तबादले न करने,  सेवानिवृति के बाद पुलिस वेलफेयर सुविधायें बढ़ाने व स्वस्थ्य सुरक्षा योजना में शामिल करने संबंधी सुझाव भी दिए गए।
//सांस्कृतिक संध्या भी हुई//
सेमीनार के दूसरे सांस्कृतिक संध्या में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने एकल व सामूहिक गायन एवं  नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं। इस दौरान कुछ सेवानिवृत्ति अधिकारियों की शादी की सालगृह तो कुछ के जन्मदिन भी सामूहिक रूप से मनाए गए। श्री कमल सिंह -रजनी बुंदेला जी की शादी की 56 वी वर्षगाँठ  केक काटकर एवं वरमाला कार्यक्रम के साथ मनाई गई। श्री आर.के.श्रीवास्तव ने अपनी मधुर आवाज में अलग-अलग प्रदेश की भाषाओं में गाने सुनाए। सभी रिटायर्ड अधिकारियों ने झूम कर अपनी खुशी व ऊर्जा का परिचय कराया
              सेमीनार के आखिरी दिन सभी बुजुर्ग प्रतिभागियों को फील्ड विजिट कराई गई। साथ ही सागर स्थित सुप्रसिद्ध बहेरिया बड़े शंकरजी के दर्शन कराए गए।

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