मिसाल बेमिसाल : आईएएस अफसर ने सरकारी अस्पताल में दिया बच्चे को जन्म

झारखंड (jharkhand) में आदिवासी बहुल गोड्डा जिले में डिप्टी कमिश्नर (deputy commissioner) के रूप में तैनात आईएस अधिकारी किरण कुमारी पासी ने अपने बच्चे को जन्म देने के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती होकर एक मिसाल पेश की है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (cm hemant sorein) ने ट्वीट कर किरण कुमारी को संतान प्राप्ति के लिए शुभकामनायें देने के साथ ही उनके इस फैसले को आदर्श बताते हुए प्रशंसा भी की है।

बताते चलें कि किरण कुमारी की गिनती अच्छे अधिकारियों में होता है उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान झारखंड के गोड्डा जिले की उपायुक्त ने जनता की समस्या को सुलझाने के लिए विशेष पहल की है. डीसी किरण कुमारी पासी ने सभी विभाग के अधिकारियों को सप्ताह में एक दिन जनता से रू-ब-रू होने का आदेश दिया है. इस दौरान जनता की समस्या को विभागवार निबटाया जाएगा.

रविवार की सुबह छह बजे जब आईएएस किरण कुमारी पासी को प्रसव पीड़ा हुई, तो वे रांची से 350 किलोमीटर दूर गोड्डा के अपने सरकारी बंगले में थीं.उन्होंने तय किया था कि वे वहीं पर अपने बच्चे को जन्म देंगी. लिहाज़ा, उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां मामूली ऑपरेशन के बाद उनके दूसरे बच्चे का जन्म हुआ.दोनों स्वस्थ हैं.. झारखंड कैडर की आईएएस किरण इन दिनों गोड्डा ज़िले की उपायुक्त (डीसी) हैं.गर्भावस्था के दौरान भी वे स्थानीय डॉक्टरों की देखरेख में अपना इलाज करा रही थीं.सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म देना वैसे तो उनका नितांत व्यक्तिगत फ़ैसला था, लेकिन अब ये बात सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है.

 

पहले ही सरकारी अस्पताल का इरादा कर लिया था
किरण कुमारी 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। यह उनकी दूसरी डिलीवरी थी। पहला बच्चा उनका लखनऊ में हुआ था। इस बार वह अपने बच्चे को किसी निजी अस्पताल में नहीं जन्म देना चाहती थी। उन्होंने अपने तैनाती जिला के सरकारी अस्पताल को चुना। जिला अस्पताल सर्जन शिवप्रसाद मिश्रा के अनुसार उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया है। बच्चा व मां दोनों स्वस्थ्य हैं, लेकिन निगरानी के लिए अभी भी उन्हें अस्पताल में ही रखा गया है। वे बताते हैं कि यह कोई आकस्मिक फैसला नहीं था। किरण कुमारी ने पहले से ही जिला अस्पताल में ही डिलीवरी का फैसला कर लिया था। डा.मिश्रा ने कहा ‘वे ्अति पिछले गोड्डा जिले में तैनाती के दौरान से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए काफी प्रयास कर रही हैं। उनके इस फैसले से लोगों का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा बढ़ेगा।’

लोगों ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लिखा है कि अगर सभी आईएएस और नेता अपना और अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराएं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में संपूर्ण सुधार हो सकता है. ऐसी ही पहल शिक्षा के क्षेत्र में भी की जानी चाहिए.प्रसव के बाद की उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. यह फोटो उनके पति डॉक्टर पुष्पेंद्र सरोज ने ली थी. डॉक्टर पुष्पेंद्र सरोज गोड्डा ज़िले के ही एक कृषि महाविद्यालय में डीन हैं.उन्होंने कहा, “गोड्डा में पोस्टिंग के बाद से ही वे (किरण) स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कराने मे जुटी थीं. जनता तक यह मैसेज जाना चाहिए था कि सरकारी सिस्टम भी भरोसेमंद होता है. हमने अपने सिस्टम पर भरोसा किया है. यह पहले से तय था कि हमारे बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में होगा.””इसलिए हमने उन्हें यहां की डाक्टरों की देखरेख और परामर्श में ही रखा. हमने अपने बच्चे का नाम यश रखा है. उम्मीद है कि लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास और मज़बूत होगा.”

मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने की तारीफ
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य नितिन मदान कुलकर्णी सहित तमाम लोगों ने किरण कुमारी के फैसले की तारीफ करने के साथ ही प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक ने ट्वीट कर उन्हें इसके लिए बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने उनके इस फ़ैसले को राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सबल करने का क़दम मानते हुए डीसी किरण कुमारी पासी की प्रशंसा की हैगोड्डा जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मिश्रा के अनुसार सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के फैसले में किरण कुमारी के पति पुष्पेंद्र सरोज की भी सहमति थी। वे कहते हैं कि किरण कुमारी के यहां डिलीवरी के लिए भर्ती होना उनका सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि रविवार को डिलीवरी से लगभग बीस दिन पहले उन्होंने इस बारे में चर्चा की थी।

गोड्डा सदर अस्पताल में पदस्थापित डॉक्टर प्रभा रानी प्रसाद ने डीसी किरण कुमारी पासी का ऑपरेशन किया था.उन्होंने बताया कि वहां हर महीने औसतन 700 महिलाओं का प्रसव कराया जाता है. हालांकि, यहां सिर्फ़ पाँच डॉक्टरों की तैनाती है. इनमें से तीन शल्य चिकित्सक (सर्जन) हैं. पारा मेडिकल स्टाफ़ की भी कमी है. इसके बावजूद रोज़ औसतन 20-22 महिलाएं यहां अपने बच्चे को जन्म देती हैं.डॉक्टर प्रभा ने कहा, “ये पहला मौक़ा है जब किसी ज़िले की डीसी ने अपने प्रसव के लिए हमारे अस्पताल को चुना. हम इस कारण सतर्क थे और अब गौरवान्वित भी महसूस कर रहे हैं. हम उनके आभारी हैं क्योंकि उन्होंने हमपर भरोसा किया. आमलोगों को भी यह बात समझनी चाहिए और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए. क्योंकि, हमारे यहां विशेषज्ञ डाक्टर हैं.”

100 बेड वाले अस्पताल के इंतजाम में हुए सुधार 
महिला डाक्टरों की निगरानी में आपरेशन के जरिये उनकी डिलवरी कराई गई। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत 100 विस्तर वाले इस अस्पताल में काफी सुधार किया गया है। पहले यहां जरुरी सुविधायें भी उपलब्ध नहीं थी। यहां अभी भी 31 डाक्टरों के स्थान के 13 डाक्टरों की ही पोस्टिंग है।गोड्डा सदर अस्पताल को हाल ही में कायाकल्प पुरस्कार मिला है.सिविल सर्जन डॉक्टर एसपी मिश्र ने कहा कि 100 बेड के इस अस्पताल में डाक्टरों की संख्या निर्धारित क्षमता से कम है. इसके बावजूद मरीज़ों की देखरेख और उनकी सुविधाओं में कमी नहीं आने दी जाती है.सुखजोरा गांव से वहां इलाज कराने पहुंची सलोनी कुमारी ने  कहा कि महिला वार्ड में डीसी को देखकर उनकी हिम्मत बढ़ी है. अब लगने लगा है कि बड़े लोग भी यहां इलाज कराने आते हैं.महागामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने कहा, “पाँच सितारा अस्पतालों और महंगे प्रीमियम वाले स्वास्थ्य बीमा के दौर में किसी आईएएस अधिकारी ने अपने प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल को चुना है, इसलिए यह बात ख़ास हो जाती है. इससे सरकारी सिस्टम पर लोगों का भरोसा और मज़बूत होगा. यह उनका साहसिक निर्णय है.”

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