ममता और दिलेरी का बेजोड़ तालमेल ये महिला अफसर

पानीपत./शिमला. छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर कर रही है रायपुर के सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से! … ये कहानी है रायपुर के क्राइम ब्रांच की DSP अर्चना झा की जो एक आईपीएस अधिकारी होने के साथ – साथ एक छोटी सी बच्ची की माँ भी हैं, उनके पति बिलासपुर में एडवोकेट है। – अर्चना की एक बेटी को लेकर चर्चाओं में थी। लेकिन ये कहानी अकेले अर्चना की नहीं है….हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री से कहासुनी के बाद चर्चा में रहने वाली आईपीएस संगीता कालिया भी एक बच्ची की मां है इसी तरह  संजुक्ता असम की पहली महिला IPS ऑफिसर बनी इतना ही नही संजुक्ता 2 साल के बच्चे की माँ भी है।… कुछ जांबाज़ महिला अफसरों  से होते हैं रूबरू 
संजुक्ता 2 साल के बच्चे की माँ
मन में विश्वास और कुछ पाने की ललक ज़िंदा हो तो कुछ भी का मुश्किल नही होता है जी हाँ इसी बात को सच कर दिखाया है असम की संजुक्ता ने जो की पुलिस विभाग में अपनी दावेदारी पाने में सफल हुई है। 85 वी रेंक हासिल करने वाली संजुक्ता असम की पहली महिला IPS ऑफिसर बनी इतना ही नही संजुक्ता 2 साल के बच्चे की माँ भी है।उसकी यह जिंदादिली वाकई एक मिसाल है। संजुक्ता की 2008 में पहली पोस्टिंग माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर हुई थी, कुछ ही देर में उन्हें उदालगिरी में हुई बोडो और बांग्लादेशियों के बीच की जातीय हिंसा को काबू करने के लिए भेज दिया गया। अभी वह असम के जोरहाट जिले की एसपी हैं और लगातार असम के जंगलों में AK-47 थामे CRPF के जवानों और कमांडों को लीड कर रही हैं। पिछले महीने उनकी टीम ने सेना के काफिले पर हमले करने वाले उग्रवादियों की धरपकड़ की थी, साथ ही उन उग्रवादियों को भी पकड़ा जो जंगल को अपने छिपने के लिए इस्तेमाल करते थे। ऐसी जगह पर ऑपरेशन को लीड करना बेहद मुश्किल था, यह इलाका बेहद दुर्गम है जहां मौसम में नमी रहती है और न जाने कब बारिश हो जाए, नदी और जंगली जानवर का खतरा हर वक्त सामने रहता है। लोकल लोग उग्रवादियों को पुलिस के मूवमेंट की सूचना देते रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में उनके नेतृत्व में 16 उग्रवादियों को मार गिराया गया और 64 को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया है। असम की पहली महिला आईपीएस होने के नाते उन्हें पता है कि वह किस तरह वहां की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं और उन्हें एक आशा की किरण मानती हैं। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि सिविल ड्रेस में उन्होंने कैसे बस, स्कूल, कॉलेजों में छेड़खानी करने वाले मनचलों को पकड़ा था।
सोलन की एसपी अंजुम आरा सख्त लेडी
हिमाचल के सोलन की एसपी अंजुम आरा की गिनती तेज-तर्रार IPS ऑफिसरों में की जाती है। उनकी छवि एक सख्त लेडी IPS अफसर की है। बता दें कि अंजुम कानून व्यवस्था के साथ-साथ एक मां की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। वे एक नन्हें बच्चे की मां है। ड्यूटी के साथ 2 साल के अपने बच्चे अरहान का ख्याल रखना चुनौती भरा काम है, लेकिन वो दोनों कामों में सामंजस्य बिठा लेती हैं।
बच्चों को वक्त देना भी जरूरी…
अंजुम कहती हैं, एक एसपी की ड्यूटी के साथ अपने छोटे बच्चे के लिए वक्त निकालना मुश्किल होता है।
– कई बार इसका बुरा भी लगता है, लेकिन हमेशा कोशिश रहती है कि ड्यूटी और मां की जिम्मेदारियों में सामंजस्य बनाए रखें।
– उनका संदेश है कि लोगों को बेटा-बेटी को समान समझकर उनका भविष्य निर्माण करना चाहिए।
– लड़कियों को भी पढ़ लिख कर आगे बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए।
– लड़कियां किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़कर अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकती हैं।

इसलिए पुलिस सेवा को बनाया करियर
अंजुम आरा को देश की दूसरी महिला आईपीएस बनने का गौरव प्राप्त है। सोलन जिला की वह पहली महिला एसपी हैं।
– वह लोगों के साथ सीधे संपर्क को समाज सेवा का बड़ा साधन मानती हैं।
– पुरुष प्रधान समाज की मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने पुलिस सेवा को चुना।
– अपनी इसी सोच और पुलिस वर्दी के प्रति आकर्षण ने ही उन्हें आईपीएस तक पहुंचाया।
– वे हिमाचल में सोलन जैसे बॉर्डर से जुड़े अति संवेदनशील जिला की कानून व्यवस्था संभाले हुए हैं।
– उत्तर प्रदेश की लखनऊ से संबंध रखने वाली अंजुम 2011 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं।

डर की दहलीज से आईपीएस की मंजिल तक पहुंचाया : प्रीति चंद्रा
 मेरी मां ने तो कभी हाथ में पेंसिल भी नहीं पकड़ी थी। लेकिन जिद की हम दो बहनों और एक भाई को पढ़ाने की। कॉलेज में आई तो रिलेटिव ने शादी का दबाव डालना शुरू किया। लेकिन मां चट्टान बनकर उनको डटकर जवाब देतीं। वो मुझ पर इतना भरोसा करती थीं कि जब घर से तीन किमी दूर खेतों में काम करने जातीं तो अक्सर घर की चाबियां वहीं भूल आती थीं। रास्ते में श्मशान पड़ता था। और बड़े भाई के होते हुए भी रात को 8 बजे मुझसे कहती जाओ, भागकर चाबियां लेकर आओ। बस इसी विश्वास ने मुझे आईपीएस ऑफिसर बनाया। हम दोनों बहनों ने इंटर कास्ट मैरिज की लेकिन वो हमारे सपोर्ट में खड़ी रहीं।

चैलेंजिंग कॅरिअर में सपोर्ट सिस्टम न हो तो चुनौतियां बढ़ जाती हैं। पति विकास पाठक के अलावा मेरे गांव की एक 22 साल की लड़की मेरा सपोर्ट सिस्टम है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से गांव में वो पढ़ नहीं सकती थी। इसलिए मैंने उसकी पढ़ाई से लेकर शादी का जिम्मा उठाया है। वो मेरी बड़ी बेटी की तरह है और जब मुझे कई दिन तक टूर पर जाना पड़ता है तो वो मेरे घर और बेटी का ध्यान रखती है। मैं भी अपनी बेटी को सिर्फ आजादी देना चाहती हूं जिससे वो बिना सरहदों के आसमां में पंख फैला सके।

कौन है संगीता कालिया …
 – संगीता 2010 बैच की आईपीएस है।
– संगीता कालिया ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले में बतौर एसएसपी की पोस्ट पर हैं।
– संगीता के पति विवेक गुड़गांव में एसडीएम की पोस्ट पर तैनात है।

– संगीता और विवेक की एक बेटी भी है।

2009 बैच की आईएएस हैं सोनाली गिरी
  मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली निगम कमिश्नर सोनाली गिरि पंजाब कैडर की 2009 बैच की आईएएस हैं।
– पहले वह पंजाब के मोगा की निगम कमिश्नर थी। उनकी पहली पोस्टिंग धूरी में बतौर एसडीएम हुई थी।
– वह एसडीएम मलेरकोटला, एसडीएम अबोहर, एडीसी फिरोजपुर, एडीसी(जी) फाजिल्का रह चुकी हैं।

– सोनाली और उनके पति विपुल उज्ज्वल की एक बेटी भी है।

IPS सोनिया नारंग बीजेपी के नेता को जड़ चुकी हैं थप्पड़
– सोनिया नारंग कर्नाटक कैडर की 2002 बैच की आईपीएस है।
– सोनिया नारंग का कॅरियर 2004 में शुरू हुआ।
– सोनिया नारंग क पति गणेश नारंग भी बिहार कैडर के आईपीएस हैं।
– सोनिया औऱ गणेश का एक बेटा है।                                         

सोनिया अपनी 13 साल की नौकरी में कर्नाटक के कई बड़े शहरों में तैनात रहीं। इस दौरान वह जहां भी गईं, अपराधियों को भागने पर मजबूर कर दिया। साल 2006 में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और बीजेपी के 2 कद्दावर नेता आपस में भिड़ गए थे, तब आईपीएस सोनिया ने बीजेपी के एक नेता रेनुकाचार्य को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया था। हालांकि, बाद में यही नेता (रेनुका) मंत्री भी बने थे। उस वक्त सोनिया देवनगिरि जिले की एसपी थीं। उन्हें कई बार सम्मान मिल चुका है।
सीएम ने घसीटा था घोटाले में नाम
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आईपीएस सोनिया का नाम 16 करोड़ के खदान घोटाले में लिया, तो राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। सीएम ने विधानसभा में घोटाले से जुड़े अधिकारियों के नाम उजागर किए थे। उनमें एक नाम सोनिया नारंग का भी था। सोनिया ने मुख्यमंत्री के आरोपों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा, “मेरी अंतरात्मा साफ है आप चाहें तो किसी भी तरह की जांच करा लें, मैं इस आरोप का न सिर्फ खंडन करती हूं बल्कि इसका कानूनी तरीके से हर स्तर पर विरोध करूंगी।” सोनिया ने उस वक्त मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से भी दो-दो हाथ करने के लिए कमर कस ली थी।
बेटी को लेकर  गश्त पर…
  अर्चना छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस है।
– वे इस समय क्राइम ब्रांच में डीएसपी की जिम्मेदारी संभाल रही है।
– उनके पति बिलासपुर में एडवोकेट है।
– अर्चना की एक बेटी भी है जिसको लेकर वो हाल ही चर्चाओं में थी।जांबाज़ महिला ऑफिसर अर्चना झा. अध्यापक पिता और चार भाई बहिनों में सबसे छोटी अर्चना पुलिस की पृष्ठभूमि वाले परिवार से नहीं आतीं. न अर्चना ने कभी सोचा था कि पुलिस में जाएँगी. बस इतनी इच्छा थी कि जीवन में आगे बढना है और कुछ करके दिखाना है. इसी अदम्य इच्छा के चलते वे छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल हुईं और चयन के पश्चात उन्हें पुलिस सेवा आवंटित हुई. अर्चना ने 2007 में पुलिस सेवा ज्वाइन कर इस चुनौती को स्वीकार किया. शायद यह शक्ति नारी में ही होती है कि वह कड़ी से कड़ी चुनौती सहजता से स्वीकार कर लेती है lरायपुर के क्राइम ब्रांच में डीएसपी के पद पर काम कर चुकी अर्चना झा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि महिला पुलिसकर्मी देश की रक्षा नहीं कर सकती हैं। वो भी देश की रक्षा में उतना ही सहयोग देती हैं जितना कि एक पुरुष पुलिस कर्मचारी देता है। उन्होंने अपने बारे में बताते हुए कहा कि जब वो प्रेगनेंट थीं तब भी उन्होंने फील्ड में काम किया है। अक्सर ऐसा कहा जाता है कि महिलाओं को मैटर्निटी लीव मिलती है, जो कि राज्यों में अब 6 माह तक है लेकिन अर्चना ने बताया कि जब वो प्रेगनेंट थीं तो ये लीव केवल 4 महीने ही थी।अर्चना के अनुसार उन्हें ऐसे समय में काम करने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं इस समय उन्हें दो दिन नाइट ड्यूटी भी करनी पड़ी थी। जिसके कारण उन्हें कई बार तो पूरी-पूरी रात बाहर ही रहना पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी की अपने काम से मुंह नहीं मोड़ा और अपने काम को पूरी मेहनत से पूरा किया।

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