मप्र के नये डीजीपी विवेक जौहरी होंगे,राजेन्द्र कुमार को डीजी का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया

आखिरकार डीजीपी वीके सिंह को हटना ही पड़ा . मप्र के नये डीजीपी विवेक जौहरी होंगे . आज  शाम एक आदेश में वीके सिंह को खेल और युवा कल्याण का संचालक बनाते हुए उनके ज्वाइन करने तक अस्थाई रूप से डीजी साइबर और हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख राजेन्द्र कुमार डीजी का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया है ।इससे पहले सरकार ने इस पद के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे तीन नामों के पैनल को अस्वीकार कर दिया था । dgp वीके सिंह एक साल की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हटाए जाने वाले दूसरे डीजीपी हैं । इससे पहले ऋषिकुमार शुक्ला को हटाया गया था। शुक्ला बाद में सीबीआई डायरेक्टर बने। सरकार और सिंह के बीच चार महीने से तनातनी चल रही थी और मुख्यमंत्री डीजीपी की कार्यशैली से काफी नाराज थे। काफी दिनों से यह चर्चा थी कि कमलनाथ सरकार ने पुलिस महानिदेशक वीके सिंह को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वीके सिंह ने जनवरी 2019 में पद संभाला था। माना जा रहा है राजगढ़ मामले में आईएएस और आईपीएस में टकराव के बाद उनकी छवि खराब हुई। राजगढ़ जिले के ब्यावरा में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में एक रैली निकाली गई, जिससे जिलाधिकारी निधि निवेदिता ने कथित तौर पर एक सहायक सब इस्पेक्टर को थप्पड़ जड़ दिया था। आइएएस लॉबी ने कलेक्टर का समर्थन किया, लेकिन डीजीपी सिंह ने डीएसपी से जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करने को कहा था। रिपोर्ट में कलेक्टर को दोषी पाया गया और रिपोर्ट गृह विभाग को भेज दी गई थी। इससे आईएएस अधिकारी नाराज हो गए और वे मुख्यमंत्री कमलनाथ पर डीजीपी सिंह को हटाने का दबाव बना रहे थे।

पसंद के अफसर को डीजीपी बनाया
यूपीएससी ने जो पैनल राज्य सरकार को भेजा था उसमें तीन नाम थे। विवेक जौहरी पर सहमति नहीं थी। मैथलीशरण गुप्ता को सरकार डीजीपी नहीं बनाना चाहती थी। वीके सिंह से सरकार की पटरी नहीं बैठ रही थी। यही वजह थी कि 15 नवंबर को अंतिम आदेश में वीके सिंह का नाम डीजीपी पद के लिए अप्रूव नहीं किया गया था। जब सरकार ने पैनल अस्वीकार कर दिया है तो सरकार के पास पसंदीदा वरिष्ठ आईपीएस को डीजीपी नियुक्त करने का विकल्प खुल गया । जब आरके शुक्ला को हटाकर वीके सिंह को डीजीपी बनाया गया था, तब भी सरकार के पास यूपीएससी का पैनल नहीं था

पिछले साल पैनल में भेजे थे 32 नाम : नवंबर 2019 में सरकार ने यूपीएससी को 32 नामों का पैनल भेजा था, जिसमें 1984 से 88 बैच के सारे अफसर शामिल थे, जिनकी सर्विस के 30 साल पूरे हो गए हैं और जिनके कार्यकाल में छह माह से अधिक का समय बचा है।

 

वीके सिंह को हटाए जाने के पीछे ये तीन बड़ी वजह

  1. थप्पड़ कांड :पत्र से सीएम नाराज : राजगढ़ कलेक्टर थप्पड़ कांड में कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लिखे डीजीपी के पत्र से सीएम नाराज थे। उन्होंने कहा था कि कलेक्टर पर लगे आरोपों की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराई गई। मुख्य सचिव से इस मामले में बात नहीं की गई।
  2. हनी ट्रैप :एसआईटी चीफ नियुक्ति विवादहनी ट्रैप मामले की जांच के लिए डीजीपी ने सरकार को भरोसे में लिए बिना एसआईटी चीफ बना दिया था। सरकार ने 48 घंटे में एसआईटी चीफ बदला।

3.पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर खींचतान : पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच खींचतान उजागर हुई थी। आखिरी मौके पर सीएम ने इससे किनारा कर लिया था।

थप्पड़ प्रमाणित होने पर सरकार में गहमागहमी : राजगढ़ कलेक्टर पर एएसआई को थप्पड़ मारने का आरोप प्रमाणित होने की खबर दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद से सरकार में गहमागहमी थी। शुक्रवार दोपहर को सीएम ने अफसरों को बुलाया और इस मामले में यूपीएससी को तुरंत पत्र भेजने को कहा। शाम को ही पत्र भेज दिया गया।

गृह विभाग का यूपीएससी को पत्र चयन समिति की बैठक फिर बुलाएं : शुक्रवार सुबह गृह सचिव राजेश जैन ने यूपीएससी को भेजे पत्र में कहा कि उसने जो तीन नामों का पैनल भेजा है उसमें विवेक जौहरी की लिखित सहमति सरकार के पास नहीं थी। पत्र में कहा गया कि डीजीपी चयन समिति की बैठक फिर बुलाई जानी चाहिए।

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