मप्र कांग्रेस में बडा बदलाव कमल नाथ बने अध्यक्ष, चार नये कार्यकारी अध्यक्ष

मप्र कांग्रेस में बडा बदलाव कमल नाथ बने मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, चार नये कार्यकारी अध्यक्ष भी बने, ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया । मालवा से जीतू पटवारी, चम्बल से रामनिवास रावत, निमाड़ से बाला बच्चन, बुन्देलखण्ड से सुरेंद्र चौधरी कार्यकारी अध्यक्ष,

मध्य प्रदेश में नेताओं की गुटबाजी और ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमलनाथ में से किसको कांग्रेस प्रदेश ईकाई की कमान सौंपी जाए, ये पार्टी में एक प्रश्न बन गया था. राहुल सभी पक्षों से बात कर चुके थे. कह सकते हैं कि बहस पूरी हो गई और फैसला लंबे वक़्त के लिए सुरक्षित हो गया था. दरअसल, राहुल की पसंद सिंधिया थे, लेकिन दिग्विजय समेत तमाम नेता और सोनिया गांधी के करीबी माने जाते रहे दिग्गज भी कमलनाथ के हक में थे. इसीलिए राहुल फैसला नहीं कर पा रहे थे. आखिर में कोई रास्ता ना देख राहुल ने कमलनाथ के नाम पर सहमति जता दी.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में पहले गहन विचार के बाद मध्य प्रदेश की कमान सौंपने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के नाम उभरकर सामने आए. आखिर दोनों की प्राथमिकता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर पार्टी का चेहरा बनने की रही है. ऐसे में कई दौर की बैठकों के बाद कुछ अहम तथ्य उभरकर सामने आए.

1. उम्र के हिसाब से कमलनाथ के पास तकरीबन आखिरी मौका है. साथ ही तमाम कोशिश के बावजूद अब से पहले उनको कभी बतौर सीएम चेहरा नहीं बनाया गया.

2. कमलनाथ एमपी में दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया, अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और सुरेश पचौरी सरीखे नेताओं को साध सकते हैं, ये तमाम नेता सिंधिया से वरिष्ठ भी हैं.

 3. पिछले चुनाव में आखिरी वक्त के लिए ही सही लेकिन सिंधिया को बतौर सीएम चेहरा पेश करके ही चुनाव लड़ा था, तब उनको कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह और सिंधिया की सियासी अदावत ने भी राहुल को कमलनाथ के हक़ में आखिरकार फैसला करने को मजबूर कर दिया. अपनी नर्मदा यात्रा से पहले ही दिग्विजय ने सिंधिया और कमलनाथ की मौजूदगी में राहुल से साफ कह दिया था कि, वैसे तो किसी को चेहरा बनाने की जरूरत नहीं है. सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ाएं और सरकार बनने पर बाद में राहुल फैसला कर लें. लेकिन जब राहुल ने जोर देकर पूछा कि, पहले किसी को चुनना हो तो राय बताइए. इस पर दिग्विजय ने जवाब दिया कि, सिंधिया के पास आगे वक़्त है, लेकिन कमलनाथ का अंतिम मौका है. इसलिए कमलनाथ हों और वो होते हैं तो मेरा पूरा समर्थन रहेगा.

वहीं सिंधिया खुद कमान संभालने के लिए जोर लगाते रहे. अब सिंधिया को राहुल के वीटो का ही सहारा था. इसी उधेड़बुन में इतना वक़्त गुजर गया. साथ ही दिग्विजय ही नहीं एमपी के ज़्यादातर नेता दिग्विजय की लाइन पर ही सहमति जताते रहे. चुनाव करीब आता देख आखिरकार राहुल ने नेताओं की राय के साथ जाते हुए कमलनाथ के नाम को हरी झंडी दे दी.

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