मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस विवेक शर्मा ने रोहतक में गजब किया

पानीपत  /अपना घर प्रकरण के दौरान आईपीएस विवेक शर्मा तत्कालीन एसपी थे, जो मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी थे। अब वो मध्यप्रदेश में गृह सचिव हैं। इस मामले में शुरूआती तथ्य जुटाने में रोहतक पुलिस ने बहुत काम किया। इसका असली क्रेडिट सीबीआई को ही मिले, जो इसे मुकाम तक ले गई। मामले में एसआईटी सदस्य धारणा यादव ने सबसे ज्यादा काम किया था, जिसमें लड़कियों को समझाने से लेकर उनसे सभी बातें निकलवाई और तथ्य जुटाए। सुप्रीम कोर्ट के वकील आरएन महलावत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में 2012 से 2014 तक लीगल कंसलटेंट तैनात रहे। केस को अंजाम तक पहुंचाने में इन्होंने अहम रिपोर्ट दी। पहले वर्ष में केस सीबीआई में धीमी गति से चला। आयोग की चेयरपर्सन प्रो. शांता सिन्हा चाहती थीं कि जल्द फैसला हो, उन पर केस छोड़ने का दबाव बना, नहीं तो फैसला 2014 में ही आ जाता। सीबीआई में लंबे समय बाद सबूतों पर सुनवाई हुई।

रोहतक का  सबसे खौफनाक अनाथालय अपना घर
हवस और हैवानियत इंसानी फितरत का एक ऐसा काला पन्ना है, जिस पर लिखी इबारत पल-पल बदलती है। हम बात कर रहे हैं रोहतक के सबसे खौफनाक अनाथालय अपना घर की, जो घर नहीं जेल प्लस भूलभुलैया था। जिसकी संचालिका जसवंती का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल पैसा कमाना ही था। इसके लिए वह दरिंदगी की हर हद पार कर जाती थी। वहां पर मई 2012 में हुई छापेमारी के दौरान जो साक्ष्य मिले, वहां रह रही लड़कियों ने जो आपबीती बताई और सीबीआई ने जो चार्जशीट कोर्ट में पेश की, इन सभी में अपना घर और इसकी संचालिका की जो तस्वीर सामने निकल कर आई है, वो काफी खौफनाक है।

जेल जैसा हाल|छापेमारी के समय टीम भी अपना घर को अंदर से देख हैरान रह गई थी, वो बिलकुल जेल और भूलभुलैया के जैसा था। इसमें घर को चारों ओर से जालियों से घेर रखा था। अंदर के रास्ते इस तरह के थे। पहली बार में किसी को समझ में नहीं आए कि अंदर कौन सा जाएगा और बाहर कौन सा। अपना घर जिसमें लड़कियों को जिस्मफरोशी में जबरन धकेला जाता था। वहां लड़कियों के साथ जो अनर्थ हुआ उसे देख और सुनकर आपको अपने कान पर यकीन नहीं होगा कि लड़कियों को इस कदर नोचा, खसोटा और लूटा जा सकता है। लड़कियों की मंडी लगाकर उनकी परेड करायी जाती। शेल्टर होम अपना घर में ऐसा ही होता था। जसवंती को ना सुनना पसंद नहीं था। कोई लड़की मना कर देती थी तो उसे जसवंती की दरिंदगी झेलनी पड़ती थी। इंकार करने वाली लड़कियों के पास एक ही रास्ता हुआ करता था या तो वो मार खाएं या फिर मर जाएं। वहीं छापेमारी के दिन टीम को एक लड़की ने अपने घाव दिखाते हुए बताया था कि उसने मना किया तो जसवंती ने उसके शरीर पर कई जगह दांतों से काट खाया था। जो लड़कियां ज्यादा सुंदर नहीं थी, उनसे हथकरघा के काम करवाए जाते थे। कुछ लड़कियों को कई बार गेहूं कटाई के लिए भी ले जाया गया था।

ब्यूटी पार्लर के सहारे मसाज पार्लर चलता था

अपना घर में ब्यूटी पार्लर के सहारे मसाज पार्लर चलता था। जिसमें शहर और आसपास की महिलाएं आदि आती थी, जिन्हें लड़कियों से मसाज दिलाई जाती थी। इसके लिए कुछ लड़कियां विशेष टूर पर चिन्हित कर रखी थी। जो लड़कियां उम्र में ठीक थी और दिखने में खूबसूरत थी, उन्हें रसूखदारों की पार्टियों में परोसा जाता था। लड़कियों को कभी विदेशियों के सामने चीर हरण के लिये पेश किया जाता था तो कभी उन्हें नंगा कर उनकी पोर्न फिल्‍म बनाई जाती थी। इसके लिए उन्हें पिकनिक के बहाने चंडीगढ़ लाकर दो होटलों में ठहराया गया था।

यहां रहने वाली किसी लड़की को पैदा होते ही डस्टबिन में छोड़ दिया गया था, तो किसी ने लव में धोखा खाया था। इसलिए वो इसे अपना घर मानकर रहती थी। एक लड़की ने अपनी कहानी में बताया था कि उसके माता-पिता ने उसे पैदा होते ही डस्टबिन में फेंक दिया था और अपनी नानी के घर रहती थी, जहां से परेशान होकर यहां आई थी। एक लड़की ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल से थी और उसे जींद का ट्रक चालक शादी करके लाया, जिससे वो प्यार करती थी लेकिन बाद में उसे प्यार में धोखा मिल गया। एक लड़की ने बताया था कि उसके आगे पीछे कोई नहीं इसलिए यहां रह रही थी।

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