मध्यप्रदेश से राजा –महाराजा और सोलंकी जायेंगे राज्यसभा

सोमदत्त शास्त्री //
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन में से दो भाजपा और कांग्रेस के खाते में जाना तय है। भाजपा ने पहली वरीयता ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरी सुमेर सिंह सौलंकी को दी है। वहीं कांग्रेस ने पहली वरीयता दिग्विजय सिंह तो दूसरी पर फूलसिंह बरैया को रखा है। कांग्रेस की दूसरी वरीयता पर होने के कारण फूलसिंह बरैया की हार तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अब बरैया को उपचुनाव में प्रत्याशी बना सकती है।

दोनों दलों की ओर से अपने-अपने विधायकों को निगरानी में विधानसभा ले जाया गया। पहला वोट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डाला है। इसके बाद मतदान शुरू हुआ। दिग्विजय की जीत पक्की करने के लिए 52 की जगह 54 विधायक वोट कर रहे हैं। ऐसे में फूल सिंह की हार पक्की मानी जा रही है। चुनाव में मध्य प्रदेश के सपा और बसपा विधायकों ने भाजपा के पक्ष में वोट किया है। वोट डालकर बाहर आए समाजवादी पार्टी विधायक राजेश सिंह और बहुजन समाज पार्टी के विधायक संजीव सिंह कुशवाह ने कहा- हमने अन्तरात्मा की आवाज़ पर वोट किया है। मतदान के बीच कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। यहां बसपा विधायक ने पाला बदलते हुए भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की। बहुजन समाज पार्टी के विधायक संजीव सिंह कुशवाहा वोट देकर बाहर निकले और उन्होंने कहा कि मैं क्षेत्र के विकास के लिए शिवराज सरकार के साथ हूं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सरकार नहीं बचा सके और वोटों का गणित भाजपा की 2 सीटों के लिए है तो हम उनके साथ हैं और क्षेत्रीय विकास के लिए उनके साथ जा रहे हैं।भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी के 106 विधायकों (स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण नीना वर्मा नहीं पहुंचीं) के साथ तीन निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक भी भाजपा के पाले में नजर आए। इससे भाजपा के पास अब 113 विधायक का नंबर है।
सपा विधायक ने भी भाजपा के पक्ष में डाला वोट
इसके अलावा भाजपा को सपा विधायक राजेश शुक्ला का भी साथ मिल गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि उन्होंने सुमेर सिंह सोलंकी भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया है। क्षेत्र के विकास के लिए वे भाजपा प्रत्याशी के साथ हैं। वहीं, पथरिया से बसपा विधायक रामबाई पहले ही कह चुकी हैं कि वह कमलनाथ के साथ थीं, कांग्रेस के साथ नहीं। उन्हें अपने क्षेत्र का विकास करना है।चौथे निर्दलीय विधायक केदार डाबर भी भाजपा के संपर्क में हैं। इधर, कांग्रेस अपने 92 विधायकों के साथ है। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने व्हिप जारी कर दिया है। ऐसी सूरत में कांग्रेस की एक सीट पर जीत तय हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपने विधायकों केा दो बसों से लेकर विधानसभा पहुंचे। खुद भी बस में बैठकर गए। मतदान में विधानसभा के 206 सदस्य हिस्सा ले सकेंगे, जिनमें भाजपा के 107, कांग्रेस के 92, बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय सदस्य शामिल हैं। जिसमें भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का राज्यसभा जाना तय है। जबकि संख्या बल के हिसाब से भाजपा के दूसरे प्रत्याशी सुमेर सिंह सोलंकी भी राज्यसभा जाएंगे। राज्यसभा चुनाव में चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोंलंकी भाजपा प्रत्याशी है। कांग्रेस से दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की कोशिश है कि पहले उनके विधायक मतदान कर दें। इसके लिए भाजपा विधायक करीब साढ़े आठ बजे ही विधानसभा परिसर में पहुंच गए थे। वहीं कांग्रेस विधायक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बंगले पर इक_े होने के बाद विधानसभा परिसर पहुंच गए हैं।
विधायकों ने कराई थर्मल स्क्रीनिंग
विधानसभा के गेट पर विधायकों की थर्मल सक्रीनिंग के बाद प्रतीक्षाकक्ष में बैठाया गया। यहां उनसे लिखित में उनकी और परिवार के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली जा रही है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते 3 सीटों पर चुनाव टाल दिए गए थे।
दूसरी सीट पर कांगे्रस ने मानी हार
मतदान के लिए कांग्रेस विधायकों का श्यामला हिल्स स्थित पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास पर पहुंचना सुबह 8 बजे ही शुरू हो गया था। कांग्रेस के सभी विधायकों के नाश्ते की व्यवस्था यहां की गई थी। इसके बाद कांग्रेस के विधायक 2 बसों से विधानसभा के लिए रवाना हो गए। कमलनाथ खुद बस से विधायकों के साथ विधानसभा गए। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मतदान के लिए पहुंचे और मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम एक सीट जीत रहे हैं।

 


कोरोना संक्रमित कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने मध्यप्रदेश की विधानसभा में पीपीई किट पहनकर राज्यसभा के लिए वोट डाला। उन्हें आज दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एंबुलेंस से डॉक्टरों की निगरानी में मतदान केंद्र तक लाया गया। इससे पहले सभी विधायक वोट डाल चुके थे। परिसर को खाली कराकर पहले और बाद में सैनिटाइज भी किया गया। वोट डालने के बाद कुणाल वापस अस्पताल के लिए रवाना हो गए। विधानसभा में उनके लिए अलग से वोट डालने की व्यवस्था की गई थी । साथ ही उनका वोट भी अलग रखा गया । राज्यसभा के लिए मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ था। मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सभी 205 विधायक वोट कर चुके थे। इसके बाद चुनाव अधिकारी ने कुणाल को वोट डालने की अनुमति दी। उन्होंने पीपीई किट पहनकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वोट दिया। इससे पहले उन्हें एंबुलेंस से तीन गाड़ियों के घेरे में अस्पताल से विधानसभा तक लाया गया। उन्होंने रास्ते में एंबुलेंस के विंडो से हाथ निकालकर कई जगह लोगों को विक्ट्री का साइन भी दिखाया।कुणाल चौधरी जब एंबुलेंस में विधानसभा पहुंचे, तो उससे पहले ही परिसर को खाली करा दिया गया। सुरक्षा के लिए परिसर में कुछ अधिकारी ड्यूटी पर तैनात रहे। वह काफी दूरी बनाए रखे। उनके आने के पहले विधायकों समेत अन्य अधिकारियों को बाहर कर दिया गया। कुणाल ने नियमों का पालन करते हुए मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इससे पहले सभी जगहों को सैनिटाइज किया गया। उनके जाने के बाद दोबारा परिसर को सैनिटाइज किया गया।
किसी को भी विधानसभा के रास्ते पर जाने की अनुमति नहीं
मध्यप्रदेश की राज्यसभा चुनाव की तीन सीटों के लिए आज सुबह वोटिंग शुरू हो गई। यह दोपहर करीब 4 बजे तक पूरी हो जाएगी। शाम को ही परिणाम आ जाएंगे। इस दौरान विधानसभा के आसपास काफी पुलिस बल लगाया गया है। विधानसभा के रास्ते पर विधायकों के अलावा किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। मीडिया को भी प्रवेश नहीं दिया गया।
तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में
राज्यसभा की रिक्त तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में चार उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेरसिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और फूलसिंह बरैया हैं।
यह है दलीय स्थिति
• कुल सीट -230
• भाजपा- 107
• कांग्रेस- 92
• निर्दलीय- चार
• बसपा-दो
• सपा- एक
• रिक्त- 24
राज्यसभा के वरीयता से ही टूटी कांग्रेस
• दरअसल, कांग्रेस सरकार के पतन की नींव ही राज्यसभा के टिकट बंटवारे से उपजे अपमान की टीस को कहा जा रहा है। उस दौरान राजनीतिक गलियारों में इस बात की खास चर्चा थी की ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजा तो जा रहा था, लेकिन दूसरी वरीयता पर। और यही बात उन्हें अपमान जैसी लगी। प्रदेश कांग्रेस में महाराजा और राजा की लड़ाई जगजाहिर रही है। ऐसे में राजा पहले और महाराजा दूसरे पायदान पर कैसे रह सकते थे। पार्टी में अपनी उपेक्षा झेल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को ये बात रास नहीं आई और अंतत: उनकी यही नाराजगी कमलनाथ सारकार के पतन का कारण बना।

 

बरैया को उपचुनाव लड़ाए जाने की चर्चा
• कांग्रेस की कोशिश है कि उसके प्रथम वरीयता के उम्मीदवार की जीत में कोई गफलत न हो जाए, इसलिए वह जीत के लिए आवश्यक 52 वोटों से दो ज्यादा वोट दिग्विजय को दिलाने के लिए जुट गई । दूसरे उम्मीदवार फूल सिंह बरैया को लेकर पिछले दो माह से जारी अफवाहों को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह दिग्विजय सिंह की जीत सुनिश्चित कराए। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने बरैया को पहले वरीयता देने के लिए खूब राजनीतिक हवा दी। भाजपा ने हवा देते हुए यह दबाव बनाने की कोशिश की थी कि यदि कांग्रेस अनुसूचित जाति की इतनी शुभ चिंतक है तो वह बरैया को राज्यसभा भेजे। अब बरैया को उपचुनाव लड़ाए जाने की चर्चा चल पड़ी है।

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