मध्यप्रदेश : थप्पड़ कांड पुलिसप्रमुख की कुर्सी पर मंडराये सकंट के बादल

राजनीतिक जगत में मध्य प्रदेश के चर्चित कलेक्टर थप्पड़ कांड से पैदा हुए आइएएस-आइपीएस विवाद की आंच प्रदेश के पुलिस मुखिया (डीजीपी) वीके सिंह तक पहुंच गई है. राज्य सरकार ने उन्हें हटाने की जमीन तैयार कर ली है. सिंह पर आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन थप्पड़ कांड में कलेक्टर निधि निवेदिता के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह विभाग को उनका पत्र व उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने का खुला समर्थन सरकार से तकरार का बड़ा सबब है. हालांकि, देर रात सीएम से मुलाकात के बाद डीजीपी संतुष्ट नजर आए.बता दे कि राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता ने सीएए के समर्थन में रैली के दौरान एक भाजपा नेता को थप्पड़ मार दिया था. इसके बाद निवेदिता के पुराने थप्पड़ मामले भी उजागर हुए थे। उन्होंने एक एएसआइ को भी थप्पड़ मारा था.इसी मामले में वीके सिंह ने कलेक्टर पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था. डीजीपी पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने निवेदिता का अभिमत नहीं लिया था. मप्र के राजगढ़ में बीजेपी की सीएए समर्थन रैली के दौरान नेताओं से भिड़ने वाली कलेक्टर निधि निवेदिता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीजीपी ने मध्यप्रदेश ग्रह विभाग को चिट्ठी लिखी है. डीजीपी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. उच्च सूत्रों की माने तो पुलिस इस मामले में सीधे कार्रवाई कर सकती है, लेकिन मामला कलेक्टर से जुड़ा होने के कारण सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया जा रहा है.

डीजीपी वीके सिंह ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है. सीएए के समर्थन में हुई रैली के दौरान ड्यूटी पर तैनात एएसआई नरेश शर्मा ने शिकायत की थी कि कलेक्टर मैडम ने उन्हें थप्पड़ मारा. एएसआई ने शिकायत में बताया था कि दोपहर 1 बजे वे ड्यूटी पर तैनात थे.उसी दौरान कलेक्टर मैडम आईं और उन्होंने गाड़ी का गेट खोलकर उसे थप्पड़ मार दिया. इस पूरे मामले पर ग्रह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि ASI को थप्पड़ मारने के मामले की हमें रिपोर्ट मिल गई है. इस पूरे मामले में कार्रवाई की जाएगी.सीएम के संज्ञान में भी मामला है, कानून अपना काम करेगा.लेकिन आईएएस एसोसिएशन ने निधि निवेदिता का बचाव किया था

डीजीपी वीके सिंह के एक ट्वीट के बाद मप्र में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर भी  फिर हल्ला मचा है। उप्र सरकार ने दो शहरों में यह सिस्टम लागू कर दिया। इसके तुरंत बाद डीजीपी सिंह ने ट्वीट किया कि यूपी पुलिस को पुलिस आयुक्त प्रणाली की कोटिशः बधाइयां। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी ने दो बड़े शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कर प्रगतिवादी कदम उठाया है। इससे न केवल पुलिस सेवा प्रदाय एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य व जनता के संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। यह ट्वीट उस समय आया है, जबकि मप्र सरकार इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल चुकी है।सत्ता परिवर्तन के बाद डीजीपी सिंह ने पुलिस कमिश्नर सिस्टम भोपाल और इंदौर में लागू करने प्रपोजल कांग्रेस सरकार के सीएम कमलनाथ को दिया था। इस पर आईएएस अधिकारियों ने इसका विरोध कर दिया था। साथ ही इस सिस्टम के बाद आने वाली खामियों और दिक्कतों से कमलनाथ को अवगत कराया। इसके बाद कमलनाथ ने प्रस्ताव पर निर्णय टाल दिया।तब से मामला ठंडे बस्ते में है। सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी (एनसीआर) से सटे हुए नोएडा में इसे लागू करने का फैसला लिया। इसी के बाद डीजीपी सिंह ने ट्वीट करके यूपी पुलिस को बधाई दी। इधर, गृहमंत्री बाबा बच्चन ने इस ट्वीट पर कोई टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि मप्र में अभी इसकी किसी भी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई।कांग्रेस सरकार ने 1984 बैच के आईपीएस अफसर वीके सिंहको डीजीपी बनाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार के पास डीजीपी ( DGP) के नाम के लिए तीन नामों का पैनल आया है. अब इन तीन नामों से मध्‍य प्रदेश सरकार को डीजीपी के नाम का ऐलान करना है. सूत्रों की मानें तो वीके सिंह ही प्रदेश के डीजीपी बने रहेंगे और कमलनाथ सरकार उनके नाम का जल्द ही ऐलान करेगी.

पिछले एक माह से चल रही कवायद

सूत्रों के अनुसार, डीजीपी को बदले जाने की कवायद एक महीने से चल रही थी. इस पद के लिए दावेदारों में मैथिलीशरण गुप्त, अशोक दोहरे, केएन तिवारी, शैलेन्द्र श्रीवास्तव के अलावा कई अन्य नाम थे. लेकिन, सहमति राजेन्द्र कुमार के नाम पर बनती दिख रही है. खबर है कि मंगलवार तक सरकार डीजीपी के नए नाम को लेकर निर्णय ले लेगी. राजेन्द्र कुमार हनी ट्रैप मामले के लिए गठित एसआईटी के प्रमुख भी हैं. वह साल 1985 बैच के आईपीएस अफसर हैं. इससे पहले डीजीपी विजय कुमार सिंह को कांग्रेस सरकार ने जनवरी, 2019 में जिम्मेदारी सौंपी थी. सरकार डीजीपी के काम से संतुष्ट नहीं चल रही थी. इसकी जो तीन प्रमुख वजह हैं- उनमें राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता की तरफ से थप्पड़ कांड, हनी ट्रैप केस की जांच के लिए एसआईटी चीफ नियुक्ति को लेकर सरकार को भरोसे में न लेना और पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर खींचतान वजह मानी जा रही है.

इन तीन लोगों का आया था नाम
मध्य प्रदेश के डीजीपी पद के लिए संघ लोक सेवा आयोग की चयन समिति की बैठक में 1984 बैच के तीन आईपीएस अफसरों के नामों वर्तमान पुलिस महानिदेशक वीके सिंह, बीएसएफ के डीजी विवेक जौहरी और पुलिस रिफोर्म के स्पेशल डीजी मैथलीशरण गुप्ता का नाम तय हुआ है. इस पैनल में वीके सिंह और मैथलीशरण गुप्ता के साथ 1985 बैच के आईपीएस अफसर राजेंद्र कुमार का नाम चर्चा में रखा गया था, लेकिन विवेक जौहरी की सहमति मिलने के बाद उनका नाम हटाया गया.

नए डीजीपी के रूप में सरकार यदि स्पेशल डीजी एवं हनीट्रैप मामले में गठित एसआइटी प्रमुख राजेंद्र कुमार की ताजपोशी करती है तो उसे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को नए डीजीपी के लिए नामों का प्रस्ताव भेजना पड़ेगा. इसके बाद अगले चार-पांच दिन बदलाव की संभावना जताई जा रही है.सुप्रीम कोर्ट की वर्ष 2006 की गाइडलाइन के अनुसार टीआइ, एसपी, आइजी और डीजीपी को दो साल के कार्यकाल से पहले नहीं हटाया जा सकता. उन्हें हटाने के लिए ‘एक्शन’ लेना होगा, इसलिए शासन को कोई कारण बताकर पुलिस प्रमुख पद पर बदलाव की स्क्रिप्ट तैयार करनी पड़ेगी. डीजीपी सिंह को चार्जशीट भी देना होगी.

DGP के दावेदार IPS का छलका दर्द, सोशल मीडिया पर  भाव

 मध्‍य प्रदेश में नए डीजीपी (DGP) की अटकलों के बीच विशेष पुलिस महानिदेशक मैथिलीशरण गुप्त ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं. उन्होंने सोशल मीडिया (Social Media) में एक पोस्ट में लिखा, ‘मैं इतनी क्षमता रखता हूं कि इस व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव ला सकता हूं. मैं अपने आप को पीड़ित नहीं दिखाना चाहता, सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि मैं राज्य में पुलिसिंग का नेतृत्व करने की क्षमता रखता हूं.’गुप्त ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘मैं खुद को व्यथित या परेशान के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करना चाहता. ये सरकार को महसूस करना चाहिए कि मैं राज्य में पुलिसिंग को चालू रखने की क्षमता रखते हैं.

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