भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने की तैयारी ,महाराष्ट्र के नौकरशाह करोड़पति

नरेंद्र मोदी सरकार ने 40 से अधिक मंत्रालयों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए गैर-प्रदर्शन करने वाले और भ्रष्ट अधिकारियों का विवरण भेजने के लिए कहा है.कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने एक पत्र भेजा है, जिसे तत्काल रिमाइंडर के रूप में चिह्नित किया गया है. मंगलवार को यह पत्र भेजा गया है, जिसमें 45 मंत्रालय और सरकारी निकाय, नीति आयोग, कृषि, वित्त, मानव संसाधन विकास और कानून के मंत्रालय शामिल हैं. डीओपीटी ने आगे कहा कि बहुत कम कैडर इकाइयों ने विभाग को उन लोगों के संबंध में इनपुट प्रदान किए हैं, जो FR 56 (j) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के मौजूदा प्रावधानों के तहत आते हैं.

ये नियम सरकार को जनहित में कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अनुमति देते हैं.डीओपीटी का नया संदेश छह महीने बाद आया, जब सरकार ने सभी मंत्रालयों को भ्रष्ट या गैर-प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के नाम भेजने के लिए कहा, ताकि हर महीने जबरन सेवानिवृत्ति पर विचार किया जा सके. डीओपीटी ने अपने पत्र में 22 जून को कहा था कि मंत्रालयों/ विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी सरकारी कर्मचारी को समय से पहले जनहित में रिटायर करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया जैसे नियम का सख्ती से पालन किया जाता है और यह निर्णय एक मनमाना है.

हालांकि, डीओपीटी के सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इन विवरणों को पेश करने पर अपने पैर पीछे खींच रहा है.डीओपीटी पत्र में मंत्रालयों और विभागों से विवरण भेजने के साथ साथ यह भी पूछा है कि संबंधित व्यक्तियों ने कितनी बार छुट्टी ली है, क्या उन पर कभी जुर्माना लगाया गया है और उनके करियर के दौरान कितनी बार पदोन्नति हुई.सरकार यह भी जानना चाहती है कि संबंधित कर्मचारियों की स्वास्थ्य स्थिति क्या है और क्या इसका उनके काम पर कोई असर पड़ता है, क्या उनकी सेवाओं को उपयोगी माना जाता है, चाहें वे पद पर बने रहने के लिए फिट हों या उनकी ईमानदारी पर संदेह का कोई कारण हो. जैसे संपत्ति, भ्रष्टाचार, अनौपचारिक प्रतिक्रिया, आदि में संदिग्ध लेनदेन की शिकायत.

भ्रष्टाचार के विरोध में कार्रवाई

इस साल मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सरकार ने यह लक्ष्य रखा था कि जिन अधिकारियों का नाम भ्रष्टाचार में संलिप्त है उनको निकलना है.इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार को हटाने के लिए कई कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, ‘आपने पिछले पांच सालों में देखा होगा और इस बार सत्ता में आने के बाद हमने कई लोगों को बर्खास्त कर दिया है, जिन्होंने सरकार में मलाईदार पदों का आनंद लिया है ,जो लोग हमारे प्रयासों में बाधा डालते थे. (भ्रष्टाचार मिटाने के लिए) हमने उनसे कहा कि वे अपना बैग पैक करें (क्योंकि) देश को (उनकी) सेवाओं की आवश्यकता नहीं है.’अब तक, सरकार ने केवल भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों को हटाया है

आईएएस अधिकारियों को देना होगा अचल संपत्ति का ब्यौरा

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की तरह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों को भी अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा देना होगा। महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारियों को वर्ष 2019 की वार्षिक अचल संपत्ति का ब्यौरा 31 जनवरी, 2020 तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन जमा करना होगा। इसमें 1 जनवरी, 2020 तक की वार्षिक अचल संपत्ति का विवरण शामिल होगा।

केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। ऐसा न करने वाले आईएएस अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी गई है। जो अधिकारी ऐसा नहीं करेंगे उन्हें प्रमोशन और विदेश में पोस्टिंग के लिए जरूरी सतर्कता मंजूरी नहीं दी जाएगी।

31 जनवरी के बाद ऑनलाइन विवरण पत्र जमा करवाने की सुविधा बंद हो जाएगी। ऑनलाइन विवरण जमा करवाने के बाद आईएएस अधिकारियों को संपत्ति संबंधी जानकारी की अलग से हार्ड कॉपी जमा करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर किसी कारणवश अफसर ऑनलाइन विवरण जमा नहीं करवा पाते हैं, तो उन्हें फार्म की स्कैन कॉपी अपलोड करने की सुविधा होगी।

महाराष्ट्र के करोड़पति नौकरशाह
नौकरशाहों की संपत्ति में हर साल इजाफा हो रहा है। वर्ष 2018-19 में महाराष्ट्र कैडर के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने करोड़ों की संपत्ति घोषित की थी। महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारियों में सीएमओ के प्रधान सचिव भूषण गगराणी की संपत्ति सर्वाधिक 15.97 करोड़ रुपये थी। इसमें मुंबई में 2, नवी मुंबई में 1 घर, मुंबई में एक दुकान, 4 भूखंड व कोल्हापुर में पैतृक संपत्ति शामिल थी। प्रवीण दराडे के पास 13.49 करोड़ और प्रवीण परदेशी ने अपनी कुल 12.5 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। वी राधा की कुल संपत्ति 11.42 करोड़ रुपये, जबकि मनोज सौनिक के पास 10.90 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति थी। संजय कुमार वर्मा ने 11. 65 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी।

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