बोधगया सीरियल ब्लास्ट केस : दोषियों को उम्रकैद: गुनहगारों को अंजाम तक पहुंचाने में IPS विकास वैभव का बड़ा हाथ

हैदराबाद/पटना/गया: बौद्धधर्मावलंबियों के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बोध गया के महाबोधि मंदिर के करीब पांच साल पहले हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने शुक्रवार को सभी पांच दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं ने प्रसन्नता व्यक्त की है। खासकर NIA की पुख्ता जांच और तब जांच टीम का नेतृ्तव कर रहे अधिकारी विकास वैभव की सब सराहना कर रहे हैं। मामले में एनआईए की तरफ से दाखिल मुकम्मल चार्जशीट ने केस के शीघ्र निपटारे और दोषियों को सख्त सजा दिलाने में सहयोग किया। जिसका पूरा श्रेय एनआईए के तत्कालीन एसपी विकास वैभव को दिया जा रहा है।बता दें कि सात जुलाई 2013 की सुबह महाबोधि मंदिर में एक के बाद एक धमाके हुए थे, जिससे पूरा क्षेत्र दहल गया था। इस धमाके में एक तिब्बती बौद्घ भिक्षु और म्यांमार के तीर्थ यात्री घायल हो गए थे। बौद्घ मंदिर के अंदर और बाहर कुल 13 बम लगाए गए थे। इसमें से 10 बमों में विस्फोट हुआ और तीन जिंदा बम बरामद किए गए थे। आतंकी साजिश को देखते हुए सरकार ने घटना की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंप दिया। शाम होते होते दिल्ली से एनआईए की टीम बोध गया पहुंची। जिसे बतौर एसपी विकास वैभव ही लीड कर रहे थे

तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने बिना समय गंवाए सबसे पहले तमाम साक्ष्यों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। रात भर आईपीएस वैभव के साथ बाकी एनआईए के लोग जगे रहे और काम करते रहे। बारीक से बारीक साक्ष्यों को भी एनआईए के अफसरों ने नजरों से ओझल नहीं होने दिया।जब बोधगया के दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई तब विकास वैभव हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग सेशन में व्यस्त थे। फैसले के बाद उनके चेहरे पर संतोषजनक मुस्कान देखने को मिली। वाकई जिस काम को लगन से किया जाय, उसके अंजाम तक पहुंचने की खुशी ही कुछ और होती है।

बोधगया ब्लास्ट पर फैसले के बाद बौद्ध भिक्षुओं ने भी खुशी जाहिर की है, साथ ही अनौपचारिक बातचीत में बौद्ध भिक्षुओं ने तब NIA की ओर से की गई कार्रवाई की सराहना की।भटकल और उसके साथियों को अंजाम तक पहुंचाने में वैभव का हाथ

हैदाराबाद के दिलसुखनगर ब्लास्ट मामले की NIA जांच का नेतृत्व भी विकास वैभव ने ही किया था। इस मामले में भी एनआईए की जांच रिपोर्ट को कोर्ट ने स्वीकारा और यासीन भटकल सहित चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई। मामले में NIA ने 500 से अधिक दस्तावेजों की जांच की थी। विकास वैभव की जांच रिपोर्ट की स्पष्टता और धार ने आतंकियों को अंजाम तक पहुंचाया।

जानकारों की मानें तो विकास वैभव के कुशल नेतृत्व ने इंडियन मुजाहिद्दीन के स्लिपर सेल की कमर तोड़ दी। हैदराबाद ब्लास्ट पहला मामला था जिसमें किसी इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकवादी को दोषी ठहराया गया था।

बता दें कि 21 फरवरी 2013 में हैदराबाद के दिलसुखनगर ब्लास्ट में 18 लोगों की मौत हुई थी जबकि 131 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

                                                                   बगहा में विकास वैभव चौराहा

अब तक आपने राजनेताओं के नाम से चौक चौराहे का नामकरण सुना होगा। बिहार के लोगों ने बीते एक सितंबर को बगहा में एक चौराहे का नाम आईपीएस विकास वैभव के नाम से किया। इस बात की चर्चा राष्ट्रीय मीडिया में भी हुई। बगहा को कभी बिहार का मिनी चंबल माना जाता था। कम ही समय में तत्कालीन पुलिस कप्तान विकास वैभव ने इलाके को अपराध मुक्त किया। इसके लिए उन्होंने दिन रात एक कर मेहनत की थी। जिस समर्पण के साथ इन्होंने काम किया, उसे सामाजिक मान्यता और मान देने के लिए लोग आगे आए।बाहुबली अनंत सिंह को किया था गिरफ्तार

पटना के एसएसपी रहते विकास वैभव ने वो धमाल किया था। जिसकी गूंज आज तक सुनी जाती है। एसएसपी का प्रभार ग्रहण करते ही विकास वैभव के सामने अनंत सिंह के खिलाफ केस की चुनौती सामने थी। अप्रत्याशित तौर पर चार्ज लेने के अगले ही दिन लाव लश्कर के साथ तत्कालीन एसएसपी विकास वैभव ने अनंत सिंह के घर पर धावा बोल दिया।

अनंत सिंह और बाकी लोगों को लगा था कि वैभव अभी नए आए हैं। सियासी आकाओं से दिशानिर्देश लेंगे और सोच विचार कर ही अनंत के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इसके उलट अप्रत्याशित कार्रवाई से अनंत सिंह और उनके समर्थक भी हक्के बक्के रह गए। जांच के दौरान भी विकास वैभव ने सख्ती दिखाई और विधायक के सरकारी बंगले की जमीनों को खुदवा कर कई साक्ष्य इकट्ठा करवाए। जिसके बाद फाइल की गई चार्जशीट के दम पर बाहुबली विधायक को महीनों तक जेल की हवा खानी पड़ी थी।रोहतास इलाके में नक्सलियों को पिलाया पानी

साल 2008 में अगस्त से फरवरी 2011 तक विकास वैभव रोहतास के एसपी थे। इलाके में नक्सलियों के असर ने विकास वैभव को आक्रोशित किया। घरेलू आतंक का सबब बने नक्सलियों को वैभव ने सबसे पहले चेतावनी दी और मुख्यधारा में लौटने का न्यौता दिया। नक्सली जब नहीं माने तो विकास वैभव ने अपनी टीम के साथ पहाड़ी और जंगली इलाकों में धावा बोल दिया।

रात बिरात नक्सली ठिकानों पर पुलिस की दबिश ने इलाके में नक्सलियों के प्रभाव को कम किया। सासाराम के रोहतास फोर्ट पर नक्सलियों ने कब्जा जमा लिया था। दुर्गम इलाका होने की वजह से पुलिस ने किले को अनदेखा कर रखा था। विकास वैभव के प्रयास से ही नक्सलियों को ये किला छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद पहली बार यहां भारतीय तिरंगा फहराया गया।

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