प्रधानमंत्री ने सुबह 7 बजे लद्दाख बॉर्डर पर पहुंच कर देश को चौंकाया

नई दिल्ली कार्यालय ।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो अपनी कई विशेषता पूर्ण व्यक्तित्व के कारण प्रसिद्ध है, उसी व्यक्तित्व का अनुसरण करते हुए आज सुबह-सुबह उन्होंने देश को एक बार फिर से चौंका दिया । देश के इतिहास में ऐसी कम ही घटना घटी है जब अचानक सुबह 7:00 बजे देश का प्रधानमंत्री लद्दाख बॉर्डर पर अर्थात रणभूमि पर पहुंचकर सेना के साथ चीन की हिमाकत का सीधा नजारा देख रहा हो । आज सुबह 10:00 बजे के बाद जैसे ही देश की इलेक्ट्रॉनिक चैनल को इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई तो सीधा प्रसारण लद्दाख बॉर्डर से ही प्रारंभ हो गया । जानकारी के अनुसार देश के प्रधानमंत्री सुबह 7:00 बजे लद्दाख बॉर्डर अर्थात गलवान घाटी से जुड़े हुए इलाके में पहुंच गए थे । जहां उन्होंने सबसे पहले पहुंच कर विवादास्पद जगह का मौका मुआयना किया एवं देश के पूर्व सेना प्रमुख बिपिन रावत सहित अन्य अधिकारियों के साथ घायल सैनिकों से जाकर  उन्होंने मुलाकात की । इस संबंध में रक्षा विशेषज्ञों का मत है कि देश के प्रधानमंत्री का वर्तमान परिस्थिति में बॉर्डर पर पहुंच जाना सेना के लिए बहुत बड़ा हौसला अफजाई है एवं चीन की आंखों में आंखें डाल कर इस बात का जवाब देना है कि हम भारतीय किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं है और अब किसी की तरह का धोखा खाने के लिए भी तैयार नहीं है । सेना अधिकारी बताते हैं कि इस कार्रवाई से सेना के मनोबल पर अच्छा असर पड़ेगा ।

नीमू पोस्ट पर अधिकारियों से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नीमू की फॉरवर्ड पोस्ट पर पहुंचे. यहां पर सीनियर अधिकारियों ने उन्हें मौके की जानकारी दी. पीएम मोदी ने सेना, वायुसेना के अफसरों से सीधे संवाद भी किया.  बता दें कि नीमू पोस्ट समुद्री तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद है, जिसे दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक पोस्ट में से एक माना जाता है.जानकारी के मुताबिक, अपने इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 कॉर्प्स के अधिकारियों से बात की. इसके अलावा CDS बिपिन रावत के साथ मिलकर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान नॉर्दन आर्मी कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भी मौजूद रहे.

पूरे देश के मोटिवेशन पर होगा बहुत अच्छा असर

प्रधानमंत्री मोदी लेह पहुंचे हैं, इसका बहुत अच्छा असर सिर्फ सेना के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के मोटिवेशन पर होगा। इसका सकारात्मक पक्ष ये है कि नेता जब खुद स्पॉट या फ्रंटलाइन पर जाता है तो वो पर्सनली सिचुएशन को रिव्यू करते हैं।

वरना उन्हें लेयर बाय लेयर से गुजरने के बाद ब्रीफिंग से स्थिति का पता चलता है। जिसमें टाइम गैप बहुत हो जाता है, एनालिसिस करने और वैल्यू एड होने के बाद उन्हें जानकारी मिलती है। ऑन स्पाट असेसमेंट का अलग असर होता है, इसमें वो सीधे उन लोगों से समझते हैं जो उससे जुड़े हैं और स्थिति का सामना कर रहे हैं। सोल्जर्स से खुद सुनना बेहद खास है। छोटी-छोटी बातें पता चलती हैं और कई बार छोटे फैसले तुरंत हो जाते हैं। ऑनग्राउंड उनको बताया जाता है, ये होगा तो अच्छा होगा और वे सीधे ऑर्डर देते हैं कि ऐसा करो। इससे एक्शन-रिएक्शन जल्दी होता है। बीच में कोई मंत्रालय, कोई फाइल नहीं आती। पीएम का जाना वहां तैनात सैनिकों के हौसले के लिए बहुत बड़ी बात है। ये सिग्नल है कि देश आपके साथ है और सरकार सेना के साथ रहेगी हर चीज में, हर एक्शन के लिए। पीएम का जाना ये भी दर्शाता है कि मोदी ने आर्मी कमांडर को आजादी दे दी है और ऑनग्राउंड कुछ होता है तो भारत सरकार और देश का प्रधानमंत्री उनके साथ हैं।

फिजिकली पीएम का जाना जहां एक्शन हो रहा है, ये इसलिए मायने रखता है कि ऑनग्राउंड ऑपरेशन में क्या होगा कोई नहीं जानता, ऐसे में सोल्जर को नहीं पता होता कि जो हमारा कमांडर बोल रहा है, क्या सरकार भी साथ है। मोदी के जाने से उन सोल्जर्स को ये पता चलेगा कि सरकार हमारे साथ है। सोल्जर्स के लिए जान देना एक बात होती है और उनकी शहादत को पहचान देना अलग।

 

 

मोदी  इससे पहले भी ऐसे चौंकाने वाले दौरे करते रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  इससे पहले भी ऐसे चौंकाने वाले दौरे करते रहे हैं। दो बार वे एलओसी पर पहुंचकर सैनिकों के साथ दिवाली मना चुके हैं। उनका सबसे पहला चौंकाने वाला दौरा 2015 में पाकिस्तान का हुआ था। तब अफगानिस्तान दौरे से लौटते समय उन्होंने अपना विमान पाकिस्तान में उतरवा लिया था और नवाज शरीफ के घर शादी में पहुंच गए थे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक 6 साल में उन्होंने ऐसी 9 सरप्राइज विजिट की हैं।

19 फरवरी 2020: दिल्ली के मेले में लिट्‌टी-चोखा खाया था
प्रधानमंत्री मोदी इस साल 19 फरवरी को नई दिल्ली में राजपथ के पास लगे हुनर हाट पहुंचे। यहां उन्होंने बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी चोखा का स्वाद चखा। वे अलग-अलग स्टॉल पर घूमे और कारीगरों का उत्साह बढ़ाया।

 

27 अक्टूबर 2019: एलओसी पर जवानों को दिवाली की मिठाई खिलाई
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले साल मोदी ने दिवाली राजौरी में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर सैनिकों के साथ मनाई। तब प्रधानमंत्री ने बीजी ब्रिगेड हेडक्‍वार्टर्स में जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई थी।

7 नवंबर 2018: उत्तराखंड के हर्षिल पहुंचे थे
इस साल मोदी ने दिवाली उत्तराखंड के हर्षिल में मनाई। वे जवानों से मिले। उन्‍होंने तब केदारनाथ मंदिर में दर्शन भी किए थे।

18 अक्टूबर 2017: एलओसी पर गुरेज सेक्टर पहुंचे
मोदी ने इस साल की दिवाली भी जवानों के बीच मनाई। वे जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के बीच पहुंचे। उन्होंने जवानों के बलिदान की सराहना करते हुए उन्हें अपना परिवार बताया था। साथ ही कहा था, ‘‘मैं जब भी आपसे हाथ मिलाता हूं मुझे बहुत ऊर्जी मिलती है। मैं देखता हूं कि इन मुश्किल हालात में आप कैसे तपस्‍या और त्‍याग कर रहे हैं।’’

 

30 अक्टूबर 2016: हिमाचल के सुमडो में सैनिकों के बीच पहुंचे थे
मनाने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारत-चीन बॉर्डर के पास पहुंचे थे। यहां उन्होंने सुमडो में जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस मौके पर उन्होंने जवानों से कहा था कि वे 2001 से हर साल जवानों के साथ दिवाली मनाते आ रहे हैं।

11 नवंबर 2015: अमृतसर में सैनिकों के साथ दिवाली मनाई
मोदी अमृतसर में सैनिकों के बीच दिवाली मनाने पहुंचे थे। वहां उन्होंने डोगराई वॉर मेमोरियल पहुंचकर 1965 युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी थी। वे असल उत्तर स्मारक और परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की समाधि पर भी पुष्प अर्पित करने पहुंचे थे।

 

23 अक्टूबर 2014: पीएम बनने के बाद पहली दिवाली सियाचिन में मनाई
केंद्र की सत्‍ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली दिवाली सियाचिन में जवानों के साथ मनी थी। उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र पहुंचकर जवानों के साथ दिवाली मनाने की परंपरा शुरू की थी।

25 दिसंबर 2015: अचानक पाकिस्तान पहुंचे थे
मोदी अफगानिस्तान दौरे से लौटते समय अचानक लाहौर पहुंच गए थे। उन्होंने यहां तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी। उनकी नातिन की शादी में शरीक हुए और उसे आशीर्वाद दिया था। लाहौर से करीब 40 किलोमीटर दूर वे शरीफ के पुश्तैनी घर पहुंचे थे। यहां करीब 90 मिनट ठहरने के बाद वे दिल्ली लौट आए थे।

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