अपने ही नेताओं – कार्यकर्ताओं को बरबाद करती पार्टियाँ

विवेक सक्सेना ///बहुत पहले एक नेता ने कहा था कि हम किसी को टिकट देते समय उसके जीतने की क्षमता या संभावना से कहीं ज्यादा उसके द्वारा पार्टी को नुकसान पहुंचाए जाने की संभावना के बारे में सोचते हैं व उसे अहमियत देते हैं। आज लगभग हर राजनीतिक दल में यहीं देखने को मिल रहा है। नेता जिस सीढ़ी के सहारे शीर्ष तक पहुंचते हैं, ऊपर पहुंचने पर सबसे पहले उसे ही लात मारकर गिरा देते हैं।लालकृष्ण आडवाणी ने तो नरेंद्र मोदी को उस समय बचाया था जबकि प्रधानमंत्री वाजपेयी 2002 के गुजरात दंगों के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते थे। बाद में मोदी ने सत्ता में आते ही उन्हें निपटाया। पहले तो उन्हें मंत्रालय में नहीं लिया और बाद में 75 साल से अधिक आयु का हो जाने की आड़ में उनका लोकसभा का टिकट ही काट दिया।बेचारा कार्यकर्ता जीवनभर पार्टी का जनाधार बनाने में व्यस्त रहता है मगर जब टिकट मिलने की बात आती है तो अक्सर हाल ही में पार्टी में शामिल हुए किसी अन्य व्यक्ति को टिकट दे दिया जाता है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावो में यह बात खुलकर देखने को मिली। हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र तक एकजैसी प्रक्रिया नजर आई। मुझे थोड़ा दुख तब हुआ ज भाजपा कि प्रतिबद्ध कार्यकर्ता व जानी-मानी महिला समाजसेवी शायाना एनसी की टिकट काटकर उनकी जगह उनकी प्रस्तावित भायखला विधानसभा सीट भाजपा ने शिव सेना को दे दी।

शायना उन चंद महिलाओं में से है जिन्होंने अपनी कार्य प्रणाली से मुझे प्रभावित किया है। उनका पूरा नाम शायना नाना चुदास्मा है उनके पिता मूल रूप से गुजरात के राजकोट से थे जो कि मुंबई आकर बस गए थे। वे मुंबई के मेयर व शेरिफ रहे। वे समाज सेवा में बहुत व्यस्त रहते थे। उन्होंने आई लव मुंबई व ‘ज्याटंस इंटरनेशनल’ नामक एनजीओ बनाए।शाइना बीजेपी की नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मेंबर भी हैं। वे महाराष्ट्र बीजेपी यूनिट की ट्रैज़रर भी हैं

उनकी बेटी शायना एनसी को बचपन से ही समाज सेवा का बहुत लगाव था। उन्हें ‘क्वीन ऑफ ड्रॉप्स’ के नाम से भी जाना जाता है। शाइना एनसी के नाम गिनीज बुक में सबसे तेजी से साड़ी पहनने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। वे आईएएस अधिकारियों की पत्नियों को साड़ी पहनने की ट्रेनिंग भी देती हैं।उन्हें नए-नए वस्त्र डिजाइन करने का भी शौक था। भारतीय परंपरा से प्रभावित शायना ने फैशन टेक्नोलॉजी में पढ़ाई करने के बाद साडि़यो के क्षेत्र में विशेष अहमियत हासिल की। वे गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स के मुताबिक 54 तरीको से साडि़या बांध सकती है व छह गज की साडी को चंद मिनटो के अंदर ही पहन सकती है। फैशन शो में इस प्रतिभा का वह कई बार प्रदर्शन भी कर चुकी है। वहीं कई टी.वी सीरियलों में भी उनकी डिजाइन की गई साड़ियों को पहना जाता है।उनका कहना है कि साड़ी ऐसा वस्त्र है जोकि आपके दुबलेपन व मोटापे दोनों को ही छिपाता है। वे चूंडीदार पायजापा व स्कर्ट के अपर भी साड़ी बांध लेती है व उन्होंने रेडीमेड साडि़या तैयार की है।

उन्होंने कारीगरो की एक टीम रखी हुई है जोकि अपनी साडि़यां तैयार करते है। गोपीनाथ मुंडे उन्हें 2004 में भाजपा में लेकर आए। वह पढ़ी लिखी, युवा व स्मार्ट महिला है व टीवी चैनलो पर अक्सर वाद-विवाद कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। उन्हें संसद या विधानसभा का उम्मीदवार बनाए जाने की अक्सर चर्चा होती रही है मगर उन्हें यह मौका नहीं मिला। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा के लिए चुनाव लड़ रहे थे, तब मुंबई में शाइना एनसी ने उर्दू वेबसाइट लॉन्च की थी। इस वक्त उनके साथ सुपरस्टार सलमान खान के पिता सलीम खान भी थे।आजकल वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता है। पहली बार उन्हें 2009 में मुंबई के मलबार हिल्स से टिकट दिए जाने की चर्चा हुई मगर बाद में उनका टिकट काट दिया गया।

जब 2014 में लोकसभा चुनाव हुए तो उन्हें राज्यसभा में भेजे जाने की चर्चा होने लगी। मगर विधानसभा चुनाव में दलित वोटो को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने उनकी जगह रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले को राज्यसभा में भेज दिया। जबकि वहीं गोपीनाथ मुंडे व प्रमोद महाजन की बेटियों को लोकसभा, विधानसभा का टिकट दे दिया गया। विधानसभा चुनाव में भायखला चुनाव क्षेत्र से उनको टिकट मिलना तय माना जा रहा था।

इस सीट पर भाजपा की जीत तय थी मगर देवेंद्र फडणवीस ने कुर्सी की लालच में शिव सेना के साथ हुए समझौते के तहत यह सीट उन्हें देते हुए शायना की राजनीतिक बलि दे दी। शायना ने इस क्षेत्र में काफी काम किया था और अपने एनजीओ की मदद से भायखला स्टेशन को ‘हमारा स्टेशन हमारी शान के तहत गोद भी लिया था व उसके सौंदर्यीकरण व नवीनतम बनाए रखने पर काफी काम भी किया था। मगर न सिर्फ उनका टिकट काटा गया बल्कि उनकी जगह जिस यामिनी जाटव को शिव सेना ने टिकट दिया उन्हें उसके जिताने के लिए भी काम करना पड़ा। तभी उनकी मानसिक स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। मगर कैडर आधारित पार्टी होने के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा ने वह सब किया जाने लगा है जिसके कारण पार्टियां अपने ही नेताओं व कार्यकर्ताओं को दरकिनार करके बरबाद कर देती है।

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