पत्थलगड़ी मुद्दा : छत्तीसगढ़ के रिटायर्ड आईएएस हरमन किंडो और जोसेफ तिग्मा गिरफ्तार

 जशपुर।छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी का मुद्दा गरमाता जा रहा है। प्रशासन ने भी इस पर सख्त रूख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में सोमवार को रिटायर्ड आईएएस एएस हरमन किंडो और जोसफ तिग्मा को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर धार्मिक सद्भावना बिगाड़ने सहित संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

– जानकारी के मुताबिक, दोनों अधिकारियों पर आदिवासियों को भड़काने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक दोनों लंबे समय से ईसाई समुदाय के साथ मिलकर आदिवासियों के बीच काम कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से पत्थलगड़ी मामले में गैर जमानती धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

– दोनों आरोपियों के खिलाफ बगीचा थाने में तीन अपराध दर्ज किए गए हैं। जबकि नारायणपुर थाने में एक मामला दर्ज हुआ है। यह सभी मामले गैरजमानती धाराओं में हैं। नारायणपुर में 149,153 B,505(1)(c) और 120B के तहत तथा बगीचा में 120B,147,149,186,332,341,353,427 के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं। हालांकि अभी यह नहीं पता चल सका है कि मामला किसकी ओर से दर्ज कराया गया है।

– पुलिस अभी इस मामले में कुछ भी कहने से फिलहाल बच रही है। हालांकि कहा जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच मीडिया से बचाते दोनों को कोर्ट में पेश किया।

– बता दें कि रिटायर्ड आईएएस हरमन किंडो डिप्टी कलेक्टर रह चुके हैं, जबकि जोसेफ तिग्मा को आदिवासी नेता बताया जा रहा है।

– जशपुर के आसपास के गांवों में पत्थलगड़ी को लेकर विवाद चल रहा है। बीजेपी की सद्भावना यात्रा भी चल रही है। इस दौरान यहां पत्थलगड़ी तोड़ने के कारण विवाद और बढ़ गया था। सद्भावना यात्रा के दौरान नेताओं के जाने के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नाराज ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था।

– इसके बाद सभी लोग आधी रात के बाद ही ग्रामीणों के चंगुल से बाहर आ सके। हालांकि प्रशासन की ओर से बंधक बनाने की बात से इनकार करते हुए ग्रामीणों से बात करने के लिए रुकने की बात कही गई।

– सर्व आदिवासी समाज ने भी ग्रामीणों का समर्थन करते हुए इसे अपना संवैधानिक बताया था। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। आदिवासियों की मुहिम की अगुवाई कर जोसेफ तिग्गा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ किंडो के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया है।

ऐसे बिगड़ा मामला

– छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में चल रहा पत्थलगड़ी आंदोलन उग्र हो गया है। यहां के बटुंगा, बच्छरांव और सिहारडांड गांव में लोगों ने खुद की सत्ता वाले पत्थर लगा दिए हैं। प्रशासन और बाहरी लोगों के आने पर रोक लगा दी है।

– ऐसे में भाजपा की ओर से सद्भावना यात्रा का आयोजन शनिवार को किया गया था। मामल तब बिगड़ गया जब एक महिला नेत्री ने मंच से एलान किया कि हम ये पत्थलगड़ी तोड़ेंगे। इसके बाद यात्रा में शामिल लोगों ने पत्थलगड़ी को तोड़ना शुरू कर दिया। इसके विरोध में ग्रामीण आ गए। विरोध तनाव और बहस के बाद बड़े हंगामे में बदल गया।

– इस दौरान नेता और सद्भावना यात्रा में शामिल लोग तो निकल गए, लेकिन चार अधिकारी और 15 पुलिसकर्मी फंस गए। शुरुआत में ग्रामीणों ने यह आग्रह कर रोक लिया कि, उनके पत्थलगड़ी को तोड़ा गया है वे तोड़ने वालो के खिलाफ कार्यवाही का आवेदन ले लें। इस बीच कुछ लोगों के स्वर आक्रोश में बदल गए कि जब पत्थलगड़ी तोड़ा गया, तो तोड़ने वालों को क्यों नहीं रोका गया।

जशपुर के नक्सल मुक्त घोषित होने का विरोध
– 10 दिन पहले 18 अप्रैल को ही जशपुर जिले को नक्सल मुक्त घोषित किया गया था। महज चार दिन के भीतर ही आदिवासियों ने जिले के तीन गांव बच्छरांव, सिहारडांड और बटुंगा में पत्थर गाड़कर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी। तब से क्षेत्र में तनाव था।
– हालात का जायजा लेने एक दिन पहले ही भास्कर टीम वहां पहुंची थी और पाया कि बच्छरांव और आसपास के दर्जनभर गांवों में हालात ठीक नहीं है। लोगों के तेवर काफी उग्र हैं।
– बच्छरांव पहुंचते ही भास्कर टीम को दाउद कुजूर और मिलियन मिंज ने रोककर आने की वजह पूछी। फिर एक रजिस्टर में पूरा ब्योरा दर्ज किया। इस रजिस्टर में पहले चारों नाम भास्कर टीम के ही दर्ज हुए। यानी इससे पहले पत्थलगड़ी के बाद गांव में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंचा था।
– लोगों ने बताया कि उनकी लड़ाई हक, रोजगार और शोषण के खिलाफ है। सबने कहा- सरकार से कोई लड़ाई नहीं है। पर जिसे यहां आना है, हमारी इजाजत से आए। जो भी फैसला होगा, ग्रामसभा ही सर्वोच्च रहेगी… सब वही तय करेगी, कोई और नहीं।
– लोगों ने बताया कि बच्छरांव में पत्थलगड़ी 22 अप्रैल को हुई, लेकिन यहां और आसपास के दर्जनभर गांवों में छह माह से सरकारी अमले के खिलाफ लोग लामबंद हो रहे हैं।
– तैयारी कौन करवा रहा है, इस पर लोग खामोश हैं। वो कहते हैं कि आसपास के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में भी जल्द पत्थलगड़ी होगी। इससे लगता यह कि यह आंदोलन सुनियोजित तरीके से चल रहा है।

लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं नहीं: ग्रामीण
– पत्थलगड़ी मूवमेंट के बाद कुनकुरी के सामाजिक कार्यकर्ता जोसेफ तिग्गा का नाम उछला, इन गांवों के लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं जानते। सब आपस में ही फैसला लेते हैं।
– गांव के लोगों का कहना है कि यहां के गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। 2013 से रोजगार गारंटी का पैसा नहीं मिला। तालाब खुदाई और सड़क का काम बरसों से बंद है। गांव का बोर हर साल सूख जाता है। पीने का पानी नहीं है।
– 6 महीने पहले प्रशासन ने नया बोर करवाया। पर अब तक उसमें पंप नहीं लगा है।
– सिहारडांड और बटुंगा से नदी गुजरती है। बारिश में दोनों गांव चार महीने बाकी राज्य से कट जाते हैं। 10 साल से पुल मांग रहे हैं, अब तक योजना ही नहीं बनी।
– सिहारडांड के साथ कलिया में अब तक बिजली नहीं आई है। सौर उर्जा का सहारा है। हर घर में एक ही बल्ब जलता है, टीवी वगैरह भी नहीं है।
– यहां एक सीसी रोड बनती दिखी। लोगों ने बताया कि 18 साल से मांग रहे थे, अब काम शुरू हुआ है। पता नहीं, कितने साल चलेगा। पुलिस पर सबसे ज्यादा आरोप हैं।

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