नान घोटाला : मुख्यमंत्री बघेल और रमन सिंह में तीखी नोक-झोंक,गलत जानकारी का आरोप

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में चल रहे शीतसत्र के छठवें और अंतिम दिन नान घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह में तीखी नोक-झोंक हुई। पूर्व सीएम ने नान घोटाले में पीआईएल लगाने वाले वकीलों की जानकारी मांगी और सरकार पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछली सरकार को 15 साल का हिसाब देना चाहिए। घोटाले की जांच रोकने के लिए कोर्ट जाते हैं। इसके बाद दोनों ओर से बहस तेज हो गई।

रमन बोले- हरीश साल्वे, रविंद्र श्रीवास्तव कभी हाईकोर्ट नहीं अाए, सीएम ने कहा- पिछली सरकार में कितने आए सबका हिसाब मेरे पास

  1. दरअसल, विधानसभा में सोमवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नान घोटाले में पीआईएल लगाने वाले वकीलों की जानकारी मांगी। साथ ही उन्होंने निजी वकीलों पर शासन की ओर से किए गए खर्चों और उन्हें शासकीय विमान उपलब्ध कराने की भी जानकारी मांगी। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि अधिवक्ता दयन कृष्णन को था 81 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इसके साथ ही वकील हरीश साल्वे और रविंद्र श्रीवास्तव की सेवाएं ली गईं।
  2. सीएम मैडम, सीएम सर कौन हैं… आज तक जवाब नहीं आया

    इस पर पूर्व सीएम ने कहा कि हरीश साल्वे कभी बिलासपुर हाईकोर्ट आए ही नहीं। रविंद्र श्रीवास्तव भी कभी नहीं पहुंचे। उन्होंने सरकार पर विधानसभा में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। इस पर दोनों ओर से बहस शुरू हो गई। सीएम बघेल ने रमन सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सीएम मैडम, सीएम सर कौन है, लोग जानना चाहते हैं। उसका जवाब तो आज तक नहीं आया। कहा कि रमन सिंह की सरकार में भी बाहर के वकील को बुलाया गया था। किसे कब और कितना भुगतान किया गया सबका हिसाब मेरे पास है।

  3. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूर्व सरकार को अपने 15 सालों के खर्च का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नान घोटाले की जांच रोकने नेता प्रतिपक्ष पीआईएल लगाते हैं। मुख्यमंत्री बघेल की इस टिप्पणी पर सदन में एक बार फिर जोरदार नोंकझोंक हुई। पक्ष-विपक्ष के सदस्य खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। वहीं विधायक मोहन मरकाम ने पूछा नान घोटाले में कौन-कौन लोग शामिल हैं और उनपर कार्रवाई होगी क्या। जवाब में सीएम बघेल ने कहा कि कार्रवाई के लिए ही तो एसआईटी का गठन किया गया है।
  4. शराबबंदी को लेकर विपक्ष का हंगामा, 10 विधायक निलंबित

    विधानसभा में शराबबंदी को लेकर मामला उठाया गया। विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर अड़ा हुआ था। शराबबंदी को लेकर विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और डॉ. रमन सिंह ने मामला उठाया। इसके बाद सदन में नारेबाजी शुरू हो गई और विधायक आसंदी तक आ गए। इस पर भाजपा, बसपा और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के 10 विधायक स्वत: ही निलंबित हो गए। हालांकि बाद में उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया।

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