ज्योतिरादित्य सिंधिया कितनी संपत्ति और कैसी है महल की खासियत है?

ज्योतिरादित्य सिंधिया इस मीडिया की सुर्खियों में बने हुए हैं, उन्हें लेकर कांग्रेस से बीजेपी तक ऊहापोह मची हुई हैं, सिंधिया राजपरिवार का एमपी में काफी सम्मान है, आजादी के बाद से ही ये परिवार देश की राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में रहा है, लोगों के बीच सम्मान से देखे जाने वाले इस परिवार में संपत्ति को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है, करीब तीस साल पहले जब इस परिवार में संपत्ति का विवाद शुरु हुआ, तो करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति थी, ये विवाद ज्योतिरादित्य के पिता और उनकी तीन बुआ के बीच है।

मामला निपटाने की कोशिश
हालांकि 2017 में ज्योतिरादित्य ने मामले को कोर्ट से बाहर निपटाने का निवेदन भी किया था, इंडिया लीगल वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक ज्योतिरादित्य के निवेदन पर कोर्ट ने कहा था कि विवाद से जुड़े लोग पढे लिखे हैं, अगर वो कोर्ट से बाहर मामले को निपटा लें, तो ये अच्छी बात है, जज ने ये भी कहा था कि सिंधिया परिवार से जुड़े संपत्ति के मामले बॉम्बे, दिल्ली, पुणे, जबलपुर और ग्वालियर कोर्ट में भी चल रहे हैं, हालांकि इन सभी में से किसी पर भी फैसला नहीं हो पाया है।ज्‍योतिरादित्‍य की संपत्त‍ि और उनकी जीवनशैली सपनों जैसी ही है। वह 400 कमरे वाले शाही महल में रहते हैं।

सन 1874 में बनकर तैयार हुए इस राज महल का नाम जयविलास पैलेस है। आपको बता दे, कि 400 कमरे वाले शाही महल में 40 कमरों में म्यूजियम, जबकि महल की सीलिंग पर सोने जड़े हुए हैं। इस भवन की कीमत करीब दो सौ मिलियन डॉलर बताई जाती है। सिंधिया का ग्वालियर का जय विलास पैलेस 1,240,771 वर्ग फीट क्षेत्र में महल फैला हुआ है। इस महल का वैभव पूरे भारत में मशहूर है। इसकी दीवारों पर सोने से पेंट किया गया है। इसकी खासियत ऐसी हैं कि आप भी दांतों तले अंगुली चबा जाएं। राजसी वैभव से भरे इस महल में भोजन परोसने के लिए चांदी से बनी ट्रेन चलती है।  पैलेस में रायल दरबार हॉल है, जो 100 फीट लंबा-50 फीट चौड़ा और 41 फीट ऊंचा है। इसकी छत पर 140 सालों से 3500 किलो के दो झूमर टंगे हैं। इसे टांगने के लिए इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथियों को 7 दिनों तक खड़ा रखा था इन झूमरों को बेल्जियम के कारीगरों ने बनाया था। पैलेस के डाइनिंग हॉल में चांदी की ट्रेन है जो खाना परोसने के काम आती है। माना जाता है कि जिस वक्त इस महल का निर्माण किया गया था, तब इसकी कीमत 1 करोड़ थी, लेकिन आज इस विशाल और आकर्षक महल की कीमत अरबों में है।

अकूत धन संपत्ति
देश आजाद होने के समय सिंधिया परिवार के पास 100 से ज्यादा कंपनियों के शेयर थे, जिसमें नामी कंपनी बॉम्बे डाइंग के 49 फीसदी शेयर भी शामिल था, परिवार के पास सिर्फ ग्वालियर में 10 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, जिसमें कई महल शामिल हैं, ग्वालियर के बाहर एमपी में परिवार के नाम 3 हजार करोड़ की संपत्ति है, जिसमें शिवपुरी के कई महल और उज्जैन का एक महल शामिल है, दिल्ली में परिवार के पास करीब 7 हजार करोड़ की संपत्ति है, जिसमें ग्वालियर हाउस, सिंधिया महल और राजपुर रोड पर एक प्लॉट शामिल है।ज्योतिरादित्य सिंधिया 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्‍यप्रदेश के सबसे अमीर प्रत्‍याशी थे। सिंधिया राजवंश की संपत्ति कितनी है, इसका अंदाजा लगाना तो मुश्किल है, लेकिन इसे 40 हजार करोड़ रुपए का बताया जाता है। सिंधिया ने 2014 की लोकसभा के दौरान जो हलफनामा दिया था, उसके मुताबिक उनके पास 32 करोड़ 64 लाख 412 रुपये संपत्ति है। उनके पास एक पैतृक बीएमडब्ल्यू कार भी है।इस 40 हजार की संपत्ति में उनके कई शहरों में बने हुए पैलेस और जमीनें शामिल हैं। लोकसभा चुनाव में सिंधिया ने गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से अपना नामांकन भरा, और इस दौरान दिए शपथ-पत्र में सिंधिया ने खुलासा किया है कि सिंधिया के पास पैतृक संपत्ति में 40 एकड़ में फैला ग्वालियर का जय विलास पैलेस है। इसके अलावा महाराष्ट्र में श्रीगोंड़ा में 19 एकड़ और लिंबन गांव मे 53 एकड़ जमीन है। इसके साथ ही रानी महल, हिरनवन कोठी, रैकेट कोर्ट, शांतिनिकेतन, छोटी विश्रांति, विजय भवन, पिकनिक स्पॉट, बूट बंगला, रेलवे कैरिज घंटीघर, इलेक्ट्रिक पॉवर हाउस रोशनी घर आदि रिहायशी संपत्तियां है। इन संपत्तियों की बाजार कीमत 2,97,00,48,500 रुपए है।व्यक्तिगत तीन करोड़ रुपये की है एफडीआर ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के साथ-साथ व्यक्तिगत तीन करोड़ रुपये की एफडीआर शामिल है। जयविलास पैलेस के अलावा दिल्ली में 32 एकड़ में फैली सिंधिया विला और ग्वालियर हाउस के अलावा, मुंबई में वसुंधरा बिल्डिंग, पुणे के पद्म विलास पैलेस, शिवपुरी का जर्ज कैसल और माधव विला पैलेस, उज्जैन का कालियादेह पैलेस सहित कई शहरों में मंदिर भी हैं।
माधवराव की बहनें
ज्योतिरादित्य की तीन बहनें थे, जिसमें उषा और बसुंधरा उनसे बड़ी और यशोधरा राजे छोटी थी, कहा जाता है कि यशोधरा ने ही मुख्य रुप से संपत्ति पर दावा ठोका है, सबसे बड़ी बहन उषा राजे नेपाल में शादी के बाद वहीं बस गई, वो नेपाल में राजघराने की बहू है, उनके पास खुद अच्छी खासी प्रॉपर्टी है, कुछ ऐसा ही बसुंधरा राजे के साथ भी है, उनकी शादी धौलपुर राज घराने में हुई है, लेकिन सबसे छोटी बहन यशोधरा की शादी एक लंदन बेस्ड डॉक्टर से हुई थी, बाद में दोनों का तलाक हो गया, जिसके बाद यशोधरा एमपी वापस लौट गई, वर्तमान में वो बीजेपी की विधायक हैं।

विवाद की कहानी
दरअसल इस विवाद की कहानी को समझने के लिये ग्वालियर राजघराने को इतिहास को जानना होगा, एमपी की राजनीति में सिंधिया परिवार का हमेशा से दखल रहा है,  कहा जाता है कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया और बेटा माधव राव सिंधिया के बीच ही मतभेद हो गये थे, दोनों के रिश्ते इतने खराब हो गये थे कि ग्वालियर के जयविलास पैलेस में रहने के लिये मां ने बेटे से 1 रुपये साल का किराया भी मांग लिया था, बेटे से मां इतनी नाराज थीं, कि 1985 में लिखी वसीयत में उन्होने माधवराव को अपने अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने देने की बात कही थी, हालांकि राजमाता का अंतिम संस्कार बेटे माधवराव ने ही किया था।

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