चैंबर में बलात्कार के आरोप ने मुश्किल में डाली IAS जनकराम पाठक की कलेक्टरी

जांजगीर कलेक्टर रहते IAS जनकराम पाठक पर एक एनजीओ संचालिका ने अपने चेम्बर में रेप करने का आरोप लगाया है। पाठक को 27 मई को सरकार नेे कलेक्टर से हटा कर राजधानी बुला लिया था।
एनजीओ संचालिका पूर्व जनपद सदस्य रह चुकी है। उसका पति शिक्षाकर्मी है। एनजीओ के काम के सिलसिले में जांजगीर कलेक्टर से उसकी अक्सर मुलाकात होती थी। इस दौरान कलेक्टर से उसके ताल्लुकात बढ़ते गए। महिला का आरोप है कि कलेक्टर ने एनजीओ का काम दिलाने का झांसा देकर अपने चेम्बर में ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। कलेक्टर ने उसके पति को भी ट्रांसफर कर जांजगीर में पोस्टिंग देने का आश्वासन दिया था। महिला का आरोप है कि कलेक्टर ने उसे घोखा दिया। न एनजीओ का काम दिलाया और न ही उसकी पति की पोस्टिंग कराई। उपर से उसे वे प्रताड़ित करने लगे।
महिला ने  पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर के पास पहुंचकर अपनी फरियाद की। आईएएस पर रेप के आरोप से ब्यूरोक्रेसी स्तब्ध रह गई। कलेक्टर जिले का न केवल मुखिया होता है बल्कि जिला दंडाधिकारी होता है। ब्यूरोक्रेट्स भी मानते हैं कि शर्मनाक घटना है। इसकी जल्द-से-जल्द जांच होनी चाहिए। छतीसगढ़ के  IAS जनक प्रसाद पाठक पर पहले ही बलात्कार की धाराओं में  एफआईआर दर्ज किया जा चुका था, अब उनके खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता के जाति प्रमाण पत्र पेश करने के बाद ये नयी धारा जोड़ी गयी है। पुलिस ने मामले में आइएएस जनक पाठक के खिलाफ धारा 376, 509 ख और 506 के तहत अपराध दर्ज कर लिया था। जाति प्रमाण पत्र पेश करने के बाद एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी जुर्म दर्ज कर लिया गया है। IAS जनक पाठक सस्पेंड कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर जांजगीर के पूर्व कलेक्टर जनक पाठक पर कार्रवाई की गयी है। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल को उच्च स्तरीय जांच के भी आदेश दिये हैं।

आरोप है कि कलेक्टर ने अपने चैंबर में भी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाये थे। इस मामले में 4 जून को महिला की शिकायत के बाद IAS के खिलाफ सिटी कोतवाली थाने में FIR दर्ज करायी गयी थी। महिला का आरोप है  कि वो एक काम के सिलसिले में तत्कालीन कलेक्टर के पास गयी थी, लेकिन उन्होंने उसे प्रलोभन देकर उसका बलात्कार किया।शिकायत के बाद कलेक्टर यशवंत कुमार ने एसपी पारूल माथुर को जांच के निर्देश दिये हैं।  जिस महिला ने ये गंभीर आरोप लगाया है, वो शादीशुदा है और पूर्व जनपद सदस्य भी रही है। पुलिस को मिली इस शिकायत के समर्थन में महिला ने कई साक्ष्य भी दिये हैं।

महिला का आरोप है कि 15 मई को उसके साथ कलेक्टरेट में ही कलेक्टर ने अपने चैंबर में ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। आरोप है कि महिला को एनजीओ का काम दिलाने के एवज में कलेक्टर ने उसे झांसा दिया और उसका बलात्कार किया। आरोप है कि महिला के साथ एक बार नहीं कई दफा कलेक्टर ने शारीरिक संबंध बनाया और बार-बार ये झांसा देता रहा कि जल्द ही उसके एनजीओ को काम दिला देगा, लेकिन करीब डेढ़ महीने बाद भी कलेक्टर ने महिला का काम नहीं किया।

महिला ने कलेक्टर के साथ अपनी बातचीत की रिकार्डिंग और कुछ तस्वीरें भी पुलिस को दी है। महिला ने जो बातचीत और मैसेज के सबूत दिये हैं, उसमें कलेक्टर की उससे नियमित बात होती थी। हैरानी की बात ये है कि महिला से ना सिर्फ कलेक्टर आपत्तिजनक बातें किया करते थे, बल्कि पर्सनल तस्वीरों की भी डिमांड किया करते थे। कई दफा कलेक्टर ने महिला की प्राइवेट पार्ट की भी तस्वीरें मोबाइल पर मंगायी थी।खुद भी कलेक्टर अपना पर्सनल फोटो भेजा करते थे। महिला का आरोप है कि जब कलेक्टर की तरफ से झांसा दिये जाने का अहसास उसे हुआ तो उसने कलेक्टर से दूरियां बनानी शुरू कर दी।

कलेक्टर को जैसे ही महिला का बदला व्यवहार नजर आया, उन्होंने उसे उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया, यही नहीं महिला का आरोप है कि उसके पति को नौकरी से बर्खास्त तक करने की धमकी दी गयी। कलेक्टर की दबंगई देखकर महिला सहम गयी। आरोप है कि इसलिए कलेक्टर रहते तक वो चुप रही और अब तबादला होने के बाद उसने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करायी है। महिला ने जांजगीर महिला थाने में कलेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है।

बस्तर निवासी  हैं जनक प्रसाद पाठक

मूलत:बस्तर निवासी  जनक प्रसाद पाठक राज्य सेवा से आगे बढ़े उन्हें  आईएएस अवार्ड घोषित किया गया है। उन्होंने हायर सेकेंडरी की परीक्षा बीजापुर जिले के भोपालपटनम से उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 1989-90 में शासकीय पीजी कॉलेज धरमपुरा से भूगर्भ शास्त्र में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 1994 में वे राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से डिप्टी कलेक्टरके रुप में चयनित हुए। पहली नियुक्ति राजनांदगांव में मिली, इसके बाद वे जांजगीर रायगढ़ में एसडीएम, जांजगीर-चांपा धमतरी में जिला पंचायत के सीईओ, दुर्ग में अपर कलेक्टर और कोरबा में जिला पंचायत के सीईओ रह चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में कलेक्टर द्वारा रेप की दूसरी घटना

छत्तीसगढ़ में कलेक्टर पर रेप का यह दूसरा मामला है। पाठक से पहले एमआर सारथी को रेप केस में हुई थी जेल की सजा…जेल में ही मौत हो गईजशपुर कलेक्टर एमआर सारथी को रेप के मामले में सात बरस की सजा हुई थी। जेल में ही उनकी मौत हो गई। बिलासपुर के एडिशनल कलेक्टर विनोद काटेला पर भी नौकरानी ने लगाई थी रेप का आरोप

जशपुर के तत्कालीन कलेक्टर एमआर सारथी पर 2002 में वहां की आदिवासी हाॅस्टल की अधीक्षिका ने रेप का आरोप लगाई थी। तब छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी। सरकार ने इस घटना की जांच के लिए उस समय के डीआईजी डब्लूएम अंसारी को जशपुर भेजा था। अंसारी ने एक हफ्ते कैंप कर जांच की और अपनी रिपोर्ट में रेप की घटना को सही ठहराते हुए सारथी को दोषी ठहराया था। लेकिन, सरकार को यह रिपोर्ट नागवार गुजरी। किन्हीं कारणों से सरकार सारथी को बचाना चाहती थी। आईएएस लाॅबी भी उस समय काफी स्ट्रांग थी। सरकार और आईएएस लाॅबी के चलते सारथी पर निलंबन की भी कार्रवाई नहीं हुई। जबकि, आदिवासी महिला न्याय की गुहार लगाती रही।
सारथी के खिलाफ कड़ाई से जांच करने की कीमत डीआईजी अंसारी को चुकानी पड़ी। सरकार ने उन्हें उस नए जिले में दंतेवाड़ा का डीआईजी बनाकर भेज दिया, जहां डीआईजी की कोई पोस्ट ही नहीं थी।
उधर, सारथी के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला। जशपुर की निचली अदालत ने सारथी को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई। सारथी ने इसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन, दोनों अदालतों ने निचली अदालत की सजा बरकरार रखी। आखिकार, सारथी को रायपुर जेल जाना पड़ा। जेल के दौरान ही बीमारी से उनकी मौत हो गई।
इससे पहले अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान 1998 में बिलासपुर के अपर कलेक्टर विनोद काटेला पर उनकी नौकरानी ने रेप करने का आरोप लगाया था। नौकरानी ने पुलिस में शिकायत की थी आईएएस ने शादी का झांसा देकर डेढ़ साल में अनेक बार दैहिक संबंध कायम की। काटेला का बाद में जबलपुर ट्रांसफर हो गया था।

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