केंद्र-राज्यों में सहयोग की कमी, सजा भुगत रहे आईएएस

नई दिल्ली : राज्यों में तैनात आईएएस अधिकारियों के केंद्र में डेप्युटेशन को लेकर विवाद हो गया है। कई राज्यों के आईएएस अधिकारियों ने शिकायत की है कि सेंट्रल डेप्युटेशन में कभी राज्य तो कभी केंद्र की ओर से बहुत रोड़े अटकाए जा रहे हैं और कई अधिकारी तमाम पैरामीटर पूरा करने के बावजूद केंद्र-राज्य के बीच समन्वय की कमी के कारण केंद्रीय सेवा में वक्त पर नहीं जा पाते हैं।

सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान सहित 12 राज्यों की आईएएस असोसिएशनों ने इस बारे में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। इसके बाद डीओपीटी ने आईएएस अधिकारियों के डेप्युटेशन को लेकर सभी राज्यों के मुख्य सचिव को अपनी राय देने को कहा है।

मौजूदा नियम के अनुसार आईएएस अधिकारियों को तीन साल जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में सेंट्रल डेप्युटेशन में काम करना होता है। इसके बाद ही वे अडिशनल सेक्रेटरी या सेक्रेटरी के लिए पैनल में आते हैं। मतलब यह कि तीन साल का डेप्युटेशन टॉप ब्यूरोक्रेसी में आने की सबसे बड़ी शर्त है, लेकिन राज्यों में तैनात अधिकारियों की शिकायत है कि राज्य सरकार उनका नाम समय पर जॉइंट सेक्रेटरी के लिए नहीं भेजती।

——–आईएएस काडर-सर्विस बांटने का नया प्रस्ताव खारिज

सिविल सर्विस परीक्षा में सफल छात्रों को फाउंडेशन कोर्स के बाद काडर-सर्विस बांटने का नया प्रस्ताव पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सेक्रेटरी से मिले निर्देश के बाद अब इस प्रस्ताव को खारिज कर भविष्य में नई कमिटी बनाने की बात कही गई है। मतलब इस कमिटी से जितने प्रस्ताव सामने आए थे, अब उनमें से कोई अमल नहीं होगा।

मालूम हो कि पीएमओ की पहल पर एक प्रस्ताव बनाया गया था, जिसमें प्रावधान किया गया था कि सिविल सर्विस परीक्षा में सफल छात्रों को एक साल फाउंडेशन कोर्स समाप्त करने और उसमें मिले अंक को जोड़कर ही उनका सर्विस और स्टेट काडर आबंटित होगा। इस प्रस्ताव पर जोरदार विवाद हुआ था और चुनावी साल में सरकार ने बिना जोखिम लेते हुए इसे रद्द कर दिया। डीओपीटी सूत्रों के अनुसार अब एक नई कमिटी का गठन करने की तैयारी है जो परीक्षा में बदलाव और सुधार के लिए नए सिरे से समीक्षा करेगी।

————विकलांग बच्चों की देखरेख के लिए ताउम्र मिल सकेगी छुट्टी

विकलांग बच्चों के माता-पिता को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके तहत केंद्रीय कर्मचारी विकलांग बच्चों के लिए चाइल्ड केयर लीव ताउम्र ले सकेंगे। अभी के नियम के अनुसार विकलांग बच्चों के लिए मात्र 22 साल की उम्र तक चाइल्ड केयर लीव मिलती थी, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों की ओर से ऐसे कई आवेदन आए, जिसमें कहा गया कि विकलांग बच्चों के लिए 22 साल की उम्र के बाद भी देखरेख की जरूरत होती है। हालांकि इसमें यह भी शर्त जोड़ी गई है कि यह छुट्टी कम से कम 5 दिन की होगी। ऐसा इस शिकायत के बाद किया गया है कि कई कर्मचारी अपने दूसरे निजी काम के कारण चाइल्ड केयर लीव ले लेते थे।

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